सूचना संग्रहण की नई तकनीक डीएनए अथवा डिआक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड में हमारे जीवन का ब्लूप्रिंट होता है। पृथ्वी पर ज्ञात समस्त जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के लिए आनुवंशिक निर्देश इसी रसायन में दर्ज होते हैं। इस रसायन में सूचना…
31 JANUARY 20133 min readBy the Author
सूचना संग्रहण की नई तकनीक
डीएनए अथवा डिआक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड में हमारे जीवन का ब्लूप्रिंट होता है। पृथ्वी पर ज्ञात समस्त जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के लिए आनुवंशिक निर्देश इसी रसायन में दर्ज होते हैं। इस रसायन में सूचनाओं को संभाल कर रखने की अनोखी क्षमता है और वैज्ञानिक पिछले काफी समय से यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या हम डेटा संकलन के लिए इस क्षमता का उपयोग कर सकते हैं। अब ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि डिजिटल डेटा को डीएनए में संभाल कर रखा जा सकता है। कैम्बि्रज के निकट यूरोपियन बायो इंफोर्मेटिक्स इंस्टीटयूट के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम रूप से तैयार किए गए जीवन के मॉलिक्यूल के हिस्सों में शेक्सपीयर की कविताएं, मार्टिन लूथर के मशहूर भाषण के अंश, एक वैज्ञानिक पेपर और एक फोटो को संग्रहीत किया। उन्होंने संकलित सूचना को 100 प्रतिशत की शुद्धता के साथ सफलतापूर्वक पढ़ कर भी दिखा दिया। वैज्ञानिकों का दावा है कि डीएनए में बड़ी मात्रा में संकलित जानकारी को हजारों वर्ष तक सुरक्षित रखा जा सकता है। फिलहाल सूचना भंडारण के लिए कृत्रिम रूप से डीएनए का मॉलिक्यूल तैयार करना बहुत महंगा है। मसलन एक मेगाबाइट सूचना के भंडारण का खर्च अभी 12,400 डॉलर है और इस सूचना को दोबारा पढ़ने पर 220 डॉलर और खर्च करने पड़ेंगे। लेकिन वैज्ञानिकों का यह भी मानना है कि आने वाले दशकों में कृत्रिम डीएनए की लागत कम हो जाएगी और चुंबकीय टेपों की तुलना में डेटा संकेतबद्ध करना ज्यादा किफायती होगा। सरकारी और ऐतिहासिक रिकॉर्ड लंबे समय तक डीएनए के गुच्छे में संग्रहीत किए जा सकते हैं। ब्रिटिश टीम के प्रोजेक्ट लीडर निक गोल्डमैन का कहना है कि डीएनए लंबे समय तक स्थिर रहता है। हजारों वर्ष पुराने नमूनों में डीएनए ठीकठाक हालत में पाया गया है। यदि ये नमूने बर्फ में जमे हुए हैं तो वे और ज्यादा समय तक सही सलामत रहेंगे। मसलन मैमथ (लुप्त ऊनी हाथी) के नमूने हजारों वर्ष बीत जाने के बावजूद सुरक्षित हैं। डीएनए का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसमें बहुत बड़े पैमाने पर डेटा का संकलन किया जा सकता है और भंडारण के लिए बिजली की जरूरत भी नहीं पड़ती। डीएनए का भंडारण घनत्व करीब 2.2 प्रतिशत पेटाबाइट्स प्रति ग्राम है। एक पेटाबाइट में 1048576 गीगाबाइट्स होते हैं। डीएनए की भंडारण क्षमता इस वक्त इस्तेमाल में आ रहे समस्त भंडारण माध्यमों से कई हजार गुना अधिक है। सैद्धांतिक तौर पर हाई डेफिनेशन वीडियो के 10 करोड़ घंटों को डीएनए से भरे एक कप में स्टोर किया जा सकता है। बहुत सी जानकारियां ऐसी होती हैं, जिनकी हर रोज जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन फिर भी उन्हें संभाल कर रखना पड़ता है। ऐसे काम के लिए डीएनए भंडारण एक आदर्श विकल्प हो सकता है। हार्ड डिस्क-ड्राइव और चुंबकीय टैप जैसे मौजूदा भंडारण डिवाइसों की लगातार रखरखाव की जरूरत पड़ती है लेकिन डीएनए लाइब्रेरी के लिए ऐसी कोई कसरत नहीं करनी पड़ेगी। रिसर्चरों ने डेटा को डीएनए में संकेतबद्ध करने के लिए आनुवंश्हिक कोड के पांच अक्षरों ए, सी, जी और टी का इस्तेमाल शून्य और एक के रूप में किया है, जो डिजिटल सूचना के बाइट्स होते हैं। रिसर्चरों की इस तकनीक का ब्यौरा नेचर पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के आनुवांशिक वैज्ञानिक, प्रोफेसर जार्ज चर्च के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने पिछले साल डीएनए की अद्भुत भंडारण क्षमता को प्रदर्शित करने के लिए एक पूरी पुस्तक ही डीएनए में संग्रहीत कर दी थी। इस पुस्तक में 11 तस्वीरों और एक कंप्यूटर प्रोग्राम सहित 53,000 शब्द हैं।मुकुल व्यास