डॉ. आर्मस्ट्रॉन्ग की चिंता यह है कि यदि एजीआई से युक्त रोबॉट को मनुष्यों को परेशानी से बचाने की साधारण हिदायत भी दी जाए तो वह इसका अर्थ यह निकाल सकता है कि मनुष्यों को मारना है। यदि उसे यह कहा जाए कि मनुष्यों को सुरक्षित रखना है तो वह इसका मतलब यह निकालेगा कि मनुष्यों को बंदी बनाकर रखना है। उनका कहना है कि इंसानी भाषा गूढ़ होती है और उसका गलत अर्थ भी निकाला जा सकता है।एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास में लगी कंपनियां इस टेक्नॉलजी के अनियंत्रित होने के खतरों से भली भांति परिचित हैं। गूगल ने एआई पर चल रही रिसर्च पर नजर रखने के लिए एक नैतिक बोर्ड गठित किया है। कंपनी ने ब्रिटेन की डीपमाइंड सहित कुछ ऐसी कंपनियां खरीदी हैं जो कंप्यूटरों के लिए एआई से युक्त सॉफ्टवेयर विकसित कर रही हैं। इस सॉफ्टवेयर से कंप्यूटर मनुष्य की तरह सोचने लगेंगे। डीपमाइंड के एक संस्थापक डेमिस हैसाबिस ने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में चेतावनी दी थी कि एआई इस सदी की सबसे ज्यादा जोखिम भरी टेक्नॉलजी है और मनुष्य की विलुप्ति में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।
इससे पूर्व कई वैज्ञानिक भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरों पर अपनी चिंता व्यक्त चुके हैं। स्टीफन हॉकिंग ने पिछले साल कहा था कि रोबॉटों का उदय मानव जाति के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकता है। उनके मुताबिक एआई का उदय मानव इतिहास की सबसे बड़ी घटना होगी और यदि हमने इसके खतरों से बचना नहीं सीखा तो यह अंतिम घटना भी हो सकती है। एआई डिजिटल सहायकों और ड्राइवर रहित कारों के रूप में हमारे सामने आ रही है, लेकिन हॉकिंग के अनुसार यह मनुष्य जाति के लिए खतरे की घंटी है। मानव जाति के सामने अनिश्चित भविष्य इसलिए भी है क्योंकि टेक्नॉलजी ने अपने बारे में सोचना और माहौल के साथ खुद को ढालना सीख लिया है। लेकिन हॉकिंग ने यह भी माना कि यह टेक्नोलॉजी युद्ध,गरीबी और बीमारी के उन्मूलन में मनुष्य की मदद कर सकती है।
बहुचर्चित अमेरिकी उद्योगपति और वैज्ञानिक इलोन मस्क ने किसी समय एआई को बहुत बढ़ावा दिया था, लेकिन पिछले कुछ समय से वह इसके प्रबल आलोचक बन गए हैं। उनके मुताबिक एआई रिसर्च 'शैतान को आमंत्रित' करने जैसा है। उन्हें डर है कि अत्यधिक चतुर रोबॉट मनुष्य के अंत का कारण बन सकते हैं। मस्क चाहते हैं कि भविष्य के रोबॉट मनुष्यों के नियंत्रण में ही रहें। इसके लिए वे 36 रिसर्च परियोजनाओं पर धन लगा रहे हैं।