मंगलपरटहलरहीनासा की खोजी गाड़ी क्यूरियॉसिटी नेवहां के माहौल की जो शुरुआती ब्लैक एंड ह्वाइट तस्वीरेंधरती पर भेजी हैं , वे यहां एक खास तबके को बावला बनादेने के लिए काफी साबित हुई हैं। इनमें कुछ को इन तस्वीरों मेंएलिएन ( परग्रही जीव ) दिखाई पड़ गए तो कुछ ने इनमेंचार उड़नतश्तरियां खोज डालीं , जो ' मंगल पर इंसान कीबच्चों जैसी हरकतों पर नजर रखे हुए हैं। ' इंटरनेट फिलहालइन तस्वीरों पर की गई ऐसी काल्पनिक टिप्पणियों और इनकेसाथ छेड़छाड़ करके बनाए गए ऐसे फर्जी चित्रों से भर गया है, जिनका मकसद मंगल ग्रह को विचित्र जीवों और चीजों सेभरी हुई जगह साबित करना है। क्या 35 करोड़ किलोमीटरदूर एक छोटे ट्रक जितनी बड़ी गाड़ी को सुरक्षित तरीके सेजमीन पर उतार लेना और उसके जरिये एक अनछुए ग्रह के बारे में वैज्ञानिक जानकारियां जुटाना कोई कमअनोखी बात है , जो सोते - जागते उड़नतश्तरियों के ही साथ जीने वाले लोग इसे अपनी तिकड़मों के बल परऔर भी अनोखा बनाने में जुटे हैं ?
यूएफओलॉजी अमेरिका और यूरोपीय देशों में सक्रिय कुछ ऐसे लोगों का पंथ है , जिन्हें हर जगह उड़नतश्तरियांही दिखाई देती हैं। इन लोगों ने क्यूरियॉसिटी की भेजी एक तस्वीर को कई बार फिल्टर से गुजारकर उसे ऐसाबना दिया कि उसमें जहां - तहां नजर आने वाले सूक्ष्म धब्बे सचमुच उड़नतश्तरियों जैसे ही दिखाई देने लगे।चार - पांच साल पहले उन्होंने मंगल की परिक्रमा कर रहे एक यान की भेजी तस्वीरों में इंसानी आकार - प्रकारवाला एक हरे रंग का एलियन बाकायदा दौड़ता हुआ ढूंढ निकाला था। तीन दशक पहले , जब चंद्रमा पर इंसानको उतारने के लिए अपोलो अभियान की रूपरेखा तैयार हो रही थी , तब चंद्रमा का चक्कर लगा रहे एक कृत्रिमउपग्रह द्वारा भेजी गई तस्वीरों में कुछ लालबुझक्कड़ों ने एक बहुत बड़ा इंसानी चेहरा खोज निकाला था।
यह कुछ - कुछ वैसा ही है , जैसे बच्चे बादलों में हाथी , भेड़ या आदमी की शक्ल बन जाने की आश्चर्यजनकसूचना अपने घर वालों को देते हैं , लेकिन उनकी बात सही साबित हो , इसके पहले ही बादलों की शक्ल कुछऔर हो चुकी होती है। ऐसी भोली हरकतें चंद्रमा या मंगल के खोजी अभियान से जुड़कर भी बुरी नहीं लगतीं।लेकिन आधुनिकतम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके वहां से आई तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ करना और झूठीअफवाहें फैलाना तो उस वैज्ञानिक चेतना को ही नष्ट करने जैसा है , जिसे आगे बढ़ाने के लिए इस मंदी के माहौलमें पूरे ढाई अरब डॉलर खर्च करके क्यूरियॉसिटी को मंगल पर उतारा गया है।(ref-nbt.in)