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जैवविविधता और योद्धा की देह गंध

योद्धा की देह गंध चंद्रभूषण अमेजन नदी के उत्तरी छोर पर मौजूद तर जलवायु वाले जंगली इलाके आज भी अपने रहस्यों के लिए जाने जाते हैं। दुनिया के आधे वर्षा-वन यहीं हैं और जंगल खत्म करने के तमाम उपायों के बावजूद जैव-विविधता की व…

जैवविविधता और योद्धा की देह गंध
योद्धा की देह गंध
चंद्रभूषण
अमेजन नदी के उत्तरी छोर पर मौजूद तर जलवायु वाले जंगली इलाके आज भी अपने रहस्यों के लिए जाने जाते हैं। दुनिया के आधे वर्षा-वन यहीं हैं और जंगल खत्म करने के तमाम उपायों के बावजूद जैव-विविधता की वैश्विक राजधानी होने का गौरव इसी क्षेत्र को प्राप्त है। अभी इस इलाके के प्रिप्रिओका नाम के पौधे की जड़ से निकली खुशबू धरती के हर कोने को अपनी गिरफ्त में लेती जा रही है।

इस खुशबू का स्वरूप कुछ ऐसा है कि इससे बनी परफ्यूम स्त्री-पुरुष दोनों पर फबती है और नमकीन, मीठे दोनों तरह के खानों के साथ भी इसका जबर्दस्त मेल बैठता है। भारत की पहचान इसके इत्र और मसालों से जुड़ी रही है, लिहाजा सुदूर ब्राजील से आई एक खुशबू को इतना ऊंचा मुकाम मिलना हमें अजीब लग सकता है। लेकिन प्रिप्रिओका की गंध समझने और फैलाने का काम ही बमुश्किल 50 साल पहले शुरू हुआ है, लिहाजा नई चीज मानकर हमें इसकी कद्र करनी चाहिए।

उत्तरी ब्राजील के आदिवासियों में अद्भुत देह गंध वाले पिरीपिरी नाम के एक अजेय योद्धा के किस्से कहे जाते हैं, जो कहीं भी खुद को घेर लेने वाली सुंदरियों से परेशान रहता था। एक बार सुपी नाम के ओझा की बिटिया ने अपने बाप से पिरीपिरी को वश में करने का तरीका पूछा और पूर्णिमा की रात में उसके पैर अपनी जुल्फों से बांधने लगी।

संयोगवश ठीक उसी समय योद्धा पिरीपिरी की नींद खुल गई और वह बादल बनकर सदा के लिए गायब हो गया। कथा के मुताबिक पिरिपिरिओका (अभी प्रिप्रिओका) धरती पर उसी योद्धा की आखिरी निशानी है। हालांकि इसकी खुशबू का जायजा आप करीब 2000 रुपये लगाकर ही ले पाएंगे।
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