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चीन की नई मिसाइल

पिछले दिनों न्यूयार्क टाइम्स ने अमेरिका के सैन्य एवं खुफिया अधिकारियों के हवाले से यह खबर प्रकाशित की कि चीन ने नई पीढ़ी की अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल का विकास कर लिया है। इसे पनडुब्बी से लांच किया जा सकता है और यह मिसाइल कम…

चीन की नई मिसाइल
पिछले दिनों न्यूयार्क टाइम्स ने अमेरिका के सैन्य एवं खुफिया अधिकारियों के हवाले से यह खबर प्रकाशित की कि चीन ने नई पीढ़ी की अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल का विकास कर लिया है। इसे पनडुब्बी से लांच किया जा सकता है और यह मिसाइल कम से कम दस परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम है। डोंगफोंग-41 के नाम से जानी जाने वाली यह इंटर कांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आइसीबीएम) को चलंत लांचिंग प्रणाली से दागा जा सकेगा। इस तकनीक के कारण इस मिसाइल को लांच करने से पहले इसका पता लगाकर नष्ट करना एक कठिन कार्य होगा। इस तरह चीन ने मिसाइल सुरक्षा प्रणाली से निपटने की ताकत मजबूत कर ली है। डोंगफोंग-41 मिसाइल 12000 से 14000 किलोमीटर की लंबी दूरी तक मार कर सकती है। अमेरिकी सैन्य एवं खुफिया अधिकारियों की इस नई रिपोर्ट के मुताबिक चीन के पास तकरीबन 55 से 65 आइसीबीएम श्रेणी की मिसाइलें हैं। अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पनडुब्बी से लांच की जाने वाली इस मिसाइल का प्रयोग अमेरिका की मिसाइल सुरक्षा प्रणाली से निपटने के लिए कर सकता है। चीन की इस मिसाइल की जद में भारत व अमेरिका के कई शहर आते हैं। उल्लेखनीय है कि चीन की पश्चिमी सीमा से न्यूयॉर्क की दूरी 6945 मील तथा पूर्वी सीमा से सिएटल की दूरी 4349 मील है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि चीन ऐसी दो पनडुब्बियों को तैनात करने की योजना पर कार्य कर रहा है जिन पर 12 मिसाइलें तैनात की जाएंगी। चीन अपने पहले विमान वाहक पोत के समुद्री परीक्षण व अत्याधुनिक किस्म के लड़ाकू विमान जे-20 की उड़ान परीक्षण के बाद अपनी मिसाइलों की आधुनिकीकरण प्रक्रिया में लग गया है। चीन की डोंग फोंग-3 ए मिसाइल 2000 किलोग्राम थर्मो न्यूक्लियर आयुध के साथ लगभग 2800 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है। इसमें तरल ईंधन का प्रयोग किया गया है। यह एक चरण वाली मिसाइल है। इसी श्रेणी की दो चरण व तरल ईंधन वाली डोंग फोंग-4 ए मिसाइल 5000 किलोमीटर तक मार कर सकती है। यह मिसाइल भी अपने साथ 2000 किलोग्राम थर्मो न्यूक्लियर वारहेड ले जा सकती है। इसी तरह डोंग फोंग-5 ए में भी तरल ईंधन का प्रयोग किया गया है। यह भी दो चरण वाली मिसाइल है, लेकिन यह 2000 किलोग्राम के थर्मो न्यूक्लियर वारहेड के साथ 10,000 किलोमीटर की दूरी तक की संहारक क्षमता रखती है। चीन के पास 11,500 किलोमीटर तक मार करने वाली मिसाइल डोंग फोंग-31 ए है जो दक्षिण एशिया क्षेत्र में कहीं भी निशाना साध सकती है। इसी तरह डोंग फोंग-31 मिसाइल 1000 किलोग्राम की परमाणु आयुध सामग्री के साथ 10000 किलोमीटर तक की संहारक क्षमता रखती है। चीन ने भारतीय सीमा पर परमाणु क्षमता से लैस डी.एफ.-21 मिसाइल को तैनात कर रखा है। इसकी मारक क्षमता 1700 से 3000 किलोमीटर है। मतलब यह है कि भारत के प्रमुख शहर कोलकाता, डिब्रूगढ़, नई दिल्ली व चंडीगढ़ आदि इसकी मारक जद में होंगे। यह 600 किलोग्राम वजन का परमाणु विस्फोटक ले जाने में सक्षम है जो किसी भी शहर के विध्वंस के लिए काफी है। चीन ने नई मिसाइल प्रणाली एसएएम की तैनाती कर दी है जो ऊंचे और बेहद नीची उड़ान भरने वाले लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। इस प्रणाली को रेड फ्लैग-16 नाम दिया गया है। चीन युद्धपोत रोधी मिसाइलों को प्रशांत महासागर में तैनात कर रहा है। यह डोंग फोंग-21डी मिसाइल का परिवर्धित रूप है। इनकी मारक क्षमता 20,000 किलोमीटर की दूरी तक है। चीन ने 12 जनवरी, 2010 को हवा में ही मिसाइल मार गिराने का सफल परीक्षण किया था। इससे पहले यह तकनीक केवल अमेरिका व रूस के पास ही थी। जनवरी 2007 में चीन ने सैटेलाइट निरोधक मिसाइल प्रणाली का सफल परीक्षण किया था। चीन की इस ताकत को देखते हुए अमेरिका व भारत को अपनी तैयारी में ढील नहीं देना चाहिए। चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव की टिप्पणी (लेखक सैन्य विज्ञान विषय के प्राध्यापक हैं)
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