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अंतरिक्ष यात्रा पर विशेष

चंदन मिश्रा इनसान कुदरत की हर एक पहेली को सुलझाने में मशगूल है. अपनी इस जिद में वह कभी अनंत अंतरिक्ष की गहराइयों को नापने निकल पड़ता है , तो कभी इस धरती के हर मुमकिन हिस्से की थाह लेना चाहता है. अपने इस जुनून में वह अपनी…

अंतरिक्ष यात्रा पर विशेष

चंदन मिश्रा इनसान कुदरत की हर एक पहेली को सुलझाने में मशगूल है. अपनी इस जिद में वह कभी अनंत अंतरिक्ष की गहराइयों को नापने निकल पड़ता है, तो कभी इस धरती के हर मुमकिन हिस्से की थाह लेना चाहता है. अपने इस जुनून में वह अपनी शारीरिक और मनोवैज्ञानिक सीमाओं को लगातार किस हद तक विस्तार दे रहा है, इसे दूसरी बार अंतरिक्ष में पहुंची सुनीता विलियम्स और अंटार्कटिक के सर्द अंधेरे में शोध में जुटे अलेक्जेंडर कुमार की कोशिशों के बरक्स पढ़ा और महसूस किया जा सकता है. किन विषम हालात में भारतीय मूल के ये दो जाबांज अपने लक्ष्य तक पहुंचने में जुटे हैं, इसी पर विशेष प्रस्तुति
भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स एक बार फिर अंतरिक्ष में हैं. इस बार लगभग चार महीने तक वह अंतरिक्ष में ही बिताएंगी. वह अंतरिक्ष से ही लंदन ओलिंपिक का लुत्फ उठायेंगी. यही नहीं नवंबर में होने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट भी वहीं से देंगी. इन बातों से एक बारगी लगता है कि अंतरिक्ष में जाना कितना आसान है. लेकिन, ऐसा बिल्कुल नहीं है. जब कोई अंतरिक्षयात्री मिशन पर जाता है तो उसके लिए तैयारियां काफी पहले से ही शुरू हो जाती हैं.

एक तरफ अंतरिक्ष यान तो दूसरी तरफ अंतरिक्षयात्री खुद को अंतरिक्ष की परिस्थितियों के मुताबिक ढालने वाली स्थितियों में रहने लगते हैं. इस दौरान उनके खानपान से लेकर पोशाक तक का ख्याल रखा जाता है. सामान्य पोशाक और स्थितियों में अंतरिक्ष में कदम नहीं रखा जा सकता है.

क्या है स्पेस वॉक

अंतरिक्ष में किसी भी समय जब कोई अंतरिक्षयात्री यान से निकलकर अंतरिक्ष में कदम रखता है, तो उसे स्पेस वॉक कहते हैं. 18 मार्च, 1965 को रूसी अंतरिक्षयात्री एल्केसी लियोनोव ने पहली बार स्पेस वॉक किया था. आज समय-समय पर अंतरिक्षयात्री स्पेस वॉक के लिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से बाहर जाते हैं.

आसान नहीं है स्पेस वॉक

जब अंतरिक्षयात्री स्पेस वॉक पर जाते हैं, तो वे एक विशेषप्रकार की पोशाक (स्पेस सूट) पहनते हैं. यह पोशाक उन्हें अंतरिक्ष में सुरक्षित रखती है. स्पेस सूट के अंदर ऑक्सीजन की व्यवस्था रहती है, ताकि अंतरिक्षयात्री सांस ले सकें. क्योंकि वहां इतनी ऊंचाई पर ऑक्सीजन की समस्या होती है. सांस के तौर पर सिर्फ ऑक्सीजन लेने से अंतरिक्षयात्री के शरीर से सारा नाइट्रोजन बाहर निकल जाता है. यदि उनके शरीर में जरा भी नाइट्रोजन हो तो उससे स्पेस वॉक के दौरान अंतरिक्षयात्री के शरीर से नाइट्रोजन का बुलबुला निकल सकता है.

इस बुलबुले से उनके कंधे, कोहनी, कलाई और घुटनों में तेज दर्द हो सकता है. यानी शरीर के जोड़ वाले हिस्से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं. यह स्पेससूट उन्हें वॉक पर जाने से कई घंटे पहले ही पहनना पड़ता है. यह सूट इतना बड़ा होता है कि इसे पहले पहनकर अभ्यास करना जरूरी होता है, ताकि अंतरिक्षयात्री खुद को आरामदेह महसूस कर सकें और सूट से जुड़ी तकनीकी बातों को अच्छी तरह समझ सकें. इतना ही नहीं, स्पेस सूट अंतरिक्षयात्री को सामान्य तापमान में रहने योग्य बनाता है. क्योंकि अंतरिक्ष में तापमान शून्य से 200 डिग्री कम या 200 डिग्री अधिक भी हो सकता है. इन तैयारियों के बाद अंतरिक्षयात्री स्पेस वॉक के लिए तैयार रहते हैं. इस वॉक के लिए यान से वे एक विशेष दरवाजे से बाहर निकलते हैं.

