Skip to content
Special Articles

डायनासोर पर विशेष प्रस्तुति

देखने में खूंखार , बड़े से बड़े जीव को भी अपने पंजों में दबाकर उड़ने की कूव्वत रखने वाले दैत्याकार डायनासोर की कल्पना आज भी सिहरन पैदा कर देती है। आखिर कहां चले गए ये डायनासोर और कैसे हुआ इनका अंत... आपने स्टीफन स्पीलबर्…

डायनासोर पर विशेष प्रस्तुति

देखने में खूंखार, बड़े से बड़े जीव को भीअपने पंजों में दबाकर उड़ने की कूव्वत रखने वाले दैत्याकार डायनासोर की कल्पना आजभीसिहरन पैदा कर देती है। आखिर कहां चले गए ये डायनासोर और कैसे हुआ इनका अंत...
आपने स्टीफन स्पीलबर्ग की फिल्म ‘द जूरासिक पार्क’ तो देखी ही होगी। हां वही जुरासिक पार्क, जिसने पूरी दुनिया को डायनासोर नामक एक जीव से परिचित कराया। फिल्म में कितना विशालकाय और खूंखार लगता था न वह जीव? आज हम आपको उस जीव के बारे में काफी कुछ बताएंगे। मुझे पता है कि आज भी डायनासोर के बारे में जानने की उत्सुकता सिर्फ आपमें ही नहीं, बड़ों में भी है। डायनासोर का अर्थ होता है दैत्याकार छिपकली। ये छिपकली और मगरमच्छ कुल के जीव थे। ज्यूरासिक काल (25 करोड़ वर्ष पूर्व) से क्रेटेशियस काल (6 करोड़ वर्ष पूर्व) के बीच पृथ्वी पर इनका ही साम्राज्य था। उस काल में इनकी कई प्रजातियां पृथ्वी पर विद्यमान थीं। इनकी कुछ ऐसी प्रजातियां भी थीं, जो पक्षियों के समान उड़ती थीं। ये सभी डायनासोर सरिसृप समूह के थे। इनमें कुछ छोटे (4 से 5 फीट ऊंचे), तो कुछ विशालकाय (50 से 60 फीट ऊंचे) थे। इनकी अधिकतम ऊंचाई 100 फीट तक नापी गई है। आज से लगभग 6 करोड़ वर्ष पूर्व ये पृथ्वी से अचानक विलुप्त हो गए, लेकिन भारत और चीन में ये उसके बाद तक (लगभग 50 से 60 लाख वर्ष तक) विचरण करते रहे। आज इनके जीवाश्म ही प्राप्त होते हैं।
आर्कटिक के जंगलों में डायनासोर एक नए अध्ययन में दावा किया गया है कि करीब 10 करोड़ साल पहले डायनासोर्स आर्कटिक के जंगलों में घूमा करते होंगे। लंदन के रॉयल हॉलोवे विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ताओं ने डायनासोर कालीन पादप की प्रथम वास्तविक तस्वीरें तैयार कर दावा किया है कि करीब 10 करोड़ साल पहले इस धुव्रीय क्षेत्र में वैसी ही जलवायु थी, जैसी आज ब्रिटेन में है।
पैरों के निशान जीवाश्म विशेषज्ञों ने यूरोप में स्विस पर्वत से करीब आधा किलोमीटर की दूरी पर डायनासोर का अब तक का सबसे बड़ा पद चिह्न खोजने का दावा किया है। ब्रिटेन के प्रमुख अखबार द डेली टेलीग्राफ के मुताबिक, नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के एक टीम ने स्विट्जरलैंड के सबसे बड़े पार्क इला नेचर रिजर्व में 3,300 मीटर के दायरे में 15 इंच लंबे पदचिह्न पाए गए हैं। जीवाश्म विशेषज्ञों के अनुसार, संभवत: 15 से 20 फीट लंबे तीन पैर वाला जानवर 21 करोड़ साल से भी पहले स्विस आल्पस पर घूमता-फिरता था। विशेषज्ञों का कहना है कि 15 इंच लंबे पदचिह्न ट्रियासिक काल के मांस भक्षी डायनासोर के हैं, जो उस दौर में पृथ्वी पर सबसे बड़े शिकारी हुआ करते थे।
झुंड में करते थे शिकार लंदन में जीवाश्म विज्ञानियों ने दावा किया है कि टायरैनोसोरस रेक्स नामक शीर्ष मांसभक्षी डायनासोर बेहद बुद्धिमान जीव होते थे। वह झुंड में शिकार पर निकलते थे और झुंड में छोटे-बड़े सभी टायरैनोसोरस होते थे। ज्यादातर विशेषज्ञों का मानना है कि स्तनपाई के उदय के बाद टायनासोर में झुंड में शिकार पर निकलने की प्रवृत्ति पनपी होगी।
