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विज्ञान लेखन पर

विज्ञान' शब्द पर प्रारंभ से ही एक विशिष्ट वर्ग का एकाधिकार ही देखा गया है. यही कारण है कि आम जनमानस सामान्यतः इसे एक आकाशकुसुम की तरह ही, सम्मान से मगर एक दूरी से ही देखता है. इस प्रवृत्ति ने एक विषय के रूप में विज्ञान क…

विज्ञान लेखन पर

विज्ञान' शब्द पर प्रारंभ से ही एक विशिष्ट वर्ग का एकाधिकार ही देखा गया है. यही कारण है कि आम जनमानस सामान्यतः इसे एक आकाशकुसुम की तरह ही, सम्मान से मगर एक दूरी से ही देखता है. इस प्रवृत्ति ने एक विषय के रूप में विज्ञान को गरिमा तो दी है, मगर आम जनों से दूरी इसके दीर्घकालीन भविष्य के दृष्टिकोण से उचित नहीं कही जा सकती.विज्ञान और विज्ञान लेखन की दशा में दिनों-दिन उन्नयन ने आज इसे एक महत्त्वपूर्ण मुकाम पर ला पहुँचाया है, किन्तु इसकी जनस्वीकृति सुनिश्चित करने हेतु विज्ञान लेखकों को ही आगे आ इसकी दिशा सुनिश्चित करने की जरुरत है.इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण तत्त्व है इसकी भाषा. भाषा में महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि क्लिष्ट विषयों की व्याख्या में प्रयुक्त भाषा और आम बोलचाल की भाषा में काफी फर्क होता है. संस्कृत, अंग्रेजी जैसी विशिष्ट भाषाओँ में ही विज्ञान साहित्य की उपलब्धता इसकी लोकस्वीकृति में बाधक है. जनता को उसीकी भाषा में विज्ञान को पहुँचने के लिए कुलीन संकोच को तोड़ना होगा; तभी विज्ञान में स्वतंत्र चिंतन और लोक भागीदारी का संयोजन सुनिश्चित हो सकेगा.आम तौर पर विज्ञान लेखन मूलतः ऐसे विषयों के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता है, जो आम जनता को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित नहीं करते. विज्ञान को आम जनता के सरोकारों से जोड़ने की जरुरत है, और विज्ञान लेखक इस दायित्व को ज्यादा बेहतर ढंग से निभा सकते हैं.नई पीढी और बच्चों में विज्ञान के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए इसे जटिल व्याख्याओं के बंधन से मुक्त करना होगा. इसी पीढी के हाथों में ही न सिर्फ विज्ञान लेखन बल्कि विज्ञान जगत का भी भविष्य है. इसलिए इन्हें स्वयं से जोड़ने के लिए इसमें लचीलापन लाना होगा.अकादमिक संस्थाओं के माध्यम से भी विज्ञान लेखन को दृढ़ता देने के प्रयास सुनिश्चित करने होंगे. किसी शोधार्थी का मूल्यांकन सिर्फ उसके शोध प्रबंध से प्रकाशित शोधपत्रों से ही नहीं, बल्कि विज्ञान को आम जनता के बीच पंहुचाने में सफलता के पैमाने पर रखकर भी होना चाहिए. इस दिशा में शोध निर्देशकों को भी सकारात्मक भूमिका निभाने को प्रेरित किया जाना चाहिए. अकादमिक जगत की सक्रियता विज्ञान लेखन की स्थिरता सुनिश्चित करने में अत्यंत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.निष्कर्षतः, विज्ञान लेखन की दिशा विज्ञान को प्रयोगशालाओं तथा अकादमिक जकड़न से मुक्ति दिलाने और आम जन तक सुलभ बनाने की ओर ही होनी चाहिए.
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