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देश की सामरिक क्षमता बढ़ाएगी ब्रह्मोस

युद्द में गेम चेंजर साबित हो सकती है ब्रह्मोस शशांक द्विवेदी डिप्टी डायरेक्टर , मेवाड़ यूनिवर्सिटी , राजस्थान एक बड़ी सामरिक कामयाबी हासिल करते हुए भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का सुखोई लड़ाकू विमान से सफल परी…

देश की सामरिक क्षमता बढ़ाएगी ब्रह्मोस
युद्द में गेम चेंजर साबित हो सकती है ब्रह्मोस शशांक द्विवेदी डिप्टी डायरेक्टर, मेवाड़ यूनिवर्सिटी,राजस्थान एक बड़ी सामरिक कामयाबी हासिल करते हुए भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का सुखोई लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण कर लिया । ब्रह्मोस को दुनिया की सबसे तेज़ सुपरसोनिक मिसाइल माना जा रहा है, जिसकी रफ़्तार 2.8 मैक यानि ध्वनि की रफ़्तार से लगभग तीन गुना ज्यादा है। दुश्मन की सीमा में घुसकर लक्ष्य भेदने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल इसी गति से हमला करने में सक्षम है। भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से तैयार हुई इस मिसाइल का जल और थल से पहले ही सफल परीक्षण किया जा चुका था, अब इसे वायु में भी सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया गया। इस तरह यह तय हो गया है कि ब्रह्मोस जल, थल और वायु से छोड़ी जा सकने वाली मिसाइल बन गई है। इस क्षमता को ट्रायड कहा जाता है, ट्रायड की विश्वसनीय क्षमता इससे पहले सिर्फ़ अमरीका, रूस और सीमित रूप से फ्रांस के पास मौजूद है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ब्रह्मोस जैसी क्षमता वाली मिसाइल भारत के पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के पास नहीं है। वायुसेना की बढ़ी ताकत इस सफल परीक्षण से वायुसेना की ताकत भी कई गुना बढ़ गई है। मिसाइल की स्पीड एक किलोमीटर प्रति सेकंड है यानि एक मिनट में 60 किलोमीटर, वैसे इस मिसाइल की रेंज करीब 300 किलोमीटर है पर सुखोई से फायर करते ही इसका रेंज 400 किलोमीटर तक बढ़ जाती है. साथ ही ये 300 किलोग्राम भारी युद्धक सामग्री ले जा सकती है। दुनियाँ मे कहीं भी इस वज़न और रेंज के मिसाइल का लड़ाकू विमान से फायर नही किया गया है। ये तकनीकी रूप से काफी जटिल प्रकिया है, जिसे सुखोई ने कर दिखाया है। ढाई टन वज़न वाली यह मिसाइल हथियार ले जाने के लिए मॉडिफाई किए गए सुखोई विमान पर ले जाया गया अब तक का सबसे वज़नी हथियार है। वैसे, अब ब्रह्मोस को ज़मीन, समुद्र तथा हवा कहीं से भी चलाया जा सकता है । फाइटर जेट से मार करने में सक्षम ब्रह्मोस मिसाइल के इस परीक्षण को 'डेडली कॉम्बिनेशन' कहा जा सकता है। हवा से जमीन पर मार करने वाले ब्रह्मोस मिसाइल का दुश्मन देश की सीमा में स्थापित आतंकी ठिकानों पर हमला बोलने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यह मिसाइल अंडरग्राउंड परमाणु बंकरों, कमांड ऐंड कंट्रोल सेंटर्स और समुद्र के ऊपर उड़ रहे एयरक्राफ्ट्स को दूर से ही निशाना बनाने में सक्षम है। बीते एक दशक में सेना ने 290 किलोमीटर की रेंज में जमीन पर मार करने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को पहले ही अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। ब्रह्मोस मिसाइल का