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करोड़ो साल पुराने जीवाश्मों का खजाना

52 करोड़ साल पुराने जीवाश्मों का खजाना चंद्रभूषण जीवाश्मशास्त्रियों के लिए मूसलों से ढोल बजाने का वक्त है। दक्षिण-मध्य चीन के हूपेई प्रांत में एक छोटी सी पहाड़ी नदी तानश्वी के किनारे उन्हें अतिप्राचीन जीवाश्मों का सबसे बड…

करोड़ो साल पुराने जीवाश्मों का खजाना
52 करोड़ साल पुराने जीवाश्मों का खजाना
चंद्रभूषण
जीवाश्मशास्त्रियों के लिए मूसलों से ढोल बजाने का वक्त है। दक्षिण-मध्य चीन के हूपेई प्रांत में एक छोटी सी पहाड़ी नदी तानश्वी के किनारे उन्हें अतिप्राचीन जीवाश्मों का सबसे बड़ा खजाना प्राप्त हुआ है। पत्थरों में दर्ज जीवजगत के प्रारंभिक दौर का इतना सुंदर नजारा संसार भर में इससे पहले कभी देखने को नहीं मिला था।

जीवाश्मों की खोज में निकली एक यूनिवर्सिटी टीम छिंगच्यांग नाम की जगह पर नदी किनारे बैठी लंच कर रही थी कि तभी एक वैज्ञानिक की नजर एक तरफ के चट्टानी करार के पैटर्न पर गई। इसमें भूरी और काली लहरें बनी थीं, जिनसे सुदूर अतीत में किसी समुद्री भूस्खलन का अंदाजा मिलता था।

फिर उन्होंने चट्टानी परतों को एहतियात से अलगाया तो उन्हें बिल्कुल पास-पास कई हजार समुद्री जानवरों के फॉसिल मिल गए। इनमें 101 जीवजातियों की पहचान की गई, जिनमें आधी से ज्यादा ऐसी हैं, जिन्हें पहली बार देखा गया है। पहचाने गए जीवों में 4 सेंटीमीटर का एक मड ड्रैगन भी है, जिसकी समुद्री कीचड़ में पाई जाने वाली मौजूदा नस्ल कुछ मिलीमीटर से ज्यादा बड़ी नहीं होती।

51 करोड़ 80 लाख साल पुराने ये जीवाश्म इतने संरक्षित हैं कि इनकी आंखें, तमाम मुलायम मांसपेशियां और कई के तो बाल से भी पतले अंग बिल्कुल साफ नजर आ रहे हैं। दरअसल इन सारे जीवों का संबंध कैंब्रियन युग (53 करोड़ से 49 करोड़ साल पूर्व) से है और इनके इतने सुघड़ संरक्षण की वजह यह है कि किसी भूकंप में दबकर ये समुद्र की तली में पहुंचे होंगे और वहीं ज्यों के त्यों पड़े रह गए होंगे।
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