कभीतैरते थे डायनासोर फिल्मों और वृत्तचित्रों में कृत्रिम डायनासोर्स को जमीन पर भागते हुए हमने तो देखा है, लेकिन नए शोधों से पता चला है कि डायनासोर न सिर्फ जमीन पर चलते थे, बल्कि वे पानी में भी तैरते थे। नैचर न्यूज में प्रकाशित खबर के अनुसार, फ्रांस की यूनिवर्सिटी आॅफ लीयोन के रोमैन एमियट और उनकी टीम ने अपने अ•यास के बाद यह साबित किया है कि स्पाइनोसोर प्रजाति के डायनासोर्स पानी में अपना जीवन-यापन करते थे। ये भोजन के लिए मछलियों तथा अन्य समुद्री जीवों को निशाना बनाते थे। 1983 में इंग्लैंड से प्राप्त बैरीयोनिक्स वाकेरी डायनासोर्स के •ा्रूण के अमाशय में मछली के पंख के निशान मिले थे, जो इस बात की पुष्टि करते हैं। स्पाइनोसोर परिवार के बैरीयोनिक्स वाकेरी डायनासोर की खोपड़ी लम्बी थी और वह मगरमच्छ जैसी दिखाई देती थी। उसके दांत भी चाकू के आकार के थे, जबकि टायरनोसोर रेक्स जाति के और धरती पर विचरण करने वाले डायनासोर के दांत कुल्हाड़ी के आकार के होते थे।
भारत में डायनासोर भा रत में भी डायनासोर के कई जीवाश्म प्राप्त हुए हैं। इनमें नर्मदा घाटी से प्राप्त डायनासोर के जीवाश्म प्रमुख हैं। इनका इतिहास काफी पुराना है। सर्वप्रथम आर. लाइडेकर ने 1877 में जबलपुर के पास से लमेटा स्थल से डायनासोर के जीवाश्म प्राप्त किए थे। इस जीवाश्म को टायटेनोसोर कहा गया। इसी तरह के कई डायनासोर के जीवाश्म जबलपुरिया, जैनासोरम, इंडोसोरस, आइसियोसोरस, लमेटोसोरस और राजोसोरस वगैरह हैं।
डायनासोर औरभी . टाइटेनोसोरस : टाइटेनोसोरस का अर्थ होता है दैत्याकार छिपकली। इसके कुछ हिस्सों के जीवाश्म ही प्राप्त हुए हैं। यह लग•ाग 20 फीट ऊंचा और 30 फीट लंबा था। इसके जीवाश्म क्रेटेशियस काल के हैं। इन्हें जबलपुर के पास से लाइडेकर द्वारा 1877 में खोजा गया था। इंडोसोरस : वॉन हुइन एवं मेटली ने 1933 में जबलपुर, मंडला के कई स्थानों पर कई डायनासोर्स के जीवाश्म खोजे थे। जैसे, मेगालोसोर, कारनाटोसोर, आर्थोगानियासोर आदि। इन सभी को थीरोपोड जीव समूह के इंडोसोर उपसमूह में रखा गया है। इनके भी अधूरे जीवाश्म ही प्राप्त हुए हैं। इनकी ऊंचाई करीब 30-35 फुट और वजन 700 किलो रहा होगा। जबलपुरिया टेनियस : इसके जीवाश्म 1933 में वॉन हुश्न एवं मेटली द्वारा जबलपुर के पास लमेटा स्थल से खोजे गए थे। यह छोटे कद का (लग•ाग 3 फुट ऊंचा, 4 फीट लंबा) और 15 किलो वजनी डायनासोर था। राजासोरस नर्मदेंसिस : अभी तक प्राप्त डायनासोर जीवाश्मों में राजासोरस के जीवाश्म 80 प्रतिशत तक संरक्षित किए जा रहे हैं। इस डायनासोर का जीवाश्म गुजरात के खेड़ा जिले के रइहोली गांव से भारतीय भू-गर्भ शास्त्री डॉ. श्रीवास्तव द्वारा 1982 में खोजा गया था। इसे राजासौरस नर्मदेंसिस कहा गया। यानी डायनासोर का राजा। इसके सिर पर मुकुट के समान एक सींग था। यह 20-30 फुट ऊंचा, 45 फुट लंबा मांस•ाक्षी डायनासोर था। बालाघाट एवं धार जिले से भी इसके अंडों के जीवाश्म प्राप्त हुए हैं।
