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शनि के उपग्रह में पानी के निशान

क्या धरती के अलावा कहीं और भी जीवन है? वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि शनि के सबसे ब.डे उपग्रह टाइटन में भी पानी के निशान मिले हैं. नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि शनि के सबसे ब.डे उपग्रह टाइटन की ठंडी सतह के नीचे एक सा…

शनि के उपग्रह में पानी के निशान

क्या धरती के अलावा कहीं और भी जीवन है? वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि शनि के सबसे ब.डे उपग्रह टाइटन में भी पानी के निशान मिले हैं. नासा के वैज्ञानिकों का कहना है कि शनि के सबसे ब.डे उपग्रह टाइटन की ठंडी सतह के नीचे एक सागर है. इस खोज के बाद टाइटन उन उपग्रहों में शामिल हो गया है जहां जीवन के लिए जरूरी तत्व पानी के पाये जाने की संभावना जतायी गयी है. नासा के अंतरिक्ष यान कैसिनी ने 2006 से लेकर 2011 के बीच दर्जनों बार टाइटन के चक्कर लगाया. इसी दौरान उसने टाइटन के गुरु त्व बल को मापने की कोशिश की जिसके नतीजों के आधार पर वैज्ञानिकों ने यह दावा किया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि शनि के चारों ओर घूमने के दौरान कैसिनी अपनी कक्षा की ओर सिकुड़ गया. यह तभी होता है जब नीचे कोई सागर या जलाशय होता है. अगर सतह पर केवल चट्टानें होतीं तो कैसिनी ऐसे लक्षण कभी नहीं दिखाता. कॉर्नेल विश्वि द्यालय के प्रोफेसर जोनाथन लुनिने का कहना है, टाइटन पर कीचड़ है. हालांकि वैज्ञानिकों ने सागर के आकार के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. अनुमान के मुताबिक इसका आकार 48 से लेकर 99 किलोमीटर तक हो सकता है. टाइटन की आंतरिक सतह में पानी मिलने की संभावना से वैज्ञानिक काफी उत्साहित हैं. टाइटन के अलावा बृस्पति के एक उपग्रह यूरोपा में भी सतह के नीचे पानी के लक्षण पाए गये हैं. वैज्ञानिकों के इस निष्कर्ष को विज्ञान पत्रिका साइंस में प्रकाशित किया गया है.
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