Skip to content
Special Articles

इजरायल जैसा एयर डिफेंस सिस्टम चाहिए भारत को

डॉ . शशांक द्विवेदी डायरेक्टर , मेवाड़ यूनिवर्सिटी पिछले दिनों ईरान ने इजरायल पर बड़ा हमला करते हुए आधी रात को मिसाइल और ड्रोन से ताबड़तोड़ अटैक किया । ईरान ने 300 से अधिक घातक ड्रोन और विध्वंसक मिसाइलों से हमला किया, लेकिन…

इजरायल जैसा एयर डिफेंस सिस्टम चाहिए भारत को

डॉ.शशांकद्विवेदी

डायरेक्टर, मेवाड़यूनिवर्सिटी

पिछले दिनों ईरान ने इजरायल पर बड़ा हमला करते हुए आधी रात को मिसाइल और ड्रोन से ताबड़तोड़ अटैक किया । ईरान ने 300 से अधिक घातक ड्रोन और विध्वंसक मिसाइलों से हमला किया, लेकिन इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आइडीएफ) के एरो डिफेंस तकनीक ने उनमें से 99 फीसद को हवा में ही नष्ट कर दिया। इस बड़े हमले से इजरायल को कोई नुकसान नहीं हुआ जिससे ईरान के साथ दुनिया के बाकी देश भी हैरान हैं।

इजरायल पर हमास हमला करे, लेबनॉन हमला करे या फिर ईरान। इजरायल का मल्टीलेयर 'हवाई कवच' उसे बचा लेता है। 12 वर्षों से ये एयर डिफेंस सिस्टम इजरायल की सुरक्षा कर रहा है। सोचिए अगर ये एयर डिफेंस सिस्टम न होता तो न जाने कितने लोग मारे जाते।इजरायल का सबसे ज्यादा ताकतवर और क्लोज-एंड वेपन सिस्टम है आयरन डोम। साल 2011 में इजरायल ने आयरन डोम को अपने देश में तैनात किया। तब से यह हवाई रक्षा प्रणाली इजरायल के लोगों को हवाई हमलों बचा रहा है। अगर आयरन डोम अपनी तरफ 100 रॉकेट आता देखता है, तो वह अधिकतर को हवा में ही नष्ट कर सकता है ।

आयरन डोम एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को डेवलप करने वाली कंपनी रफाल इसका सक्सेज रेट 90% बताती है, लेकिन इस सिस्टम में कुछ खामियां भी हैं। यह पूरी तरह मिसाइल प्रूफ नहीं है। फिर भी आज के दौर में यह दुनियाँ का बेहतरीन डिफेंस सिस्टम है।

एरो एरियल डिफेंस सिस्टम

इज़रायल के एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने अमेरिकी मिसाइल रक्षा एजेंसी के सहयोग से एरो डिफेंस सिस्टम तैयार किया है, जो सतह से सतह पर मार करने वाली घातक मिसाइल प्रणाली है। यह प्रणाली इज़रायल की बहुस्तरीय वायु रक्षा प्रणाली को सबसे उम्दा स्तर का बनाती है।

इजराइल की एरो 2 मिसाइलें ऊपरी वायुमंडल में अपने हिट-एंड-किल दृष्टिकोण के साथ छोटी और मध्यम दूरी की मिसाइलों को रोक कर नष्ट कर देतीं हैं । इसके अलावा इजरायल के पास आयरन डोम, डेविड स्लिंग जैसे एरो डिफेंस सिस्टम हैं । इजरायल के आयरन डोम ने 2011 के बाद से हजारों रॉकेटों को मार गिराया है, लेकिन इसकी मारक क्षमता छोटी दूरी तक ही सीमित है। इज़रायल के पास मध्यम से लंबी दूरी तक के लिए एक इंटरसेप्टर भी है, जिसे डेविड स्लिंग के नाम से जाना जाता है। यह ड्रोन धीमी गति से चलता है, जो रडार सिस्टम को भ्रमित कर देता है।