कैसे हुए विलुप्त? विशाल उल्का पिंड के पृथ्वी पर गिरने से डायनासोर का अस्तित्व समाप्त हो गया। हालांकि डायनासोर के विलुप्त होने के कई कारण बताए गए हैं। कोई कहता है कि डायनासोर प्रलय में मारे गए। कोई कहता है कि बाढ़ के कारण मरे, तो कोई कहता है कि ठंड के कारण मारे गए। कोई कहता है कि गर्मी के कारण मारे गए, कोई जलवायु परिवर्तन को इसकी मौत का कारण बताता है। •ाूख को •ाी इनकी मौत का कारण माना गया है।
संरक्षण है जरूरी ये सारे जीवाश्म नदी के इतने समीप हैं कि वर्षा काल में इनके पुन: डूब जाने की संभावना है। अत: इनको संरक्षित किया जाना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही इस स्थान पर गहन शोध की आवश्यकता है, ताकि नमर्दा घाटी के गर्भ में छिपे कई पन्नों को अच्छी तरह से पढ़ा जा सके और इसके डायनासोर और उस समय के जीवन पर प्रकाश डाला जा सके। यदि यहां समूचे जीवाश्म खोजे जा सके, तो कई नए तथ्य सामने आएंगे और उड़ने वाले डायनासोर्स के बारे में और अच्छी तरह से समझा एवं जाना जा सकेगा।
कुछ तथ्य ...? -डायनासोर के अब तक 500 वि•िान्न वंशों और 1000 से अधिक प्रजातियों की पहचान हुई है। - इनके अवशेष पृथ्वी के हर महाद्वीप पर पाए गए हैं। -कुछ डायनासोर शाकाहारी, तो कुछ मांसाहारी थे। -कुछ दो पैरों वाले, तो कुछ चार पैरों वाले थे। -डायनासोर्स बड़े होते थे, लेकिन कुछ डायनासोर प्रजातियों का आकार मानव के बराबर, तो कुछ मानव से भी छोटे थे। -डायनासोर के कुछ सबसे प्रमुख समूह अंडे देने के लिए घोंसले का निर्माण करते थे और आधुनिक पक्षियों के समान अंडे देते थे। - सबसे छोटे डायनासोर के जीवाश्म की ऊंचाई लग•ाग 13 इंच है और लंबाई 16 इंच। -बड़े डायनासोर 20 करोड़ साल पहले ट्रियासिक काल के समाप्त होने के तुरंत बाद उ•ारे। - धरती से उल्का पिंड के टकराने से डायनासोर के कई प्रतिस्पर्धियों का सफाया हो गया, जिससे डायनासोर प्रभावशाली हो गए। -डायनासोर के साथ पृथ्वी पर विशाल पक्षी भी रहते थे। -इंसानों और डायनासोर के एक साथ रहने के सबूत भी (ref-career7india)
Continue reading

Special Articles

All in topic
एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस
Special Articles

एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस

डॉ. शशांक द्विवेदी परियोजना प्रबंधक , टीएसएससी (कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय , भारत सरकार) भारत आज ऊर्जा परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं ने करोड़ों घरों तक…

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ
Special Articles

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ

आज हम ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) हमारे जीवन, कामकाज और सोचने के तरीके को बदल रही है। एआई आज हर क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, उद्योग, मीडिया—में अपनी…

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई
Special Articles

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई

चंद्रभूषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की चर्चा अभी दुनिया में सबसे ज्यादा बिजली खाने वाली तकनीकों की तरह हो रही है। सन 2022 में लगाए गए हिसाब के मुताबिक ये दोनों उस समय दुनिया की दो फीसदी बिजली हजम कर रही…