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पृ थ्वी का दो-तिहाई हिस्सा पानी से भरा है. इसके बावजूद लोगों को पीने के पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ता है. इसकी बड़ी वजह है कि समुद्र का पानी खारा यानी लवणयुक्त होता है, जिसे हम नहीं पी सकते. लेकिन, अब समुद्र के इस…

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पृ थ्वी का दो-तिहाई हिस्सा पानी से भरा है. इसके बावजूद लोगों को पीने के पानी की समस्या से दो-चार होना पड़ता है. इसकी बड़ी वजह है कि समुद्र का पानी खारा यानी लवणयुक्त होता है, जिसे हम नहीं पी सकते. लेकिन, अब समुद्र के इस लवणयुक्त पानी में साफ बदलाव देखने को मिल रहा है. राष्ट्रमंडल वैज्ञानिक और औद्योगिक शोध संगठन एवं लॉरेंस लिवरमोर राष्ट्रीय प्रयोगशाला ने अपने शोध में यह पाया है. इस शोध के मुताबिक, पिछले 50 वर्षों में समुद्र के खारे में पानी बदलाव आया है. इसके पीछे जलवायु परिवर्तन को बड़ी वजह माना जा रहा है. इसशोध के दौरान जलवायु पैटर्न में पानी की लवणता, वर्षा और वाष्पीकरण के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया. इस अध्ययन में यह निष्कर्ष निकला कि 1950 से 2000 के दौरान जल चक्र में चार फीसदी की मजबूती आयी है. यह जितना आकलन किया गया था, उससे दो गुना है. शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे साबित होता है कि जलवायु और वैश्‍विक जल चक्र बदल चुके हैं. इन बदलावों से यह निष्कर्ष निकलता है कि पृथ्वी पर जो क्षेत्र सूखे हैं, वे और सूखे बन चुके हैं और गीले क्षेत्र (पानी वाले क्षेत्र) में अधिक वर्षा होती है. गौरतलब है कि इस सदी के अंत तक वैश्‍विक तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस तक की बढ.ोतरी का अनुमान लगाया गया है. ऐसे में शोधकर्ताओं का कहना है कि जल चक्र में 24 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है. वैज्ञानिक भू-आधारित आंकड़ों से जल चक्र में परिवर्तन का पता लगाने की असफल रहे हैं, लेकिन नयी शोध से नयी तसवीर सामने आयी है.
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