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चांद पर जीवन !!

अंतरिक्ष में पहली बार कदम रखने के बाद से ही इंसानों का लक्ष्य रहा है चांद पर रहना. यही वजह है कि वहां जीवन की संभावनाओं की खोज के लिए कई अंतरिक्ष यान भी भेजे गये. यही वजह है कि चांद को पृथ्वी ही नहीं, इंसानों का भी मित्र…

चांद पर जीवन !!
अंतरिक्ष में पहली बार कदम रखने के बाद से ही इंसानों का लक्ष्य रहा है चांद पर रहना. यही वजह है कि वहां जीवन की संभावनाओं की खोज के लिए कई अंतरिक्ष यान भी भेजे गये. यही वजह है कि चांद को पृथ्वी ही नहीं, इंसानों का भी मित्र माना गया. लेकिन, हालिया शोध से पता चला है कि भले ही हम चांद पर रहने का सपना पाल रहे हों, लेकिन हमारा पड़ोसी उपग्रह हमारे लिए दोस्त साबित नहीं हो सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, चांद पर मौजूद धूलकण इंसानों के लिए जहरीला हो सकता है. दरअसल, चांद की सतह मोटे धूलकणों से लिपटी है. इन धूलकणों में पराबैंगनी किरणें और रेडियो एक्टिव पदार्थ मौजूद हो सकते हैं, जिससे विभित्र प्रकार के कैंसर जैसी बीमारियां हो सकती हैं. टेत्रेस्सी विश्‍वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने नील आर्मस्ट्रॉन्ग का हवाला दिया. आर्मस्ट्रॉन्ग ने ही चांद पर पहली बार कदम रखा था. उस वक्त अपोलो अभियान पर गये अंतरिक्ष यात्रियों ने त्वचा और आंखों पर पड़ने वाले प्रभावों का जिक्र किया था. कुल मिलाकर देखा जाये तो इंसानों ने चांद पर महज दो या तीन दिन का ही वक्त बिताया है और अधिकांश वक्त अंतरिक्ष यान या फिर स्पेस सूट में गुजारा है. शोधकर्ताओं का कहना है कि लंबी अवधि तक रहना और सांस लेना हानिकारक हो सकता है. उनके मुताबिक, चांद पर मौजूद धूलकणों में पराबैंगनी किरणें हो सकती हैं, जो हमारे फेफ.डे को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती हैं. अब जबकि हम जानते हैं कि श्‍वसन प्रक्रिया हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है, तो इन शोधों के बाद अब चांद की सतह पर घूमना हमारी दीर्घावधि योजना में शामिल नहीं हो सकता है.


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