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सौर लपट से झुलसेगी नहीं पृथ्वी

मैक्सिको और दक्षिण अमेरिका की प्राचीन माया सभ्यता द्वारा अपनाया गया कैलेंडर 5126 वर्ष लम्बा युग पूरा करने के बाद 21 दिसम्बर, 2012 को समाप्त हो रहा है। कुछ खुराफाती किस्म के लोग इस तारीख को पृथ्वी के लिए अशुभ संकेत मान रह…

सौर लपट से झुलसेगी नहीं पृथ्वी

मैक्सिको और दक्षिण अमेरिका की प्राचीन माया सभ्यता द्वारा अपनाया गया कैलेंडर 5126 वर्ष लम्बा युग पूरा करने के बाद 21 दिसम्बर, 2012 को समाप्त हो रहा है। कुछ खुराफाती किस्म के लोग इस तारीख को पृथ्वी के लिए अशुभ संकेत मान रहे हैं और उन्होंने पृथ्वी पर महाविनाश की तरह-तरह की भविष्यवाणियां भी की हैं। उन्होंने यह सोचना भी शुरू कर दिया है कि कौन सी खगोलीय चीज पृथ्वी पर कहर ढा सकती है। सर्वाधिक चर्चा सूरज की गतिविधियों को लेकर है। कहा जा रहा है कि सूरज की एक विशाल ज्वाला अगले वर्ष पृथ्वी को तबाह कर देगी। सूरज पर प्रचंड चुंबकीय ऊर्जा के आकस्मिक विस्फोट को सौर ज्वाला कहा जाता है।

नासा के अधिकारियों ने प्रलय की भविष्यवाणियों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि सूरज इतनी शक्तिशाली लपट छोड़ने में समर्थ नहीं है कि पूरी पृथ्वी ही उसमें भस्म हो जाए। यह सही है कि सूरज अपने 11-वर्षीय चक्र के उत्कर्ष पर पहुंच रहा है, लेकिन यह उत्कर्ष अगले साल नहीं, 2013 या 2014 में आएगा। सूरज की अधिकतम गतिविधियों के अनगिनत दौर आ चुके हैं, लेकिन हम सब और हमारी पृथ्वी सही सलामत है। असली मुद्दा यह है कि क्या सूरज की विनाशकारी ऊष्मा धरती तक पहुंच सकती है?

सूरज पर होने वाली उथल-पुथल से पृथ्वी पर असर जरूर पड़ता है। मसलन सौर लपटें पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल को अस्थायी तौर पर प्रभावित कर सकती हैं। इससे उपग्रह संचार प्रणाली गड़बड़ा सकती है। सौर ऊर्जा कणों का तूफान इससे भी ज्यादा मुसीबत खड़ी कर सकता है। पृथ्वी पर प्रहार करने वाले सौर ऊर्जा कण विद्युत ग्रिड, जीपीएस सिग्नल और रेडियो संचार को छिन्न-भिन्न कर सकते हैं। ऊर्जा कणों का बहुत ही शक्तिशाली तूफान टेक्नोलॉजी पर निर्भर हमारे समाज को काफी नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन इससे हमारी पृथ्वी या मानव जाति का सफाया नहीं हो सकता।

कुछ लोग प्रलयदूत के रूप में प्लेनेट-एक्स या नाइबीरू का भी नाम ले रहे हैं। उनका कहना है कि पृथ्वी से चार गुना बड़ा यह आवारा खगोलीय पिंड अगले साल हमारी पृथ्वी से टकरा कर समस्त जीवन का सफाया कर देगा। आखिर यह नाइबीरू है कहां। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ग्रह सिर्फ कुछ लोगों की कल्पना में बसता है। इसका कोई अस्तित्व नहीं है। नासा के एक अधिकारी, डान योमंस का कहना है कि नाइबीरू का कोई प्रमाण नहीं है। न तो कोई प्लेनेट-एक्स है और न ही कोई वस्तु हमारी तरफ आ रही है। नाइबीरू का विचार सबसे पहले अमेरिका में रहने वाली एक महिला नेंसी लाइडर ने रखा था। वह दावा करती हैं कि जेटा नामक परग्रही जीवों ने बचपन में उससे संपर्क किया था और उन्होंने उसके दिमाग में एक संचार उपकरण फिट कर दिया था। उसका यह भी दावा है कि इस उपकरण के जरिये वह परग्रही जीवों के सम्पर्क में रहती है। लाइडर ने अपने विचारों को प्रचारित करने के लिए 1995 में जेटाटाक के नाम से एक वेबसाइट भी स्थापित की थी।

नाइबीरू के अलावा एलेनिन धूमकेतु का नाम लेकर भी डराने की कोशिश की गई। यह प्रचार किया गया कि यह धूमकेतु बड़ेे भूकम्पों और सुनामियों का कारण बनेगा। वैज्ञानिकों ने कभी इसे पृथ्वी के लिए खतरा नहीं माना और अभी हाल ही में सूरज के बगल से गुजरने के बाद यह मलबे में तब्दील हो गया था। पिछले अक्टूबर में धूमकेतु के अवशेष पृथ्वी के नजदीक से भी गुजरे थे। रूसी खगोल शास्त्री लियोनिद एलेनिन ने पिछले साल दिसम्बर में ही इस धूमकेतु की खोज की थी। तभी से इस धूमकेतु को लेकर भ्रामक और विवादास्पद बातें कही जा रही थीं। कुछ लोग इसे सम्भावित प्रलयदूत के रूप में पेश करने लगे थे।

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