Skip to content
Special Articles

मारक-क्षमता को धार देगी नयी मिसाइल

डॉ. एल.एस. यादव भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अग्नि-5 मिसाइल की सफलता के बाद अब परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटर कॉन्टीनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) अग्नि-6 विकसित कर रहा है। लंबी दूरी तक मार क…

मारक-क्षमता को धार देगी नयी मिसाइल
डॉ. एल.एस. यादव भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) अग्नि-5 मिसाइल की सफलता के बाद अब परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम इंटर कॉन्टीनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) अग्नि-6 विकसित कर रहा है। लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम यह शक्तिशाली मिसाइल स्वदेश में विकसित की गई है। अंतर्महाद्वीपीय बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि-6 की मारक क्षमता 6000 से 10000 किलोमीटर की दूरी तक की होगी। डीआरडीओ प्रमुख वीके सारस्वत ने गत् 8 फरवरी को जानकारी दी कि इसका डिजाइन तैयार कर लिया गया है। अब हार्डवेयर पर काम जारी है और हम इसे साकार करने के चरण में हैं। यह मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल (एमआईआरवी) मिसाइल है। अर्थात यह एक साथ अनेक परमाणु हथियार ले जा सकेगी। इस कारण अग्नि-6 मिसाइल एक साथ एक ही समय में स्वतंत्र रूप से कई लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम होगी। इससे हमारी रक्षा ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।
अग्नि-6 मिसाइल के विकसित हो जाने पर भारत अमेरिका व रूस सहित इस तरह की क्षमता वाले विशिष्ट क्लब में शामिल हो जाएगा। अभी तक इस श्रेणी की मिसाइलें रूस व अमेरिका के पास हैं। डीआरडीओ प्रमुख ने यह भी बताया कि उनका संगठन क्रूज मिसाइल रक्षा कार्यक्रम विकसित करनेे के लिए भी कार्य कर रहा है। इसका फायदा यह होगा कि सशस्त्र बल कम ऊंचाई पर उडऩे वाली दुश्मन की क्रूज मिसाइलों व विमानों को मार गिराएंगे। भारतीय वैज्ञानिकों का पूरा ध्यान अग्नि श्रेणी की मिसाइलों को दुश्मन की बैलेस्टिक मिसाइल रोधी प्रणालियों को भेदने में सक्षम बनाने पर लगा हुआ है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन इन मिसाइलों को अधिक संहारक एवं घातक बनाने के लिए ऐसे पेलोड पर काम रहा है जो एक साथ कई नाभिकीय हथियार ले जा सके। इस सफलता के बाद भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन अपनी स्वदेशी तकनीक की एक नई ऊंचाई को हासिल कर लेगा।
5000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक मार करने अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण पिछले वर्ष 19 अप्रैल को किया गया था। यह एक टन वजन तक के परमाणु बम गिरा सकती है। अग्नि-5 मिसाइल 17.5 मीटर लम्बी है। इसमें सात किलोमीटर लम्बी वायरिंग है। यह मिसाइल तीन स्थितियों में मार करेगी। सबसे पहले इसे रॉकेट इंजन ऊपर ले जाता है। दूसरी स्थिति में यह 150 किलोमीटर तक जाएगी। तीसरी स्टेज में यह 300 किलोमीटर तक जाती है। इसके बाद यह 800 किलोमीटर की ऊंचाई तक जाकर लक्ष्य की ओर जाती है। यह मिसाइल यदि एक बार छूट गई तो रोकी नहीं जा सकती। यह 1000 किलोग्राम से अधिक का परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है। अग्नि-5 मिसाइल की आक्रामक क्षमता अत्यंत घातक है। यह मात्र 20 मिनट में 5000 किलोमीटर की दूरी तय कर लेगी और डेढ़ मीटर के लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। यह भारत के मिसाइल तरकश में सबसे लम्बी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल है और देश की सामरिक रणनीति में एक विशेष प्रकार का बदलाव लाएगी क्योंकि समस्त एशिया, अफ्रीका महाद्वीप व यूरोप के अधिकांश हिस्से इसकी मारक जद में होंगे।
तीन चरणों वाली यह मिसाइल देश की पहली कैमिस्टर्ड मिसाइल है। यह तीन से दस परमाणु अस्त्र ले जाने में सक्षम है और इसमें प्रत्येक अस्त्र से सैकड़ों किलोमीटर दूर अलग-अलग निशाने लगाए जा सकने की खूबी है। इस मिसाइल का वारहेड मल्टीपल है और इसमें एंटी बैलेस्टिक मिसाइल की भी क्षमता होगी। दूसरे देशों के हमले से बचाव के लिए यह मिसाइल कवच प्रणाली से लैस होगी। इसे मोबाइल लांचर, रेल मोबाइल लांचर व कनस्तर युक्त मिसाइल पैकेज से भी दागा जा सकता है। इस खूबी के कारण इसे दुश्मन के उपग्रहों की नज़रों से भी बचाया जा सकेगा। अग्नि-5 को लंाच करने के लिए स्टील का एक खास कनस्तर बनाया गया है जो 400 टन तक वजन सह सकता हैै। 50 टन भार वाली मिसाइल जब दागी जाएगी तो यह भारी दबाव को झेल सकेगी। इसके तीन खण्डों में प्रयुक्त किए जाने वाले राकेट मोटर, सॉफ्टवेयर तथा अन्य आवश्यक पुर्जे उच्च कोटि के हैं। इसकी एक यूनिट का खर्च तकरीबन 35 का खर्च आएगा। इस मिसाइल को सन् 2014 तक सेना को सौंपा जाना है।