देशी बूस्टर पुणे में स्थित डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन(डीआरडीओ) की हाई एनर्जी मैटरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी यूनिट ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का देशी बूस्टर डिवेलप किया है। डीआरडीओ के एक वरिष्ठ वैज्ञानिक ने इस बूस्टर की महत्ता का जिक्र करते हुए बताया, एक ब्रह्मोस मिसाइल 2 स्टेज में फायर होता है। पहले स्टेज में एक सॉलिड प्रॉपेलेन्ट बूस्टर, मिसाइल को सुपरसोनिक स्पीड से धक्का देता है और फिर अलग हो जाता है। इसके बाद दूसरे स्टेज में लिक्विड फ्यूल इंजिन, इसको ध्वनि की गति की 3 गुना गति दे देता है। भारत अभी तक रूस से ही बूस्टर को आयात करता था। इस देशी तकनीक से देश के पैसों की भी बचत होगी। युद्ध में गेम चेंजर साबित हो सकती है ब्रह्मोस ब्रह्मोस की रेंज अभी लगभग 300 किलोमीटर है, जिससे युद्द के समय पडोसी देश में हर जगह प्रहार करना संभव नहीं है। भारत के पास नई जेनरेशन की ब्रह्मोस मिसाइल से अधिक रेंज की बैलेस्टिक मिसाइल हैं, लेकिन ब्रह्मोस की खूबी यह है कि उससे खास टारगेट को तबाह किया जा सकता है। यह पाकिस्तान के साथ किसी टकराव की सूरत में गेम चेंजर साबित हो सकती है। बैलेस्टिक मिसाइल को आधी दूरी तक ही ही गाइड किया जा सकता है । इसके बाद की दूरी वे ग्रैविटी की मदद से तय करती हैं। वहीं क्रूज मिसाइल की पूरी रेंज गाइडेड होती है। ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल है। यह बिना पायलट वाले लड़ाकू विमान की तरह होगी, जिसे बीच रास्ते में भी कंट्रोल किया जा सकता है। इसे किसी भी ऐंगल से अटैक के लिए प्रोग्राम किया जा सकता है। यह दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम से बचते हुए उसकी सीमा के अंदर घुसकर ठिकानों को तबाह करने का दमखम रखती है। मिसाल के लिए, ब्रह्मोस से पहाड़ी इलाकों में बने आतंकवादी कैंपों को निशाना बनाया जा सकता है, जहां पारंपरिक तरीकों से असरदार हमले नहीं किए जा सकते। इसकी खासियत यह भी है कि यह मिसाइल आम मिसाइलों के विपरित हवा को खींच कर रेमजेट तकनीक से ऊर्जा प्राप्त करती है। अमेरिका की टॉमहॉक मिसाइल से बेहतर मिसाइल तकनीक में दुनियाँ की कोई भी दूसरी मिसाइल तेज गति से आक्रमण के मामले में ब्रह्मोस की बराबरी नहीं कर सकती है। इसकी खूबियां इसे दुनिया की सबसे तेज़ मारक मिसाइल बनाती है। यहां तक की अमरीका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फेल साबित होती है। ब्रह्मोस की सफलता का आंकलन इस बात से भी लगाया जा सकता है कि भारत अब दूसरे देशों को बेचने की दिशा में काम कर रहा है। ब्रह्मोस बनाने वाली कंपनी ब्रह्मोस एयर प्रोग्राम कंपनी को करीब सात अरब डॉलर के घरेलू ऑर्डर मिल चुके हैं। यहां पर ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों के चलते 2016 से पहले इनका निर्यात नहीं किया जा सकता था, लेकिन एमसीटीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजाइम) में शामिल होने के बाद भारत को इनकी खरीद-फरोख्त का अधिकार मिल चुका है। इंडो-रसियन संयुक्त उपक्रम के तहत इसकी शुरुआत 1998 में हुई थी। क्या होती है क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस एक सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल है। क्रूज मिसाइल उसे कहते हैं जो कम ऊँचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रडार से बची रहती है। ब्रह्मोस की विशेषता यह है कि इसे जमीन से, हवा से, पनडुब्बी से, युद्धपोत से यानी कि कहीं से भी दागा जा सकता है। यही नहीं इस मिसाइल को पारम्परिक प्रक्षेपक के अलावा उर्ध्वगामी यानी कि वर्टिकल प्रक्षेपक से भी दागा जा सकता है। ब्रह्मोस के मेनुवरेबल संस्करण का हाल ही में सफल परीक्षण किया गया। जिससे इस मिसाइल की मारक क्षमता में और भी बढोत्तरी हुई है। ब्रह्मोस मिसाइल आवाज की गति से लगभग 3 गुना ज्यादा यानि 2.8 मैक की गति से उड़ सकती है। जमीन के साथ-साथ अब ब्रह्मोस मिसाइल को हवा से भी दुश्म न के ठिकाने को बर्बाद करने के लिए इस्तेतमाल किया जा सकता है। भारत और रूस का संयुक्त उपक्रम ब्रह्मोस का विकास ब्रह्मोस कॉरपोरेशन द्वारा किया जा रहा है। यह कंपनी भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिशिया का सयुंक्त उपक्रम है। ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। रूस इस परियोजना में मिसाइल तकनीक उपलब्ध करवा रहा है और उड़ान के दौरान मार्गदर्शन करने की क्षमता भारत के द्वारा विकसित की गई है। यह मिसाइल रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक मिसाइल प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है। ब्रह्मोस के निर्यात की भी तैयारी ब्रह्मोस खास तरह की अत्याधुनिक क्रूज मिसाइल है जिसमें अब वायु सेना दृश्यता सीमा से बाहर के लक्ष्यों पर भी हमला कर सकेगी। लगभग 40 विमानों में यह प्रणाली लगाए जाने की योजना है। इस कामयाबी के बाद भारत दुनिया में स्वयं को एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने में भी सफल हुआ है। भारत इस मिसाइल के निर्यात की दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी में लग गया है। एमटीसीआर का सदस्य बनने के बाद यह कार्य और आसान हो गया है। वियतनाम 2011 से इस तेज गति की मिसाइल को खरीदने की कोशिश में लगा हुआ है। वह चीन से बचाव के लिए ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल लेना चाहता है। इस अत्याधुनिक मिसाइल को बेचने के लिए भारत की नजर में वियतनाम के अतिरिक्त 15 अन्य देश भी हैं। वियतनाम के बाद फिलहाल जिन चार देशों से बिक्री की बातचीत चल रही है उनमें इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, चिली व ब्राजील हैं। शेष 11 देशों की सूची में फिलीपींस, मलेशिया, थाईलैंड व संयुक्त अरब अमीरात आदि शामिल हैं। इन सभी देशों के साथ दक्षिण चीन सागर मसले पर चीन के साथ तनातनी चल रही है। दुनिया की सबसे तेज गति वाली मिसाइलों में शामिल ब्रह्मोस मिसाइल सर्वाधिक खतरनाक एवं प्रभावी शस्त्र प्रणाली है। यह न तो राडार की पकड़ में आती है और न ही दुश्मन इसे बीच में भेद सकता है। एक बार दागने के बाद लक्ष्य की तरफ बढ़ती इस मिसाइल को किसी भी अन्य मिसाइल या हथियार प्रणाली से रोक पाना असंभव है।
