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हरक्युलिस ड्वार्फ का भयानक रास्ता

हरक्युलिस ड्वार्फ का भयानक रास्ता चंद्रभूषण धरती से दस लाख किलोमीटर दूर किसी कृत्रिम ग्रह की तरह सूर्य की परिक्रमा कर रहे यूरोपियन स्पेस एजेंसी के गाइया टेलीस्कोप ने पिछले तीन वर्षों में हमारी अपनी गैलेक्सी आकाशगंगा से ज…

हरक्युलिस ड्वार्फ का भयानक रास्ता
हरक्युलिस ड्वार्फ का भयानक रास्ता
चंद्रभूषण
धरती से दस लाख किलोमीटर दूर किसी कृत्रिम ग्रह की तरह सूर्य की परिक्रमा कर रहे यूरोपियन स्पेस एजेंसी के गाइया टेलीस्कोप ने पिछले तीन वर्षों में हमारी अपनी गैलेक्सी आकाशगंगा से जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियां मुहैया कराई हैं। इन्हीं जानकारियों में एक यह भी है कि कम से कम 50 छोटी गैलेक्सियां उपग्रहों की तरह हमारी आकाशगंगा के इर्द-गिर्द घूम रही हैं। लार्ज मैगेलनिक क्लाउड जैसी बड़ी सैटेलाइट गैलेक्सियों के बारे में जानकारी हमें पहले से थी, लेकिन हरक्युलिस ड्वार्फ जैसी इस बिरादरी की छोटी गैलेक्सियों के ब्यौरे हमारे लिए नई बात हैं।

बहुत धुंधली सी गैलेक्सी हरक्युलिस ड्वार्फ अभी हमारी आकाशगंगा के केंद्र से 4 लाख 60 हजार प्रकाशवर्ष की दूरी पर है लेकिन हाल में पता चला है कि इसका परिक्रमा पथ आकाशगंगा के भीतर से होकर गुजरता है। आकाशगंगा के केंद्र से यह अधिकतम 6 लाख प्रकाशवर्ष की दूरी तक जाती है और फिर वापस लौटती है। लेकिन अब से 50 करोड़ साल पहले यह हमारी आकाशगंगा के केंद्र से महज 16 हजार प्रकाशवर्ष की दूरी पर थी। ध्यान रहे, हमारा सूरज आकाशगंगा के केंद्र की परिक्रमा 27 हजार प्रकाशवर्ष की दूरी से करता है। यानी हिसाब बताता है कि एक समय ऐसा था, जब 70 लाख सूर्यों के वजन वाली हरक्युलिस ड्वार्फ सूरज के परिक्रमा पथ के भीतर से होकर निकली होगी!

यह बात पढ़ने में जितनी आसान है, सोचने पर उतनी ही डरावनी जान पड़ती है। भूगर्भशास्त्रियों को अंतरिक्षविज्ञानियों के साथ तालमेल बिठाकर यह पता करना चाहिए कि हरक्युलिस ड्वार्फ के इस भयानक रास्ते का कोई प्रभाव सौरमंडल पर और खासकर धरती पर भी दर्ज है या नहीं। कहीं ऐसा तो नहीं कि सूरज का अपनी धुरी पर साढ़े आठ डिग्री, पृथ्वी का साढ़े 23 डिग्री और यूरेनस का लगभग 90 डिग्री झुका होना इस प्राचीन गैलेक्सी की घुसपैठ के दौरान इसके ही किसी तारे की छेड़छाड़ का नतीजा है!

बौनी, विरल सैटेलाइट गैलेक्सी हरक्युलिस ड्वार्फ इतनी पुरानी है कि इसके सभी तारों की उम्र 12 अरब साल से ज्यादा, यानी सूरज की मौजूदा उम्र की कोई ढाई गुनी है। नए तारों का बनना इसमें बहुत पहले बंद हो चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगली परिक्रमा के बाद यह गैलेक्सी शायद नाम को ही बचे और इसके तारों का काफी बड़ा हिस्सा हमारी आकाशगंगा का ही अंग बनकर रह जाए। इससे आकाशगंगा का परिवार तो बढ़ेगा, लेकिन अभी की सेटिंग में जो उथल-पुथल मचेगी, उसकी कल्पना भी आसान नहीं है।
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