यह पहली ऐसी सचल मिसाइल होगी जिसकी मारक जद में चीन के सभी इलाके, पूरा एशिया, अधिकांश अफ्रीका व आधा यूरोप आएंगे। भारत के पूर्वोत्तर सीमान्त से अगर इसे छोड़ा जाए तो यह चीन की उत्तरी सीमा पर स्थित हरबिन को अपनी चपेट में ले लेगी। अंडमान से छोडऩे पर यह आस्टे्रलिया तक पहुंच सकती है। यदि इसे अमृतसर से छोड़ा जाए तो स्वीडन की राजधानी को भी निशाना बनाया जा सकेगा। यह मिसाइल चीन की डोंगफोंग-31ए व अमेरिका की परशिंग मिसाइल की बराबरी वाली है। देश के विभिन्न भागों में तैनात किए जाने के बाद कमोवेश सारा संसार इसकी मारक दूरी में आ जाएगा। या यूं कहिए कि उत्तरी व दक्षिणी अमेरिका को छोड़कर दुनिया का प्रत्येक क्षेत्र इसके निशाने में होगा। अग्नि-5 मिसाइल की मारक जद में भले ही पूरा चीन आता हो लेकिन उसके विमानवाही पोत जो कि चीन से दूर प्रशान्त महासागर व अटलांटिक महासागर में तैनात हैं, वहां से भी वे भारत पर मिसाइल दाग सकते हैं। यही नहीं चीन ने अमेरिका के परमाणु ईंधन चालित विमानवाही पोतों को नष्ट करने के लिए डीएफ-21 डी नामक मिसाइल तैयार की है जो ताइवान की मदद को आने वाले अमेरिकी युद्धपोतों को नष्ट करने में सक्षम है। ये मिसाइलें भी भारत के लिए खतरा बन सकती हैं। ऐसे में भारत के लिए लम्बी दूरी तक मार करने वाली अग्नि-6 जैसी मिसाइलों का विकास अत्यन्त आवश्यक हो गया था।
भारत समन्दर से परमाणु हमला करने में सक्षम पांच देशों के विशिष्ट क्लब में शामिल हो चुका है। पनडुब्बी तक परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम मध्यम दूरी की के-5 बैलेस्टिक मिसाइल का भारत ने गत् 27 जनवरी को सफल परीक्षण किया था। भारत द्वारा खुद तैयार की गई यह मिसाइल पनडुब्बी से भी दागी जा सकती है। इस मिसाइल के विकास की जिम्मेदारी हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की प्रयोगशाला को सौंपी गई थी। भारत से पहले अमेरिका, फ्रांस, रूस व चीन ही इस तरह की मिसाइल दागने में सक्षम थे। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के प्रमुख वीके सारस्वत के मुताबिक के-15 मिसाइल ने परीक्षण के सभी मानकों का पूरा किया है। मध्यम दूरी की यह मिसाइल 1500 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है। परीक्षण के बाद इस मिसाइल को स्वदेशी पनडुब्बी आईएनएस अरिहन्त में लगाया जाएगा। यह मिसाइल डीआरडीओ के उस अभियान का एक हिस्सा है जिसके तहत भारत के सुरक्षा बलों के लिए पानी के अन्दर से मार करने वाली मिसाइलों का विकास किया जा रहा है। अग्नि श्रेणी व पनडुब्बी आधारित मिसाइल तकनीक में दक्षता हासिल करना एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इससे सशस्त्र सेनाओं की मारक क्षमता में एक नई धार आएगी।
Continue reading

Special Articles

All in topic
एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस
Special Articles

एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस

डॉ. शशांक द्विवेदी परियोजना प्रबंधक , टीएसएससी (कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय , भारत सरकार) भारत आज ऊर्जा परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं ने करोड़ों घरों तक…

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ
Special Articles

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ

आज हम ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) हमारे जीवन, कामकाज और सोचने के तरीके को बदल रही है। एआई आज हर क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, उद्योग, मीडिया—में अपनी…

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई
Special Articles

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई

चंद्रभूषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की चर्चा अभी दुनिया में सबसे ज्यादा बिजली खाने वाली तकनीकों की तरह हो रही है। सन 2022 में लगाए गए हिसाब के मुताबिक ये दोनों उस समय दुनिया की दो फीसदी बिजली हजम कर रही…