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5 जी से उम्मीदें और चुनौतियाँ

देश में मोबाइल टेलीफोन की 4-जी डाटा सेवा बहुत पहले ही शुरू हो गई थी, लेकिन अभी भी इसे लेकर की जाने वाली शिकायतें कम नहीं हुई हैं। आप 4-जी के जरिए किसी से बात करें, तो इसकी संभावना बहुत कम ही है कि बातचीत बिना किसी बाधा क…

5 जी से उम्मीदें और चुनौतियाँ
देश में मोबाइल टेलीफोन की 4-जी डाटा सेवा बहुत पहले ही शुरू हो गई थी, लेकिन अभी भी इसे लेकर की जाने वाली शिकायतें कम नहीं हुई हैं। आप 4-जी के जरिए किसी से बात करें, तो इसकी संभावना बहुत कम ही है कि बातचीत बिना किसी बाधा के पूरी हो जाए। मोबाइल पर इस सेवा के जरिए कोई वीडियो देखना कितना परेशानी भरा होता है, वह 4-जी इस्तेमाल करने वाले जानते हैं। हालांकि जब 4-जी सेवा शुरू हुई थी, तब कहा यही गया था कि अब ये सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। कई लोगों का अनुभव तो यह भी है कि बहुत सी जगहों पर यह सेवा 3-जी और यहां तक कि 2-जी की गति से ही चलती है। दिल्ली जैसे महानगर तक में हर जगह आपके फोन पर 4-जी की सिग्नल दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है, जबकि दिल्ली उन जगहों में से है, जहां सबसे पहले यह सेवा शुरू हुई थी। लेकिन इन सारी समस्याओं के बावजूद अगर सरकार ने 2020 तक 5-जी की सेवा शुरू करने की घोषणा की है, तो उसका अपना महत्व है। हालांकि बाधाएं बहुत हैं, फिर भी अगर हम इसे कर सके, तो तकनीक के कैलेंडर में भारत के पिछड़ेपन को दूर करने का एक काम तो होगा ही। इसे समझने के लिए दुनिया और भारत में डाटा सेवाओं के आगमन को जानना जरूरी है। दुनिया में 1-जी सेवा ने 1979 में दस्तक दी थी और 1981 में यह कई पश्चिमी देशों में इस्तेमाल होने लगी थी। यानी उस समय, जब हम ग्राहम बेल के जमाने के फोन से ही काम चला रहे थे, कंप्यूटर जैसी चीजें हमारे सार्वजनिक तो क्या, औद्योगिक विमर्श में भी नहीं थीं। लेकिन दस साल के भीतर दुनिया ने 2-जी सेवाओं का इस्तेमाल शुरू कर दिया और हम तब मोबाइल सेवा को भारत में लाने पर ही विचार कर रहे थे। 3-जी सेवाओं में भी हम इतना ही पिछडे़ रहे। इस मामले में हम कितना पिछड़े, इसे इस उदाहरण से समझा जा सकता है कि जब दुनिया ने 4-जी को अपना लिया, उसके कुछ समय बाद हमारे देश में 2-जी स्पेक्ट्रम का घोटाला हुआ, जिसका मामला आज भी अदालतों के चक्कर लगा रहा है। 5-जी सेवाओं की सरकार की घोषणा को हमें इस पृष्ठभूमि में देखना चाहिए। 5-जी सेवाओं पर पूरी दुनिया में इस समय शोध हो रहा है, लेकिन इनका व्यावसायिक इस्तेमाल अभी कहीं भी शुरू नहीं हुआ है। उम्मीद है कि हर कहीं इसका इस्तेमाल 2020 में ही शुरू हो सकेगा। यानी यह पहला मौका होगा, जब इस कैलेंडर में हम पिछड़ेंगे नहीं। यह भी ध्यान रखना होगा कि 5-जी की यह घोषणा उस समय की जा रही है, जब देश की टेलीकॉम कंपनियां अपनी परेशानियों को लेकर काफी हाय-तौबा कर रही हैं। यह कहा जा रहा है कि टेलीकॉम उद्योग बीमार होने के कगार पर है और इसको बचाने के लिए सरकार को रियायतें देनी चाहिए। हो सकता है कि ऐसी बहुत सी बातें बाजार में बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा के बीच अतिशयोक्ति के रूप में सामने आ रही हों, लेकिन सरकार को 5-जी की शुरुआत से पहले तमाम शंकाओं का निवारण तो करना ही होगा। डाटा सेवाओं की शुरुआत के पिछले अनुभव बहुत अच्छे नहीं रहे हैं, खासकर 3-जी सेवा के। सरकार ने इसे राजस्व उगाहने के एक बड़े प्रयास के रूप में शुरू किया था और स्पद्र्धा के कारण कंपनियों ने स्पेक्ट्रम नीलामी में बढ़-चढ़कर बोली भी लगाई थी। इसके कारण 3-जी सेवाएं इतनी महंगी हो गई थीं कि वे आम उपभोक्ता से बहुत दूर चली गईं। 3-जी और 4-जी सेवाओं, दोनों के मामले में यह कहा गया था कि इससे किसानों, मंडियों, व्यापारियों को आपस में जोड़ने का रास्ता तैयार होगा, लेकिन यह सब अभी तक नहीं हुआ। क्या 5-जी में यह हो पाएगा? (साभार : हिंदुस्तान संपादकीय )
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