रास्ता बदलने में माहिर है ब्रह्मोस मेनुवरेबल तकनीक का अर्थ लॉन्चर करने के बाद लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मार्ग बदलना होता है। इस बात को साधारण तरीके से कुछ यूं समझा जा सकता है कि टैंक से छोड़े जाने वाले गोलों तथा अन्य मिसाइलों का लक्ष्य पहले से निश्चित होता है और वे वहीं जाकर गिरते हैं। इसके अलावा लेजर गाइडेड बम या मिसाइल वे होते हैं जो लेजर किरणों के आधार पर लक्ष्य को साधते हैं। परंतु यदि कोई लक्ष्य इन सब से दूर हो और लगातार गतिशील हो तो उसे निशाना बनाना कठिन हो सकता है। यहीं यह तकनीक काम आती है जिसमें ब्रह्मोस माहिर है। ब्रह्मोस मेनुवरेबल मिसाइल है। दागे जाने के बाद लक्ष्य तक पहुंचते यदि उसका लक्ष्य मार्ग बदल ले तो यह मिसाइल भी अपना मार्ग बदल लेती है और उसे निशाना बना लेती है। कुलमिलाकर भारत ने सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का सुखोई लड़ाकू विमान से सफल परीक्षण कर बड़ी कामयाबी हासिल की है इस कामयाबी से भारत की सामरिक क्षमता में बड़े पैमाने पर वृद्धि होगी
सुखोई और ब्रह्मोस की घातक जुगलबंदी ब्रह्मोस रफ्तार: 2.8 मैक या 3,400 किलोमीटर प्रतिघंटा मारक क्षमता : 290 किमी से 300 किमी
दुनिया क्यों है हैरान रफ्तार में अमेरिकी सेना की टॉमहॉक मिसाइल से चार गुना तेज। युद्धपोत और जमीन से दागने पर 200 किलो वारॅहेड्स ले जा सकती है। विमान से दागे पर 300 किलो वॉरहेड ले जाने में सक्षम। मेनुवरेबल तकनीक से लैस। लक्ष्य का रास्ता बदला तो मिसाइल भी बदल लेगी रास्ता
सुखोई-30एमकेआई डबल इंजन वाला सुखोई-30 2,100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। रूस की मदद से सुखोई-30 भारत का सबसे तेज गति से उड़ने वाला लड़ाकू विमान है। यह दुश्मन के इलाके में घुसने और उसके हवाई क्षेत्र पर कब्जा करने में सेना की मदद करता है। सुखोई करीब चार घंटे में 3,000 किमी तक की दूरी के मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकता है। उड़ान के दौरान ही आकाश में इसमें किसी विमान से ईंधन भरा जा सकता है। यह लगातार 10 घंटे तक हवा में रह सकता है।
भारत के मिसाइल कार्यक्रम का संक्षिप्त जानकारी सुखोई से ब्रह्मोस को दागने के बाद दुनियाँभर में खासकर पड़ोसी मुल्कों में उथलपुथल मच गई हैब्रह्मोस मिसाइल के अलावा भी भारत की कई अन्य घातक मिसाइलें हैं जिनका लोहा पूरी दुनियाँ मानती है .. अग्नि-I : इस मिसाइल का पहला सफल परीक्षण 25 जनवरी 2002 को किया गया था. इस मिसाइल का वजन 12 टन है और इसकी लंबाई 15 मीटर है. इसकी मारक क्षमता 700-1200 किलोमीटर है। अग्नि-1 में विशेष नौवहन प्रणाली लगी है जो सुनिश्चत करती है कि मिसाइल अत्यंत सटीक निशाने के साथ अपने लक्ष्य पर पहुंचे। इस मिसाइल के संचालन अधिकार स्ट्रेटजिक फोर्स कमांड के पास है।
अग्नि-II : 11 अप्रैल 1999 में इसका पहला परीक्षण किया गया। इस मिसाइल का वजन 16,000 किलो है और इसकी मारक क्षमता 2000-3500 किलोमीटर है। इस मिसाइल के सफल परीक्षण ने चीन और पाकिस्तान की नींदें उड़ा दी थीं. क्योंकि इसकी मारक क्षमता में दोनों देशों के कई बड़े शहर आते हैं। अग्नि-III : जुलाई 2006 में इसका पहला परीक्षण किया गया. इस मिसाइल का वजन 48,000 किग्रा है और इसकी लंबाई 17 मीटर। इस मिसाइल की मारक क्षमता 3500 किलोमीटर है। यह अपने तरह का विश्व के सबसे घातक हथियारों में से एक है। यह मिसाइल न्यूक्लीयर क्षमता से भी संपन्न है। अग्नि-IV : 15 नवंबर 2011 को इस मिसाइल का पहला परीक्षण किया गया. इसका वजन 17,000-किलोग्राम है और इसकी लंबाई 20 मीटर। इस मिसाइल का निर्माण अग्नि-II और अग्नि-III के बीच की कड़ी को पूरा करने के लिए किया गया था। अग्नि-V : 19 अप्रैल 2012 को इस शक्तिशाली मिसाइल का पहला सफल परीक्षण किया गया। इसका वजन 50,000 किलो है और इसकी लंबाई 17.5 मीटर है। 