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रेगिस्तानों का आपसी बिरादराना

Chandrabhushan दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान अफ्रीका का सहारा मरुस्थल है, लेकिन यह दुनिया का सबसे पुराना रेगिस्तान नहीं है। सबसे पुराना रेगिस्तान होने का सेहरा मंगोलिया और चीन में पसरे गोबी के अपेक्षाकृत ठंडे मरुस्थल के…

 रेगिस्तानों का आपसी बिरादराना

Chandrabhushan

दुनिया का सबसे बड़ा रेगिस्तान अफ्रीका का सहारा मरुस्थल है, लेकिन यह दुनिया का सबसे पुराना रेगिस्तान नहीं है। सबसे पुराना रेगिस्तान होने का सेहरा मंगोलिया और चीन में पसरे गोबी के अपेक्षाकृत ठंडे मरुस्थल के सिर बंधा है। कार्बन डेटिंग के आधार पर हुई हाल की एक खोज में पाया गया है कि यह मरुस्थल तीन करोड़ साल पुराना है। भारत और पाकिस्तान में फैला थार मरुस्थल इसकी तुलना में तकरीबन आधा ही पुराना है, हालांकि संसार का सबसे बड़ा सब-ट्रॉपिकल मरुस्थल होने का दर्जा इसे ही हासिल है। दिलचस्प बात यह कि गोबी और थार, दोनों ही रेगिस्तानों के पीछे मुख्य खलनायक की भूमिका हिमालय पर्वत शृंखला ने ही निभाई है, जिसके खुद के बनने की कहानी लगभग साढ़े चार करोड़ साल पुरानी है। अगर खलनायक एक है तो दोनों मरुस्थलों की शुरुआत समय के इतने बड़े अंतर के साथ क्यों हुई? उनका भौगोलिक स्वरूप, उनकी वनस्पतियां, इतिहास में उनकी भूमिका इतनी अलग क्यों है? इसकी मुख्य वजह यह बताई जा रही है कि गोबी मरुस्थल को हिमालय के अलावा दो और खलनायकों का भी सामना करना पड़ा। अब से दो करोड़ साल पहले धरती तेजी से ठंडी हुई तो उत्तरी ध्रुव का बर्फीला दायरा बहुत बढ़ गया और गोबी क्षेत्र में दक्षिण के साथ-साथ उत्तर से आने वाली नमी भी रुक गई। इसके एक करोड़ साल बाद अल्टाई पर्वत शृंखला बनी तो एक ढक्कन गोबी के पश्चिम में भी जा लगा और नमी का सारा किस्सा ही खत्म हो गया। इसके विपरीत थार क्षेत्र को समुद्र की नजदीकी के चलते बीच-बीच में हरा होने का भी मौका मिलता रहा और दस-बीस हजार वर्षों का ऐसा ही एक छोटा सा वक्फा यहां सिंधु घाटी की सभ्यता के उदय और अस्त का साक्षी बन गया।
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