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ब्लैक होल की छाया

ब्लैक होल की छाया : एक प्रश्नोत्तरी चंद्रभूषण हॉलिवुड की साई-फाई फिल्मों में ब्लैक होल किसी जादुई चीज की तरह आते हैं। ब्रह्मांड में इधर से उधर या समय में आगे-पीछे ले जाने वाली रहस्यमय चीजें। लेकिन अभी दुनिया में भारी उत्…

ब्लैक होल की छाया
ब्लैक होल की छाया : एक प्रश्नोत्तरी
चंद्रभूषण
हॉलिवुड की साई-फाई फिल्मों में ब्लैक होल किसी जादुई चीज की तरह आते हैं। ब्रह्मांड में इधर से उधर या समय में आगे-पीछे ले जाने वाली रहस्यमय चीजें। लेकिन अभी दुनिया में भारी उत्सुकता जगाने के बाद एक ब्लैक होल की जो तस्वीर जारी हुई है, उसमें यह खास शक्ल वाले किसी आकाशीय पिंड जैसा ही लग रहा है। क्या इसे ऐंटी-क्लाइमैक्स समझा जाए?

- ब्लैक होल भौतिकी का एक चरम बिंदु है। अभी पचास साल पहले तक शीर्ष वैज्ञानिकों को भी यह सिर्फ एक खयाली चीज लगती थी। खुद आइंस्टाइन को भी इसके होने का भरोसा नहीं था। फिर बहुत सारे प्रेक्षणों से ब्लैक होल जैसी ही चीजों की मौजूदगी का अंदाजा मिलने लगा। यानी तारों से बहुत ज्यादा भारी कोई चीज, जो किसी भी सूरत में, धुंधली से धुंधली शक्ल में भी नजर नहीं आती। अभी जो तस्वीर आप देख रहे हैं, वह ब्लैक होल की नहीं उसकी छाया की तस्वीर है।
स्थान और समय से जुड़े इसके रहस्य आज भी ज्यों के त्यों हैं और उनकी आजमाइश का कोई जरिया अभी किसी के पास नहीं है। लेकिन इतनी विचित्र चीज का कुछ भी आंखों के सामने मौजूद होना खुद में एक जिंदा चमत्कार है। ऐंटी-क्लाइमैक्स क्यों, एक लंबे क्लाइमैक्स की शुरुआत कहें इसे।

ब्लैक होल की छाया? जिस चीज की कोई शक्ल ही नहीं, उसकी छाया? यह क्या गड़बड़झाला है?

- हां, यह काफी टेढ़ी बात है फिर भी सच के करीब है। अलबत्ता इसे ब्लैक होल की तस्वीर बताना सिरे से झूठी बात होगी। यूं समझिए कि ब्लैक होल बिना लंबाई-चौड़ाई-गहराई वाला एक ऐसा छेद है, जिसमें सारी चीजें, यहां तक कि रोशनी भी गिरती जाती है। फिर भी भरना तो दूर, वजन बढ़ने के साथ इसकी भूख और-और बढ़ती चली जाती है। इतनी खतरनाक चीज के इर्द-गिर्द एक इलाका ऐसा भी होता है, जिसके बाहर कोई चीज सुरक्षित रह सकती है और उसके बारे में हम कुछ जान भी सकते हैं, लेकिन जिसका भीतरी दायरा लांघते ही वह ब्लैक होल में गुम हो जाती है और हम नहीं जान सकते कि इसके बाद उसका क्या हुआ।
इस दायरे को घटना क्षितिज या इवेंट होराइजन का नाम दिया गया है। तस्वीर में जो मोटा सुनहला कंगन हमें दिखाई पड़ रहा है, उससे ब्लैक होल के घटना क्षितिज के करीबी माहौल का अंदाजा मिल रहा है। खुद यह तस्वीर प्रकाश किरणों के ब्लैक होल के इर्द-गिर्द घूम जाने से बनी है, जो लेंस से किसी चीज की छाया बनने जैसा है।

इस तस्वीर और इसके ऑब्जेक्ट के बारे में कुछ और बताइए। क्या इसने ब्लैक होलों के बारे में हमारी कोई राय अंतिम तौर पर बदली है?

- हमारी आकाशगंगा के पड़ोस में इससे कई गुना ज्यादा बड़ी एक और आकाशगंगा है, जिसका नाम वर्गो-ए या मेसियर-87 है। इसके बीचोबीच, धरती से साढ़े पांच करोड़ प्रकाशवर्ष की दूरी पर हमारे सूरज का साढ़े छह अरब गुना वजनी एक ब्लैक होल मौजूद है। इसके दम का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि तस्वीर के कंगन में जो कलाई वाली खाली जगह है, उसकी चौड़ाई सूरज से धरती की दूरी की चालीस गुनी, लगभग दस अरब किलोमीटर है।
और बाहर जो कंगन वाला सोना दमक रहा है, उसका तापमान चार से छह अरब डिग्री के बीच है। इसे समझने के लिए सूरज भी नाकाफी है क्योंकि उसके सबसे गरम हिस्से कोरोना का तापमान भी 10 लाख डिग्री से ऊपर नहीं जाता। इतने प्रचंड आकार और दमक वाला कंगन सिर्फ दूरी और बीच की धुंध के चलते अबतक हमारी नजरों से ओझल था।
आकाश की सबसे धुंधली चीजों के प्रेक्षण का शास्त्र रेडियो एस्ट्रॉनमी लंबे समय से इसे देखने-परखने की कोशिश में जुटा था। इवेंट होराइजन टेलीस्कोप परियोजना में उसने कई ताकतवर रेडियो टेलीस्कोपों को इस तरह एक साथ आजमाया है कि पूरी धरती ही एक विराट टेलीस्कोप बन गई है! रही बात राय बदलने की तो ब्लैक होल में स्पेसशिप घुसा देना आगे अब आपको शायद ही किसी फिल्म में दिखे।
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