कुछ विकसित देशों में शरीर से बायोमीट्रिक डेटा प्राप्त करने का प्रचलन शुरू भी हो चुका है। सैक्सन के मुताबिक करीब 27 प्रतिशत अमेरिकी बायोमीट्रिक डेटा नापने के लिए किसी न किसी डिवाइस का प्रयोग कर रहे हैं। लोगों द्वारा प्रयुक्त किए जा रहे उपकरणों में एक रिस्टबैंड शामिल है जो शारीरिक गतिविधि और निद्रा के समय को रिकॉर्ड करता है। इस तरह के डिवाइस आगे चल कर ज्यादा उन्नत सेंसरों में तब्दील होंगे। जाहिर है इनसे मनुष्य और मशीन के बीच एक नया रिश्ता बनेगा, उनमें एक नया इंटरफेस बनेगा। इस तरह के सेंसर शरीर के भीतर प्रत्यारोपित किए जा सकेंगे और उनकी नेटवर्किंग की जा सकेगी। भविष्य में आपके शरीर के भीतर के सेंसरों को आपकी स्मार्ट कार के साथ जोड़ा जा सकेगा। इससे ड्राइविंग का मजा बढ़ जाएगा। सैक्सन का कहना है कि इस तरह के सेंसर आपको रोड रेज या पत्नी से झगड़ा करने से भी रोकेंगे। पश्चिमी बाजारों में शीघ्र ही ऐसे इंजेस्टिबल सेंसर आने वाले हैं, जिन्हें गोली के साथ निगला जा सकेगा। ये सेंसर यह देखेंगे कि मरीज ने अपनी दवा की खुराक निर्धारित मात्रा में ली है या नहीं। वे यह भी देखेंगे कि दवा की खुराक लेने के बाद शरीर के अंदर किस तरह की प्रतिक्रिया होती है। इससे डॉकटरों को दवा की सही मात्रा निर्धारित करने में मदद मिलेगी। सैक्सन का कहना है कि करीब 30 से 50 प्रतिशत मरीज डॉक्टरों द्वारा निर्धरित खुराक समुचित मात्रा में नहीं लेते। एक अमेरिकी दवा कंपनी द्वारा विकसित किए गए इंजेस्टिबल सेंसर को एफडीए की अनुमति मिल गई है। इस सेंसर का इस्तेमाल हृदय रोग से संबंधित एक ड्रग के साथ किया जाएगा।
सैक्सन का मानना है कि युवाओं, खासकर बच्चों में इस तरह के सेंसरों का प्रयोग विकासशील देशों में काफी उपयोगी साबित हो सकता है, जहां बीमारियां फैलने का खतरा ज्यादा रहता है। इन चिपों से काफी मदद मिल सकती है। इन सेंसरों के जरिए विकासशील देशों में कुपोषण और जन स्वास्थ्य की दूसरी समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने और उनका उपाय खोजने में भी मदद मिल सकती है।