इसे एयरलॉक के नाम से जाना जाता है. एयरलॉक में दो दरवाजे होते हैं. जब अंतरिक्षयात्री यान के अंदर होते हैं तो एयरलॉक इस तरह बंद होता है कि अंदर की जरा-सी भी हवा बाहर न जाने पाये. जब अंतरिक्षयात्री स्पेस वॉक के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं तो वे एयरलॉक के पहले दरवाजे से बाहर जाते हैं और पीछे से उसे मजबूती से बंद कर देते हैं.

इसके बाद वे एयरलॉक का दूसरा दरवाजा खोलते हैं. स्पेस वॉक पूरा करने के बाद फिर एयरलॉक से ही वे यान के अंदर आते हैं.

प्रशिक्षण का मुश्किल दौर

स्पेस वॉक करने वाले अंतरिक्षयात्री प्रशिक्षण का एक तरीका तैराकी अपनाते हैं. हालांकि, अंतरिक्ष में तैरना, पानी में तैरने से काफी अलग होता है. अंतरिक्षयात्री विशाल स्वीमिंगपुल में पानी के नीचे अभ्यास करते हैं. यह पुल तटस्थ प्लवनशील प्रयोगशाला (न्यूट्रल बाइअन्सी लेबोरेट्री) कहलाता है. अगर किसी मिशन पर अंतरिक्षयात्री को एक घंटे के लिए स्पेस वॉक पर जाना होता है तो वह हर रोज लगभग सात घंटे तक पुल के अंदर अभ्यास करके खुद को उसके अनुकूल ढालता है.

स्पेस वॉक के दौरान कैसे रहते हैं सुरक्षित
स्पेस वॉक के दौरान अंतरिक्षयात्री खुद को यान के करीब रखने के लिए टेदर का इस्तेमाल करते हैं. यह रस्सी की तरह होता है, जिसका एक सिरा स्पेसवॉक करने वाले और दूसरा यान से जुड़ा होता है. टेदर यात्री को अंतरिक्ष में यान से काफी दूर जाने से रोकता है. इसके अलावा अंतरिक्षयात्री सेफर (सिंपलिफायड एड फॉर इवीए रेसक्यू) भी पहनते हैं. इसे पीठ पर थैले की तरह पहना जाता है. स्पेस वॉक के दौरान जब अंतरिक्षयात्री से बंधी रस्सी खुल जाती है और वह यान से काफी दूर जाने लगता है, तो यह सेफर उसे वापस यान में लौटने में मदद करता है. स्पेस वॉकर सेफर को जॉयस्टिक से नियंत्रित करता है. अंतरिक्ष में पहला स्पेस वॉक करने वाले अंतरिक्षयात्री थे, रूस के एल्केसी लियोनोव. उन्होंने 8 मार्च, 1965 को पहली बार स्पेस वॉक किया था. लियोनोव ने 10 मिनट तक वॉक किया था.टालनी पड़ी थी वॉक
अंतरिक्षयान एंडेवर के साथ गये अंतरिक्षयात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस सेंटर में एक यात्री की विशेष पोशाक में कार्बन डाई ऑक्साइड गैस भर जाने के कारण तय समय से पहले स्पेस वॉक खत्म करनी पड़ी थी.दूसरीअंतरिक्ष में पहला स्पेस वॉक करने वाले अंतरिक्षयात्री थे, रूस के एल्केसी लियोनोव. उन्होंने 8 मार्च, 1965 को पहली बार स्पेस वॉक किया था. लियोनोव ने 10 मिनट तक वॉक किया था.टालनी पड़ी थी वॉक
अंतरिक्षयान एंडेवर के साथ गये अंतरिक्षयात्रियों को इंटरनेशनल स्पेस सेंटर में एक यात्री की विशेष पोशाक में कार्बन डाई ऑक्साइड गैस भर जाने के कारण तय समय से पहले स्पेस वॉक खत्म करनी पड़ी थी.दूसरी बार अंतरिक्ष में
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स दूसरी बार अंतरिक्ष यात्रा पर गयी हैं. इससे पहले वह 2006 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) में छह महीने गुजार चुकी हैं. इस बार भी वह स्पेस वॉक करेंगी. बार अंतरिक्ष में
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स दूसरी बार अंतरिक्ष यात्रा पर गयी हैं. इससे पहले वह 2006 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र (आईएसएस) में छह महीने गुजार चुकी हैं. इस बार भी वह स्पेस वॉक करेंगी.



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