Skip to content
Special Articles

भविष्य का अस्त्र

अस्त्र मिसाइल के विकास पर विशेष डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव भारत ने 21दिसंबर को स्वदेसी तकनीक पर आधारित दृष्टि सीमा से अधिक की हवा से हवा में मार करने में सक्षम अस्त्र मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल का यह विकासात्मक परी…

भविष्य का अस्त्र
अस्त्र मिसाइल के विकास पर विशेष
डॉ. लक्ष्मी शंकर यादव
भारत ने 21दिसंबर को स्वदेसी तकनीक पर आधारित दृष्टि सीमा से अधिक की हवा से हवा में मार करने में सक्षम अस्त्र मिसाइल का सफल परीक्षण किया। इस मिसाइल का यह विकासात्मक परीक्षण था जिसे ओडिशा के बालासोर से लगभग 15 किलोमीटर दूर चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज से किया गया। अस्त्र मिसाइल हवा में उड़ने वाले अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम है। परीक्षण के दौरान एक मानवरहित विमान की सहायता से इस मिसाइल ने उड़ते हुए लक्ष्य पर सटीक निशाना लगाने में सफलता प्राप्त की। इस मिसाइल को सुखोई-30 एमकेआइ, मिग-29, मिराज-2000, जगुआर तथा तेजस जैसे अत्याधुनिक किस्म के लड़ाकू विमानों पर लगाए जाने की योजना है। 22 दिसंबर को इस मिसाइल का पुन: परीक्षण किया गया। रक्षा वैज्ञानिको के मुताबिक 21 दिसंबर को एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य के साथ अस्त्र मिसाइल का सफल परीक्षण किया गया था, जबकि इस दिन के परीक्षण में पायलट रहित विमान लक्ष्य को उपयोग में लाया गया। 24 दिसंबर को एक बार फिर चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज के प्रक्षेपण स्थल-1 से जमीनी लांचर के जरिए अत्याधुनिक अस्त्र मिसाइल को छोड़ा गया। इस बार का परीक्षण कृत्रिम लक्ष्य के साथ किया गया। एकीकृत परीक्षण रेंज के निदेशक एमवीकेवी प्रसाद ने बताया कि कृत्रिम लक्ष्य के साथ किया गया यह परीक्षण मिशन के सभी उद्देश्यों पर खरा उतरा। इस परीक्षण में पायलट रहित विमान के बिना कृत्रिम लक्ष्य का इस्तेमाल किया गया। इन परीक्षणों से पहले मई 2011 में इस मिसाइल के तीन परीक्षण 20, 21 एवं 22 तारीखों में हुए थे। तब इन परीक्षणों का मुख्य उद्देश्य मोटर प्रणोदन प्रणाली के प्रदर्शन और हवाई गति का मूल्यांकन करना था। सुखोई-30 एमकेआइ लड़ाकू विमान से अस्त्र मिसाइल के परीक्षण नवंबर 2010 में पुणे के नजदीक किए गए थे। तब कुल सात परीक्षण किए गए थे। अस्त्र मिसाइल का प्रथम परीक्षण 9 मई, 2003 को किया गया था। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के मुताबिक एकल चरण वाली ठोस ईंधन संचालित अस्त्र मिसाइल अपनी श्रेणी में समकालीन बीवीआर मिसाइलों की तुलना में अधिक आधुनिक है। यह मिसाइल अत्याधुनिक सुपरसोनिक हवाई लक्ष्यों को नष्ट करने में सक्षम है। यह दुश्मन के विमान का पता लगाने में माहिर है। आकार और वजन के मामले में यह डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई सबसे छोटी मिसाइल है। यह 3.8 मीटर लंबी है। इसका कुल प्रक्षेपण वजन 160 किलोग्राम एवं कुल व्यास 178 मिलीमीटर है। ठोस प्रणोदक से संचालित यह मिसाइल अपने साथ लगभग 15 किलोग्राम वजन के पारंपरिक आयुध ले जा सकती है। यह दुश्मन के किसी विमान को सामने से 80 किलोमीटर की दूरी से मार गिराने की क्षमता रखती है। पीछा करने की स्थिति में यह मिसाइल 20 किलोमीटर की दूरी से ही शत्रु के लड़ाकू विमान को ध्वस्त कर देती है। अस्त्र मिसाइल 1700 किलोमीटर प्रति घंटे की चाल से लक्ष्य पर हमला कर सकती है। यह हवा में सूक्ष्म लक्ष्य को भी निशाना बनाने और नष्ट करने में सक्षम है। यह मिसाइल ध्वनि से ज्यादा 1.2 मैक से लेकर 1.4 मैक की रफ्तार से उड़ने वाले आकाशीय लक्ष्यों को भेद सकती है। विदित हो कि एक मैक 1236 किलामीटर प्रति घंटा के समतुल्य है। इस मिसाइल को विभिन्न ऊंचाइयों से दागा जा सकता है। 15 किलोमीटर की ऊंचाई से दागे जाने पर यह 110 किलोमीटर और आठ किलोमीटर की ऊंचाई से छोड़े जाने पर 44 किलोमीटर की दूरी तक मार करती है। यह समुद्र तलीय ऊंचाई से दागे जाने पर 21 किलोमीटर की परिधि तय कर सकती है। इसके अलावा समुद्र तल पर 30 किलोमीटर की दूरी तक सटीक निशाने सहित मार करती है। इसीलिए अस्त्र को भविष्य की मिसाइल की संज्ञा दी गई है। यह अपनी श्रेणी की रूसी, अमेरिकी एवं फ्रांसीसी मिसाइलों से भी उन्नत है। (लेखक सैन्य विज्ञान विषय के प्राध्यापक हैं)
Continue reading

Special Articles

All in topic
एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस
Special Articles

एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस

डॉ. शशांक द्विवेदी परियोजना प्रबंधक , टीएसएससी (कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय , भारत सरकार) भारत आज ऊर्जा परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं ने करोड़ों घरों तक…

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ
Special Articles

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ

आज हम ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) हमारे जीवन, कामकाज और सोचने के तरीके को बदल रही है। एआई आज हर क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, उद्योग, मीडिया—में अपनी…

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई
Special Articles

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई

चंद्रभूषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की चर्चा अभी दुनिया में सबसे ज्यादा बिजली खाने वाली तकनीकों की तरह हो रही है। सन 2022 में लगाए गए हिसाब के मुताबिक ये दोनों उस समय दुनिया की दो फीसदी बिजली हजम कर रही…