5000 किलोमीटर तक मार करने वाली अग्नि-5 भारत की पहली इंटर-कॉन्टिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल है। शौर्य मिसाइल : यह सतह से सतह पर मार करने वाला सामरिक मिसाइल है। 2008 में इसका पहला सफल परीक्षण किया गया। शौर्य मिसाइल का वजन 42 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 1.90 मीटर। इस मिसाइल की मारक क्षमता है 750 से 1900 किलोमीटर है. यह भारत का पहला हाइपर सुपर सॉनिक मिसाइल भी है। पृथ्वी : भारत के मिसाइल प्रोग्राम के अंतर्गत निर्माण किया जाने वाली पहला मिसाइल थी पृथ्वी। परमाणु संपन्न तथा 150-350 किमी की रेंज तक सतह से सतह पर मार करने वाली यह मिसाइल सेना के तीनों अंगों का अभिन्न हिस्सा है। नाग मिसाइल : 1990 में इसका सफल परीक्षण किया गया । इस मिसाइल का वजन 42 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 1.90 मीटर. इसे टैंक भेदी मिसाइल भी कहा जाता है। ‘पृथ्वी ’ एवं ‘अग्नि ’ जैसे स्वदेशी मिसाइलों की श्रृंखला में ‘नाग’ पांचवी मिसाइल है। यह मिसाइल अपनी विशेषताओं में 'टॉपअटेक- फायर एण्ड फोरगेट' तथा सभी मौसम में फायर करने की खास क्षमता रखती है। धनुष : धनुष मिसाइल स्वदेशी तकनीक से निर्मित पृथ्वी मिसाइल का नौसैनिक संस्करण है। यह मिसाइल परमाणु हथियारों को ले जाने की क्षमता रखती है। प्रक्षेपण के समय इसका वजन 4600 किलोग्राम होता है। ब्रह्मोस मिसाइल : इसका विकास रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने संयुक्त रूप से इसका किया है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की टैकनोलजी पर आधारित मिसाइल है। सबसे पहले 2001 में इसका सफल परीक्षण किया गया। ब्रह्मोस मिसाइल का वजन 3000 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 8.4 मीटर है। ब्रह्मोस की मारक क्षमता 290 किलोमीटर है। इसकी रफ्तार अमेरिका के सबसोनिक टॉमहॉक क्रूज मिसाइल से तीन गुनी अधिक है। आकाश मिसाइल : इसका परीक्षण 1990 में किया गया था। इसका वजन 720 किलोग्राम है और इसकी लंबाई 5.78 मीटर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल आकाश की तुलना अमेरिका के पेट्रियोट मिसाइल सिस्टम से की जाती है। एक समय में यह मिसाइल 8 भिन्न लक्ष्य पर निशाना साध सकती है । (लेखक राजस्थान की मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डिप्टी डायरेक्टर हैं और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं )
पिछले 12 सालों से विज्ञान विषय पर लिखते हुए विज्ञान और तकनीक पर केन्द्रित विज्ञानपीडिया डॉट कॉम के संचालक है । एबीपी न्यूज द्वारा विज्ञान लेखन के लिए सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर का सम्मान हासिल कर चुके शशांक को विज्ञान संचार से जुड़ी देश की कई संस्थाओं ने भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया है। वे देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्रों और पत्रिकाओं में लगातार लिख रहे हैं । )
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