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| राष्ट्रीय सहारा |
पिछले दिनों विभिन्न तकनीकी नौकरियों की सैलरी की सर्वे करने वाली कंपनी टीमलीज ने एक रिपोर्ट में बताया कि देश में इलेक्ट्रिशियन फिटर और प्लंबर की मांग बहुत ज्यादा है और जबकि इंजीनियर्स की माँग बहुत कम और आपूर्ति बहुत ज्यादा है । टीमलीज के सर्वे के अनुसार बारहवीं पास इलेक्ट्रिशियन की औसत सैलरी 11300 रुपये प्रति माह है, जबकि डिग्री वाले इंजीनियर की औसत सैलरी 14800 रुपये प्रति माह यानी 3500 रुपये ज्यादा है। पिछले छह साल में इलेक्ट्रिशियन प्लंबर, टेक्निशियन का वेतन बढ़ा है। जबकि आईटी इंजीनियरों की एंट्री लेवल तनख्वाह लगभग उतनी ही है। रिपोर्ट के अनुसार दस साल पहले जब आईटी का बूम हुआ था तब काफी मांग थी। जबकि पिछले 10 सालों में माँग में बढ़ोत्तरी नहीं हुई है जबकि माँग के मुकाबले कई गुना ज्यादा इन्जीनियरिंग ग्रेजुएट निकल रहें है । हर साल देश में 15 लाख इंजीनियर बनते है लेकिन उनमें से सिर्फ 4 लाख को ही नौकरी मिल पाती है बाकी सभी बेरोजगारी का दंश झलने को मजबूर है । नेशनल एसोशिएसन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज यानी नैसकाम के एक सर्वे के अनुसार 75 फीसदी टेक्निकल स्नातक नौकरी के लायक नहीं हैं। आईटी इंडस्ट्री इन इंजीनियरों को भर्ती करने के बाद ट्रेनिंग पर करीब एक अरब डॉलर खर्च करते हैं। इंडस्ट्री को उसकी जरुरत के हिसाब से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट नहीं मिल पा रहें है । डिग्री और स्किल के बीच फासला बहुत बढ़ गया है । इतनी बड़ी मात्रा में पढ़े लिखे इंजीनियरिंग बेरोजगारों की संख्या देश की अर्थव्यवस्था और सामजिक स्थिरता के लिए भी ठीक नहीं है ।

