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सुखी संख्याएं और सुख देने वाली संख्याएं

चंद्रभूषण नंबर थिअरी को गणित की रानी कहा जाता है। रीक्रिएशनल मैथमेटिक्स (मनोरंजन से जुड़ा गणित) भी इसी दायरे में आता है, हालांकि नंबर थिअरी खुद में बड़ा विशद शास्त्र है। इसकी दो दिलचस्प धारणाएं कम से कम नाम के मामले में…

सुखी संख्याएं और सुख देने वाली संख्याएं
चंद्रभूषण नंबर थिअरी को गणित की रानी कहा जाता है। रीक्रिएशनल मैथमेटिक्स (मनोरंजन से जुड़ा गणित) भी इसी दायरे में आता है, हालांकि नंबर थिअरी खुद में बड़ा विशद शास्त्र है। इसकी दो दिलचस्प धारणाएं कम से कम नाम के मामले में एक-दूसरे से इतनी मिलती-जुलती हैं कि इन पर एक साथ चर्चा करने का दिल करता है। इनकी उत्पत्ति बिल्कुल अलग-अलग जगहों से है, और आपस में इनका कुछ भी लेना-देना नहीं है। संस्कृत शब्द ‘हर्षद’ का अर्थ खुश कर देने वाला/वाली है और कुछ खास प्राकृतिक संख्याओं को यह नाम देने का श्रेय महाराष्ट्र के डहानू जिले के स्कूलटीचर व शौकिया गणितज्ञ डीआर कापरेकर (1905-1986) को जाता है। ऐसी सभी संख्याएं, जिनमें अपने अंकों के योगफल का भाग चला जाता है, हर्षद संख्याएं कहलाती हैं। जैसे 12 एक हर्षद संख्या है, क्योंकि इसमें 1+2=3 का भाग चला जाता है। कोई कह सकता है कि यह तो एक बहुत सामान्य धारणा है, इसको इतना ज्यादा वजन देने की क्या जरूरत है। लेकिन कापरेकर जी का रीक्रिएशनल मैथमेटिक्स में योगदान इतना बड़ा और मौलिक है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी संख्याओं को उनके द्वारा दिए गए नाम ‘हर्षद नंबर्स’ से ही जाना जाता है। दूसरे, हर्षद नंबर से जुड़ी नई-नई धारणाएं भी लगातार आती जा रही हैं। जैसे, 2005 में गणितज्ञ ई. ब्लोएम द्वारा पेश की गई ‘मल्टिपल हर्षद नंबर’ (एमएचएन) की धारणा। उदाहरण में जाएं तो 6804 अपने अंकों के योग 18 से कट जाती है और भागफल 378 आता है। यह संख्या फिर अपने अंकों के जोड़ 18 से कट जाती है और भागफल 21 आता है। फिर 21 भी अपने अंकों के योग 3 से कट जाती है, जिससे आने वाला भागफल 7 खुद 7 से कट जाता है। इस प्रकार 6804 को ‘चौगुनी हर्षद संख्या’ कहा जा सकता है, और एक गणितीय श्रेणी के रूप में इसे एमएचएन-4 कहा जाएगा। यह तो हो गई सुख देने वाली संख्या। लेकिन हैपी नंबर्स यानी सुखी संख्याओं की अलग ही दुनिया है और इनका हर्षद नंबर्स से कुछ भी लेना-देना नहीं है। इनका खोजी कौन है, यह भी किसी को पक्का नहीं पता, लेकिन सबसे पहले इनपर चर्चा रूस में होनी शुरू हुई थी। हैपी नंबर्स वे हैं, जिनके अंकों के वर्ग का योगफल करते जाने पर अंतिम नतीजा 1 निकलता है। जैसे 19 को लें तो पहली बार 1 का वर्ग 1 और 9 का वर्ग 81 जोड़ने पर 1+81=82 आता है। दूसरी बार 8 का वर्ग 64 और 2 का वर्ग 4 जोड़ने पर 68, तीसरी बार 6 का वर्ग 36 और 8 का वर्ग 64 जोड़ने पर 100 आता है और चौथी बार 1, 0 और 0 का वर्ग जोड़ने पर 1 आ जाता है। यानी 19 एक हैपी नंबर है। 50 से नीचे की हैपी नंबर्स का जिक्र करना हो तो ये 1, 7, 10, 13, 19, 23, 28, 31, 32, 44 और 49 हैं। इनके बड़े दिलचस्प पैटर्न बनते हैं और इस दायरे में नई-नई खोजें होती रहती हैं।

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