भारत का स्वदेशी आयरन डोम

भारतीय जल्द ही इजरायल की तर्ज पर आयरन डोम बनाने जा रहा है। इसकी मारक क्षमता 400 किलोमीटर तक होगी। यह ऐसा एयर डिफेंस सिस्टम होगा, जो 400 किलोमीटर की रेंज में दुश्मनों की सभी मिसाइलों, रॉकेटों, अटैक हेलीकॉप्टरों और फाइटर जेट्स को हवा में ही मारकर गिरा देगा। भारतीय रक्षा एवं अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) ने इस एंटी एयर डिफेंस सिस्टम आयरन डोम पर काम करना शुरू कर दिया। इसके बन जाने पर यह दुश्मनों के रॉकेटों और मिसाइलों को हवा में ही मार कर गिरा देगा। ऐसे में रॉकेटों और मिसाइलों से होने वाली तबाही को बचाया जा सकेगा। आयरन डोम बनने से भारतीय सेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

इजरायल की तर्ज पर बनने वाले इस आयरन डोम को भारत ने लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर (LRSAM) नाम दिया है। यह तीन लेयर का होगा, जो सतह से हवा में मिसाइलों और रॉकेट को मार गिराएगा। इजरायल अपने आयरन ड्रोम की वजह से ही हमास आतंकियों को शक्तिशाली रॉकेट को हवा में ही नष्ट कर दे रहा है। दुनिया के सिर्फ चुनिंदा देशों के पास ही आयरन डोम है। इनमें से ज्यादातर देशों ने इजरायल से ही समझौता करने के बाद अलग-अलग नामों से आयरन डोम बनाया है।

यह स्वदेशी आयरन डोम मिसाइलों, रॉकेटों के अलावा लड़ाकू हेलीकॉप्टरों और दुश्मनों के फाइटर जेट को भी 400 किलोमीटर की रेंज में हवा में ही मारकर जमीन पर गिरा देगा। इसे बनाने में 20 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। अपना आयरन डोम बनाने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शुमार हो जाएगा, जिनके पास खुद का एंटी एयर डिफेंस सिस्टम है। ऐसे देशों में अमेरिका, रूस, चीन, इजरायल जैसे देश शामिल हैं। रूस का एस-400 भी इसी तरह की वायु सुरक्षा प्रणाली है।

भारत ने इजरायल के सहयोग से मीडियम रेंज का एंटी एयर डिफेंस सिस्टम पहले से बना रखा है। मगर इसकी क्षमता अभी सिर्फ 70 किलोमीटर तक मार करने की है। यह एयर डिफेंस सिस्टम 70 किलोमीटर की रेंज में दुश्मनों की मिसाइलों, रॉकेट, फाइटर जेट, लड़ाकू विमान आदि को हवा में ही मारकर नष्ट कर सकता है। मगर भारत अब अपने इस नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है, जिसकी रेंज 400 किलोमीटर तक होगी।

फिलहाल चीन और पाकिस्तान की सीमा पर भारत ने रूस से आयातित एस-400 एंटी एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती कर रखी है। इसके लिए भारत के पास 3 स्क्वाड्रन हैं। दो अन्य स्क्वाड्रन जल्द और भारत आने हैं। चीन के पास भी रूस जैसा एंटी एयर डिफेंस सिस्टम है। मगर चीनी एयर डिफेंस सिस्टम की क्षमता रूस के एस-400 की तुलना में काफी कम है। चीन के इस एयर डिफेंस सिस्टम की वास्तविक रेंज का वास्तविक पता नहीं है। मगर कहा जाता है कि यह 300 किलोमीटर तक हो सकती है। जबकि रूस के एस-400 की क्षमता 400 किलोमीटर तक के रेंज में हवाई सुरक्षा करने की है।

कुलमिलाकर वर्तमान समय में भारत की रक्षा जरूरतों और नागरिक सुरक्षा को देखते हुए स्वदेशी आयरन डोम जरुरी हो गया है ।

(लेखकमेवाड़यूनिवर्सिटीमेंडायरेक्टरऔरटेक्निकलटूडेपत्रिकाकेसंपादकहैं)

Continue reading

Special Articles

All in topic
एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस
Special Articles

एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस

डॉ. शशांक द्विवेदी परियोजना प्रबंधक , टीएसएससी (कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय , भारत सरकार) भारत आज ऊर्जा परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं ने करोड़ों घरों तक…

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ
Special Articles

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ

आज हम ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) हमारे जीवन, कामकाज और सोचने के तरीके को बदल रही है। एआई आज हर क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, उद्योग, मीडिया—में अपनी…

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई
Special Articles

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई

चंद्रभूषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की चर्चा अभी दुनिया में सबसे ज्यादा बिजली खाने वाली तकनीकों की तरह हो रही है। सन 2022 में लगाए गए हिसाब के मुताबिक ये दोनों उस समय दुनिया की दो फीसदी बिजली हजम कर रही…