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अंतरिक्ष सुरक्षा को भी प्रभावी बनाने के जरुरत

सैन्य अंतरिक्ष नीति को भी असरदार बनाने की जरुरत भारत को अपनी सैन्य अंतरिक्ष नीति को असरदार और व्यापक बनाना होगा साथ में सरकार को इसके ढाँचे में सक्रिय सैन्य भागीदारी पर भी जोर देने की जरूरत है। पिछले दिनों इंस्टीट्यूट ऑफ…

अंतरिक्ष सुरक्षा को भी प्रभावी बनाने के जरुरत

सैन्य अंतरिक्ष नीति को भी असरदार बनाने की जरुरत भारत को अपनी सैन्य अंतरिक्ष नीति को असरदार और व्यापक बनाना होगा साथ में सरकार को इसके ढाँचे में सक्रिय सैन्य भागीदारी पर भी जोर देने की जरूरत है। पिछले दिनों इंस्टीट्यूट ऑफ डिफेंस रिसर्च एंड एनालिसिस (आईडीएसए) की ताजा ‘स्पेस सिक्योरिटी रिपोर्ट’ कहती है कि दुनिया में बदलती सामरिक परिस्थितियों और पड़ोस में चीन के अंतरिक्ष के क्षेत्र में अपने दायरे को बढ़ाने के जबरदस्त प्रयास के बावजूद भारत की सैन्य तैयारियाँ मुख्य रूप से जमीन पर ही केंद्रित हैं।
बदलती सामरिक परिस्थिति में भारत के समक्ष न केवल थल, जल और वायु क्षेत्र से चुनौतियाँ पेश आ रही हैं, बल्कि ‘अंतरिक्ष’ काफी महत्वपूर्ण बन गया है। इस समय भारत की सैन्य अंतरिक्ष नीति को व्यापक बनाए जाने की सख्त जरूरत है, क्योंकि वर्तमान अंतरिक्ष नीति मुख्य रूप से नागरिक उद्देश्यों के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा संचालित है।

भारत का अंतरिक्ष से जुड़ा सैन्य कार्यक्रम तो है, लेकिन यह काफी छोटा है। चीन अंतरिक्ष के क्षेत्र में लगातार प्रयोग कर रहा है। इसी के तहत वर्ष 2007 में उसने खुद के उपग्रह को निशाना बनाते हुए उसे मार गिराया था। इससे पहले अमेरिका और रूस ने भी 1985 में ऐसे ही प्रयोग किए थे। पड़ोस में जहाँ अंतरिक्ष के क्षेत्र में इस तरह के प्रयोग हो रहे हैं, वहीं भारत अभी भी पारंपरिक शक्ति बनने के लिए संघर्ष कर रहा है।चीन के अपने उपग्रह को निशाना बनाने के परीक्षण से साबित हो गया है कि देश की अंतरिक्ष परिसम्पत्तियों की सुरक्षा नीति को व्यापक बनाने की सख्त जरूरत है। इस नीति में सैन्य संकाय को भी शामिल किया जाना चाहिए।

अंतरिक्ष सुरक्षा पर मैक्सवेल एयरफोर्स बेस के स्कूल ऑफ एडवांस एयर एंड स्पेस स्टडीज के प्रोफेसर जान बी शेल्डन ने अपने लेख में कहा कि वाणिज्य और शासन व्यवस्था से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अधिक से अधिक देशों के उपग्रह पर निर्भर होने के कारण अंतरिक्ष को युद्ध के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता है।
अगर कोई देश युद्ध का सटीक संचालन उपग्रह के माध्यम से करता है तो यह कैसे संभव है कि जंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला यह कारगर माध्यम युद्ध के दायरे से बाहर रहे। कई विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका का ‘स्टार वार’ कार्यक्रम इसी सोच का हिस्सा था। चीन आज इसी पर काम कर रहा है। देश के सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार जमीन, साइबर दुनिया एवं अंतरिक्ष के क्षेत्र में चीन का बढ़ता दखल चिंता का विषय है। चीन दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बनना चाहता है। अपने उपग्रह को मार गिराना और अंतरिक्ष के क्षेत्र में उसका प्रयास इसी सोच का हिस्सा है।
चीन के सकल घरेलू उत्पाद के अगले दो दशकों में अमेरिका के जीडीपी को पार कर जाने की उम्मीद की जा रही है। वह आर्थिक, प्रौद्योगिकी एवं सैन्य क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है।
अमेरिका ने इसका आकलन करते हुए भारत के साथ मजबूत सामरिक गठजोड़ किया और उच्च प्रौद्योगिकी क्षमता के रक्षा उत्पादों की बिक्री पर सहमति व्यक्त की।
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