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3 तरीकों से सुरक्षित बनाएं अपना ऑनलाइन ट्रांजेक्शन

रोहित कुमार नोटबंदी के बाद भले ही कैशलेस को बढ़ावा मिल रहा हो मगर ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो ऑनलाइन ट्रांजेक्शन यानी ऑनलाइन लेनदेन से घबारते हैं। अक्सर ऐसे यूजर को चिंता सताती है कि कहीं कोई उनके एटीएम कार्ड की…

3 तरीकों से सुरक्षित बनाएं अपना ऑनलाइन ट्रांजेक्शन
रोहित कुमार नोटबंदी के बाद भले ही कैशलेस को बढ़ावा मिल रहा हो मगर ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जो ऑनलाइन ट्रांजेक्शन यानी ऑनलाइन लेनदेन से घबारते हैं। अक्सर ऐसे यूजर को चिंता सताती है कि कहीं कोई उनके एटीएम कार्ड की जानकारी सेव करके बैंक खाते में सेंध न लगा दे। ध्यान रहे कि साइबर संसार में कुछ एप और सॉफ्टवेयर ऐसे हैं जो कंप्यूटर पर टाइप होने वाले सभी बटन की जानकारी का डाटा तैयार करते हैं। इससे वह आपके कार्ड की जानकारी सेव कर सकते हैं। इस समस्या से बचने के लिए यूजर ऑन स्क्रीन कीबोर्ड और इकॉग्निटो टैब का प्रयोग कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि कैसे अपने ऑनलाइन लेनदेन को सुरक्षित बनाया जा सकता है ऐसे करें प्रयोग करें ऑन स्क्रीन कीबोर्ड अपने कंप्यूटर को छोड़ किसी अन्य व्यक्ति का कंप्यूटर या लैपटॉप इस्तेमाल कर रहे हैं तो बैंक अकाउंट में लॉग-इन करके बिलों का ऑनलाइन भुगतान करते वक्त ऑनस्क्रीन कीबोर्ड यानी कि वर्चुअल कीबोर्ड का प्रयोग करना चाहिए। इस कीबोर्ड को कंप्यूटर पर खोलने के लिए उसके ‘स्टार्ट मेन्यू’ में जाएं और वहां दिए ‘प्रोग्राम’ पर क्लिक करें। इससे आपको ‘वर्चुअल कीबोर्ड’ का विकल्प मिलेगा। कीबोर्ड खोजने में दिक्कत आए तो सर्च बार में on screen keyboard टाइप करके भी देख सकते हैं। वर्चुअल कीबोर्ड पर माउस से क्लिक करके अक्षर और अंकों को टाइप किया जा सकता है। इसमें भी सेटिंग का विकल्प है जिसको यूजर अपने मनमुताबिक बदल सकते हैं। मुफ्त वाई-फाई के लालच से बचें मुफ्त में मिलने वाले इंटरनेट की लालच में यूजर अक्सर सार्वजनिक स्थलों, होटल-रेस्तरां, रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट आदि पर मिलने वाली वाई-फाई सुविधा का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि कई मामलों में ऐसे वाई-फाई कनेक्शन असुरक्षित भी होते हैं। मिसाल के तौर पर रेलवे स्टेशन पर जो मुफ्त वाई-फाई है वह जरूरी नहीं है रेलवे मंत्रालय की ओर दिया जा रहा हो। कई बार हैकर उस यूजरनेम से जुड़ा हुआ एक नाम तैयार कर लेते हैं और उससे मुफ्त वाई-फाई देकर फोन से जरूरी जानकारी चुरा लेते हैं या लेनदेन के दौरान वह आपके बैंक खाते पर सेंध भी लगा सकते हैं। इनसे बचने के लिए मोबाइल फोन में एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर और ऑपरेटिंग सिस्टम को समय-समय पर अपडेट करते रहें। इनकॉग्निटो टैब भी है बेहतर विकल्प ऑनलाइन बैंकिंग या ट्रांजेक्शन के लिए आप गूगल क्रोम ब्राउजर में इनकॉग्निटो और इंटरनेट एक्सप्लोरर में प्राइवेट ब्राउजिंग मोड का सहारा ले सकते हैं। क्रोम यूजर इनकॉग्निटो टैब को खोलने के लिए स्क्रीन पर ऊपर के हिस्से में दाईं ओर दिए तीन लाइनों वाले विकल्प पर क्लिक करें और इनकॉग्निटो टैब पर जाएं। इस टैब पर की गई ब्राउजिंग हिस्ट्री, ब्राउजर बंद करते ही डिलीट हो जाती है। सिस्टम दोबारा खोलने पर यह दिखाई नहीं देती। यानी हिस्ट्री के आधार पर कोई आपके अकाउंट में सेंध लगाने की कोशिश नहीं कर सकता। इनकॉग्निटो टैब की पहचान एक टॉपी और चश्मा लगाए एक व्यक्ति होता है जो ऊपर बाईं ओर दिखाई देता है।

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