अंतरिक्ष स्टेशन में छह इंसान हमेशा रहते हैं. लेकिन एक खास वजह से स्पेस स्टेशन को कुछ दिनों तक खाली छोड़ने की बात हो रही है. लेकिन नासा इस बात से चिंतित है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्र…
23 MAY 20122 min readBy the Author
अंतरिक्ष स्टेशन
में छह इंसान हमेशा रहते हैं. लेकिन एक खास वजह से स्पेस स्टेशन को कुछ दिनों तक
खाली छोड़ने की बात हो रही है. लेकिन नासा इस बात से चिंतित है. अमेरिकी अंतरिक्ष
एजेंसी नासा ने चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन ( आइएसएस ) को
खाली छोड़ा गया तो उसके खोने का खतरा बढ़ जायेगा.
नासा के एक वरिष्ठ
अधिकारी के मुताबिक अगर रूसी यान अपने मिशन पर दोबारा नहीं जाता है और नवंबर तक
वापस नहीं लौटता है तो स्पेस स्टेशन के मानवरहित होने का खतरा बना रहेगा. अंतरिक्ष
यात्री रहने से आइएसएस को खोने का जोखिम कम होता है. बीते सोमवार को रूस ने
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए जाने वाले अपने मानव अंतरिक्ष मिशन को एक
महीने के लिए टाल दिया. क्योंकि रूस का एक अंतरिक्ष कागरे रॉकेट दुर्घटना का शिकार
हो गया, जिसके बाद यह फ़ैसला लिया गया है. 24 अगस्त को अंतरिक्ष कक्षा में जाने के बजाय यह रॉकेट
साइबेरिया में गिर गया.
रूस के मानव
संचालित स्पेस फ्लाइट प्रोगाम के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि अंतरराष्ट्रीय
अंतरिक्ष स्टेशन पर तैनात अंतरिक्ष यात्रियों को थकान और जरूरी सामान की सप्लाई की
कमी के कारण अंतरिक्ष कक्षा से मजबूरन वापस आना पड़ेगा. स्टेशन के चालक दल में
आमतौर पर 6 यात्री होते हैं. वह 6-6 महीने के रोटेशन पर काम करते हैं. फ़िलहाल 6 चालक दल के सदस्यों में तीन रूसी, दो अमेरिकी और एक
जापानी शामिल हैं.
अंतरिक्ष स्टेशन को
ऑर्बिटल स्टेशन ( कक्षीय स्टेशन ) के नाम से भी जाना जाता है. इंसानों के रहने
योग्य यह एक उपग्रह होता है, जिसे इस प्रकार डिजाइन किया जाता है कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने में
सक्षम हो. इसके अलावा इसमें इतनी क्षमता होती है कि इस पर अंतरिक्ष यान उतारा जा
सके.
इन्हें पृथ्वी की
लो-ऑर्बिट कक्षा में ही स्थापित किया जाता है. दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि
यह अंतरिक्ष में मानव निर्मित ऐसा स्टेशन है, जिससे पृथ्वी से कोई अंतरिक्ष यान जाकर मिल सकता है.
ये स्टेशन एक प्रकार के मंच की तरह होते हैं, जहां से पृथ्वी का सर्वेक्षण किया जा सकता है, आकाश के रहस्य
मालूम किये जा सकते हैं और भविष्य में इन्हीं मंचों से ग्रहों की मानवयुक्त
यात्राएं की जा सकती हैं. रूस, अमेरिका, यूरोप, जापान और कनाडा की स्पेस एजेंसी इस पर मिलकर काम करती हैं.
वर्ष 1998 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का निर्माण शुरू हुआ था. पहले इसे सिर्फ़ 15 साल के लिए
अंतरिक्ष में रखने की बात थी, लेकिन एक करार के बाद इसकी अवधि बढ़ाकर 2020 कर दी गयी. 2003 में कोलंबिया शटल यान के हादसे का शिकार होने के नासा
ने आइएसएस को खाली छोड़ा था, लेकिन बाद में स्टेशन पर हर वक्त अंतरिक्ष यात्री रखने का फ़ैसला किया गया.