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ब्लैक होल कैसे बदलते हैं गियर

ब्लैक होल अत्यधिक शक्तिशाली और एक सशक्त इंजन हैं. ये न सिर्फ पदाथरें को निगलते हैं, बल्कि जिस पदार्थ या वस्तु को वे निगलते हैं, उसके बदले ब्रह्मांड में विशाल मात्रा में ऊर्जा छोड़ते हैं. इसके अलावा, जब कोई ब्लैक होल किसी…

ब्लैक होल कैसे बदलते हैं गियर
ब्लैक होल अत्यधिक शक्तिशाली और एक सशक्त इंजन हैं. ये न सिर्फ पदाथरें को निगलते हैं, बल्कि जिस पदार्थ या वस्तु को वे निगलते हैं, उसके बदले ब्रह्मांड में विशाल मात्रा में ऊर्जा छोड़ते हैं. इसके अलावा, जब कोई ब्लैक होल किसी वस्तु को अपनी ओर खींचता है, तो उस वक्त उनसे एक्स-रे विकिरण और ऊर्जा बाहर निकलती हैं. यह काफी समय से खगोल वैज्ञानिकों को आश्‍चर्यचकित करता रहा है. नीदरलैंड इंस्टीट्यूट फॉर स्पेस रिसर्च के शोधकर्ताओं ने दो सक्रिय ब्लैक होल का अध्ययन किया. इस अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों ने कहा है कि प्रत्येक ब्लैक होल में दो अलग-अलग क्षेत्रों में बदलाव आ सकता है. गौरतलब है कि साल 2003 में खगोलीय निरीक्षण से साफ हो गया था कि ब्लैक होल द्वारा एक्स-रे के उत्सर्जन और जेट प्रवाह में आपसी संबंध है. शोधकर्ताओं का कहना है कि अब इस बात की व्याख्या करने की जरूरत है कि ब्लैक होल इंजन किस तरह काम करते हैं. दोनों के बीच संबंधों की इस खोज के बाद ऐसा लगा कि सभी ब्लैक होल एक तरह से ही काम करते हैं. लेकिन, इसके तुरंत बाद ही ऑडबॉल्स की खोज हुई. इन असामान्य तरह के उदाहरणों से स्पष्ट पता चलता है कि एक्स-रे उत्सर्जन और उस जेट इजेक्शन में आपसी संबंध हैं. लेकिन, एक सामान्य ब्लैक होल में इनके समानुपात में अंतर होता है. जैसे-जैसे ऑडबॉल्स की संख्या बढ.ती जाती है, तो प्रतीत होने लगता है वहां ब्लैक होल इंजन के दो समूह है. जैसे कि एक पेट्रोल से चल रहे हों और दूसरा डीजल से. यह खोज उस सैद्धांतिक मॉडल्स के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है, जो ब्लैक होल इंजन और आसपास के वातावरण पर उसके प्रभाव को बतलाता है.(साभार –प्रभातखबर )
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