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दूसरी आकाशगंगा में ग्रहों के प्रमाण

साइंस पत्रिका में प्रकाशित इस खोज से ब्रrांड के इतिहास के मूल सिद्धांत की बुनियाद हिल सकती है जिसे अभी तक कोई चुनौती नहीं मिली थी मुकुल व्यास खगोल वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारी मिल्कीवे आकाशगंगा के बाहर ग्रहों की आबादी क…

दूसरी आकाशगंगा में ग्रहों के प्रमाण
साइंस पत्रिका में प्रकाशित इस खोज से ब्रrांड के इतिहास के मूल सिद्धांत की बुनियाद हिल सकती है जिसे अभी तक कोई चुनौती नहीं मिली थी
मुकुल व्यास खगोल वैज्ञानिकों ने पहली बार हमारी मिल्कीवे आकाशगंगा के बाहर ग्रहों की आबादी का पता लगाया है। उन्होंने यह खोज ‘माइक्रोलेंसिंग’ के जरिये की है। माइक्रोलेंसिंग एक खगोलीय प्रक्रिया है जो पृथ्वी से बहुत दूर स्थित ग्रहों को खोजने के लिए एक कुदरती दूरबीन का काम करती है। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ ओकलहोमा के शोधार्थियों ने माइक्रोलेंसिंग के जरिये दूसरी आकाशगंगाओं में खगोलीय पिंडों की मौजूदगी का पता लगाया है, जिनका द्रव्यमान चंद्रमा और बृहस्पति के द्रव्यमानों के बराबर है। यूनिवर्सिटी के भौतिकी और खगोल विज्ञान विभाग के प्रोफेसर शिन्यु दाई ने नासा की चंद्र एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण के बाद इन ग्रहों की खोज की है। 1चंद्र एक्स-रे ऑब्जर्वेटरी अंतरिक्ष में तैनात दूरबीन है जो स्मिथसोनियन एस्ट्रोफिजिकल ऑब्जर्वेटरी द्वारा नियंत्रित की जाती है। दाई ने कहा, हम इस खोज से बेहद रोमांचित है। यह पहला अवसर है जब किसी ने हमारी आकाशगंगा के बाहर ग्रहों की उपस्थिति का पता लगाया है। इस अध्ययन से पहले दूसरी आकाशगंगाओं में ग्रहों के मौजूद होने का कोई प्रमाण नहीं मिला था। माइक्रोलेंसिंग के जरिये मिल्कीवे आकाशगंगा में अक्सर नए ग्रहों की खोज होती है। छोटे-छोटे खगोलीय पिंडों के गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से पृष्ठभूमि की चीजें कई गुणा बड़ी दिखने लगती हैं। इस कुदरती मैग्निफाइंग ग्लास का उपयोग सुदूरवर्ती वस्तुओं के अवलोकन के लिए किया जा सकता है। जिस आकाशगंगा में नए ग्रहों की उपस्थिति का पता चला है वह पृथ्वी से 3.8 अरब वर्ष दूर है और पृथ्वी के सबसे उत्कृष्ट टेलीस्कोप से भी इन ग्रहों का प्रत्यक्ष अवलोकन नहीं किया जा सकता। अत: खगोलीय पर्ववेक्षण के लिए माइक्रोलेंसिंग से बेहतर और कोई तकनीक नहीं है। 1इस बीच, अंतरराष्ट्रीय खगोल वैज्ञानिकों के अन्य दल ने पृथ्वी से करीब 1.3 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर सेंटारस ए आकाशगंगा के इर्दगिर्द छोटी आकाशगंगाओं का पता लगाया है जो अपनी मूल आकाशगंगा के चारों तरफ एक डिस्क की भांति व्यवस्थित ढंग से चक्कर काट रही हैं। साइंस पत्रिका में प्रकाशित इस खोज से ब्रrांड के इतिहास के मूल सिद्धांत की बुनियाद हिल सकती है जो पिछले दो दशकों से निर्विवाद था। 1विज्ञान के स्टैंडर्ड मॉडल के मुताबिक ब्रrांड का करीब एक-पांचवां हिस्सा अदृश्य पदार्थ अथवा डार्क मैटर से बना है। इस मॉडल के अनुसार अधिकांश छोटी आकाशगंगाओं को अपनी मेजबान आकाशगंगाओं की अनियमित तरीके से परिक्रमा करनी चाहिए, लेकिन कुछ वर्ष पहले खगोल वैज्ञानिकों ने पता लगाया था कि मिल्कीवे और पड़ोसी एंड्रोमेडा आकाशगंगा के इर्दगिर्द छोटी आकाशगंगाएं भी एक सीध में परिक्रमा कर रही हैं। खगोल वैज्ञानिकों की टीम के सदस्य हेल्मुट जर्जेन ने बताया कि खगोल वैज्ञानिकों ने पहले यह सोचा था कि ये दो बड़ी आकाश गंगाएं अपवाद हो सकती हैं। अब ऐसा लगता है कि हमारी मिल्कीवे आकाशगंगा और एंड्रोमेडा आकाशगंगा सामान्य आकाश गंगाएं हैं। एक बड़ी आकाशगंगा के चारों तरफ चक्कर काटने वाली आकाश गंगाएं सर्वत्र मौजूद हैं।
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