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नवें ग्रह की खोज में

नवें ग्रह की खोज में चंद्रभूषण परंपरा से नवग्रह पूजन के आदी हम भारतीयों के लिए प्लूटो के ग्रहसूची से बाहर हो जाने के बाद ग्रहों का घट कर आठ ही रह जाना किसी पर्सनल ट्रैजडी से कम नहीं है। लेकिन सौर मंडल के बाहरी हिस्से पर…

नवें ग्रह की खोज में
नवें ग्रह की खोज में
चंद्रभूषण
परंपरा से नवग्रह पूजन के आदी हम भारतीयों के लिए प्लूटो के ग्रहसूची से बाहर हो जाने के बाद ग्रहों का घट कर आठ ही रह जाना किसी पर्सनल ट्रैजडी से कम नहीं है। लेकिन सौर मंडल के बाहरी हिस्से पर काम कर रहे अंतरिक्ष विज्ञानियों की मानें तो आने वाले समय में ग्रहों की संख्या एक बार फिर आठ से बढ़कर नौ हो सकती है। हवाई के मौना-की पर्वत पर कनाडा और फ्रांस के सहयोग से बने विशाल टेलीस्कोप से 2013 और 2017 के बीच किए गए आउटर सोलर सिस्टम ओरिजिन्स सर्वे (ओसोस) ने बाहरी सौरमंडल में 840 पिंड खोजकर रहस्यों का बहुत बड़ा पिटारा खोल दिया है।

इनमें 2015 बीपी 519 समेत उन नौ पिंडों का आकर्षण सबसे ज्यादा है, जो सूरज की परिक्रमा 20 हजार साल या इससे भी ज्यादा समय में सौरमंडल के ग्रहीय तल से काफी झुकी हुई कक्षाओं में करते हैं। हमारी पृथ्वी के कुछ सहोदर ऐसे भी हैं, जिनका एक साल हमारे 20 हजार वर्षों से भी ज्यादा लंबा होता है, यह बात किसी को भी हैरत में डाल सकती है। लेकिन इनकी शिनाख्त के साथ ही यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि सूरज से इतनी दूर इनकी मौजूदगी की वजह क्या हो सकती है।

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ऐसा इस सुदूर इलाके में किसी बड़े ग्रह की उपस्थिति में ही संभव है, जिसका वजन पृथ्वी का दस गुना हो सकता है। सूरज से इतनी दूर, इतने विराट अंधियारे दायरे में सौर परिवार के इस संभावित नवें वरिष्ठ सदस्य की उपस्थिति के संकेत कैसे खोजे जाएं, यह खगोल विज्ञान का अगला सिरदर्द साबित होने जा रहा है।
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