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धरती जितना बड़ा हीरा मिला

जेम्स विंसेट लंदन एस्ट्रोनॉमर्स ने एक ऐसे तारे की खोज की है जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह हमारी गैलक्सी के सबसे अजीब तारों में से एक हो सकता है। यह ग्रह अविश्वसनीय रूप से ठंडा, प्राचीन और बुझा हुआ है जो धरती के आका…

धरती जितना बड़ा हीरा मिला
जेम्स विंसेट लंदन
एस्ट्रोनॉमर्स ने एक ऐसे तारे की खोज की है जिसके बारे में माना जा रहा है कि वह हमारी गैलक्सी के सबसे अजीब तारों में से एक हो सकता है। यह ग्रह अविश्वसनीय रूप से ठंडा, प्राचीन और बुझा हुआ है जो धरती के आकार के एक हीरे में क्रिस्टलीकृत (सघन) हो गया है।

विस्कॉन्सिन-मिलवाउकी यूनिवर्सिटी के प्रफेसर डेविड कैपलान ने एक प्रेस रिलीज में कहा, 'यह निश्चित तौर पर एक अद्भुत वस्तु है।' ऐसी चीजें वहां होनी चाहिए लेकिन क्योंकि इनकी चमक बहुत फीकी है इसलिए इन्हें खोज पाना बहुत मुश्किल है।' वाइट ड्वार्फ वे तारे होते हैं जो अपने जीवन के अंतिम अवस्था में पहुंच चुके होते हैं। मतलब इस अवस्था में इनकी एनर्जी और गर्मी के लिए जिम्मदार फ्यूजन रिऐक्शन पूरी तरह से रुक जाता है, जिसके कारण इनमें बची हुई कार्बन और ऑक्सीजन एक अविश्वसनीय घनी और ठंडी अवस्था में संघटित हो जाते हैं। इसी आधार पर हाल ही में खोजे गए इस वाइट ड्वार्फ के बारे में एस्ट्रोनॉमर्स का मानना है कि यह तारा एक हीरे की तरह ही ठंडा और क्रिस्टलीकृत हो गया है। जिससे इस तारे की उम्र 11 अरब वर्ष होने की संभावना है। जो इसे मिल्की वे जितना पुराना बनाता है।

गौरतलब है कि इस तरह के तारे दुर्लभ नहीं है (करीब 97 प्रतिशत तारों के बारे में माना जाता है कि वे वाइट ड्वार्फ में तब्दील हो जाते हैं, इस तरह के कई ग्रहों की भी खोज हो चुकी है) लेकिन इनको खोज पाना बहुत ही मुश्किल होता है। इसकी वजह इनकी बहुत ही कम चमक होती है जिसके कारण ये धरती पर टेलिस्कोप की नजर में नहीं आ पाते।

इस वाइट ड्वार्फ के एक पार्टनर तारे की वजह से धरती पर एस्ट्रोनॉमर्स को इसके बारे में पता चला। इसका पार्टनर तारा पल्सर स्टार पीएसआर J2222-0137 एक बहुत ही घना न्यूट्रॉन तारा है, जो जो बहुत ही तेजी से घूमता है और आकाशगंगा में किसी लाइट हाउस की तरह रेडियो किरणें छोड़ता रहता है। लेकिन पीएसआर J2222-0137 के साथ एस्ट्रोनॉमर्स ने नोटिस किया कि इस तारे की रेडियो किरणों के सामने लगातार एक अनजानी वस्तु की रुकावट आ रही है। अमेरिका में नैशनल रेडियो एस्ट्रोनॉमी ऑब्जर्वेटरी टीम को इस बात का संदेह था कि यह रुकावट वाली वस्तु वाइट ड्वार्फ है, लेकिन यह टीम इस अध्ययन को आगे बढ़ाने के लिए अब भी इसे देख नहीं पाई है। इसकी वजह इसके सबसे ठंडा वाइट ड्वार्फ होने को बताया जा रहा है।

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलाइन के ग्रैजुएट स्टूडेंट बार्ट डनलप ने कहा, 'हमारी अंतिम इमेज में किसी भी न्यूट्रॉन तारे का चक्कर लगा रहे वाइट ड्वार्फ से 10 गुना ज्यादा ठंडे वाइट ड्वार्फ को दिखना चाहिए, हालांकि हमें कोई चीज दिखाई नहीं दी है।'
डनलप ने कहा, 'अगर वहां कोई वाइट ड्वार्फ है, जिसका वहां होना लगभग निश्चित है, तो वह निश्चित तौर पर बहुत ही ठंडा है।'

हालांकि भले ही एस्ट्रोनॉमिकल सेंस में इस वाइट ड्वार्फ को ठंडा कहा जाता हो और यह डायमंड वाइट ड्वार्फ सूर्य के केंद्र से 5 हजार गुना ज्यादा ठंडा हो लेकिन फिर भी इसका तापमान 2700 डिग्री है। (या 4,892 डिग्री फारनहाइट है।)
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