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प्रकाश की गति से तेज कुछ नहीं

आइंस्टीन ने सौ साल पहले कहा था कि प्रकाश की गति से तेज कुछ नहीं हो सकता है. पिछले साल सर्न के वैज्ञानिकों ने इस पर सवाल उठाया था और कहा था कि न्यूट्रीनो तेज हो सकते हैं. लेकिन साइंस डेली के अनुसार रोम की प्रयोगशाला में क…

प्रकाश की गति से तेज कुछ नहीं
आइंस्टीन ने सौ साल पहले कहा था कि प्रकाश की गति से तेज कुछ नहीं हो सकता है. पिछले साल सर्न के वैज्ञानिकों ने इस पर सवाल उठाया था और कहा था कि न्यूट्रीनो तेज हो सकते हैं. लेकिन साइंस डेली के अनुसार रोम की प्रयोगशाला में किये गये शोध के आधार पर कहा गया हैकि कई परीक्षणों के बाद यहां के वैज्ञानिकों ने मान लिया है कि आइंस्टीन सही थे. एटम यानी परमाणु से भी छोटे इस कण पर स्विट्जरलैंड की मशहूर सेर्न प्रयोगशाला में प्रयोग किए गये थे. इटली की ग्रैन सासो ने पिछले साल सितंबर में यह दावा किया था कि गति के मामले में प्रकाश को भी मात देने वाला कोई कण पा लिया गया है. कई वैज्ञानिकों ने सेर्न के उस प्रयोग के बाद से ही उस पर उंगली उठानी शुरू कर दी थी. क्योंकि उससे आइंस्टीन का बुनियादी सिद्धांत गलत साबित हो रहा था. साल 1905 में आइंस्टीन ने सापेक्षता का सिद्धांत दिया था, जिसमें कहा गया था कि इस ब्रह्मांड में कोई भी वस्तु प्रकाश की गति से तेज नहीं चल सकती. अगर यह सिद्धांत गलत साबित हो जाता, तो आधुनिक भौतिकी के दर्जनों सिद्धांत खारिज हो जाते, क्योंकि वे उसी बुनियाद पर तैयार हुए हैं. इसके अलावा विज्ञान की हजारों किताबों को दोबारा लिखना पड़ता. अपने प्रयोगों में सेर्न के वैज्ञानिकों ने एक-एक कर सात न्यूट्रीनो को छोड़ा और देखा कि उनकी रफ्तार लगभग प्रकाश की गति के बराबर ही है. सेर्न के वैज्ञानिक ब्रह्मांड की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए यह प्रयोग कर रहे हैं कि वे इस रहस्य से पर्दा उठाना चाहते हैं कि आखिर पृथ्वी और इसका वातावरण कैसा बना.
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