विज्ञान और ज्ञान की दुनिया में अकादमिक शोध पत्रिकाएँ हमेशा से विश्वसनीयता, मौलिकता और कठोर समीक्षा प्रक्रिया का प्रतीक रही हैं। लेकिन हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), विशेषकर चैटजीपीटी जैसे उपकरणों के बढ़ते उपयोग ने इस व्यवस्था के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, नवंबर 2022 में चैटजीपीटी के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने के बाद से वैज्ञानिक शोध-पत्रों के लेखन में एआई के उपयोग में 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि जितनी तेज़ है, उतनी ही चिंताजनक भी।