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गॉड पार्टिकल, नोबेल के बाद

चंद्रभूषण।। पिछले साल जुलाई में गॉड पार्टिकल खोज लिए जाने का इतना हल्ला मचा और अब इसकी स्थापना देने वाले हिग्स और एंग्लर्ट को नोबेल दे दिया गया है। उस समय इस बारे में कई विद्वत्तापूर्ण वैज्ञानिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक ल…

गॉड पार्टिकल, नोबेल के बाद
चंद्रभूषण।।
पिछले साल जुलाई में गॉड पार्टिकल खोज लिए जाने का इतना हल्ला मचा और अब इसकी स्थापना देने वाले हिग्स और एंग्लर्ट को नोबेल दे दिया गया है। उस समय इस बारे में कई विद्वत्तापूर्ण वैज्ञानिक, दार्शनिक और आध्यात्मिक लेख पढ़ने को मिले थे। लेकिन कम ही लोगों के पल्ले पड़ा कि यह क्या चीज है और दुनिया की बारीकियां समझने में इससे क्या मदद मिलने वाली है। स्थिति आज भी बहुत स्पष्ट नहीं है- सिवाय इसके कि खोज सौ टंच सही थी। नोबेल समिति की तरफ से जारी प्राइज साइटेशन में वही बातें दोहराई गई हैं। वही दृष्टांत कि बर्फबारी के इलाके में स्केट्स पहनने वाला सर्र से निकल जाता है, बूट पहनने वाले के लिए आगे बढ़ना मुश्किल होता है, जबकि चिड़िया को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इलाके में कितनी बर्फ पड़ी है। इस दृष्टांत में हिग्स फील्ड की उपमा बर्फबारी वाले इलाके से दी जाती है, जिससे गुजरकर अलग-अलग मूल कण अलग-अलग द्रव्यमान हासिल करते हैं।
आम आदमी के लिए क्वांटम मेकेनिक्स से जुड़ी बातों को समझने की एक सीमा है। भौतकीविद इसके लिए जिन दृष्टांतों का इस्तेमाल करते हैं उनसे बातें साफ होने के बजाय अक्सर और उलझ जाती हैं। छठीं-सातवीं क्लास में बच्चों को विज्ञान का एक बुनियादी नियम पढ़ाया जाता है कि पदार्थ को बिल्कुल जड़ से न तो बनाया जा सकता है और न नष्ट किया जा सकता है। सिर्फ उसकी शक्ल और गुणधर्म बदलते रहते हैं। थोड़ा उम्रदार होने पर उनके सामने आइंस्टाइन के बहुचर्चित समीकरण E=mc2 का जिक्र आता है, जो पदार्थ के ऊर्जा में बदलने का समीकरण है और जिसके जरिये एटम बम से लेकर सितारों तक की ऊर्जा का आकलन किया जाता है। यहां भी पदार्थ सिर्फ शक्ल बदलता है, न बनता है न नष्ट होता है। लेकिन गॉड पार्टिकल के मामले में स्थिति दूसरी है।
पदार्थ या मैटर की जो भी परिभाषा दी जाती है, उसमें द्रव्यमान या मास एक बुनियादी तत्व होता है। आपका वजन धरती पर 72 किलो है तो चांद पर 12 किलो निकलेगा। लेकिन जहां तक सवाल आपके द्रव्यमान का है तो ब्रह्मांड के आखिरी छोर तक यह ज्यों का त्यों रहेगा। हिग्स बोसॉन को गॉड पार्टिकल जैसा अवैज्ञानिक नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसकी धारणा ही ऐसी थी कि यह मासलेस चीजों को मास देता है। पदार्थ के सूक्ष्मतम रूप को मूल कण या फंडामेंटल पार्टिकल्स कहते हैं। इनमें से कुछ में द्रव्यमान होता है, कुछ में नहीं होता। मसलन, रोशनी की सबसे छोटी इकाई फोटॉन मासलेस है, जबकि बिजली की सबसे छोटी इकाई इलेक्ट्रॉन में मास होता है। ऐसा बुनियादी फर्क प्रकृति दो मूल कणों के बीच क्यों करती है, इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश में ही हिग्स फील्ड की धारणा सामने आई थी।
एक सर्वव्यापी अदृश्य फील्ड, जो कुछ कणों को द्रव्यमान देती है, कुछ को नहीं देती। जैसे चुंबकीय क्षेत्र लोहे की छीलन को एक खास पैटर्न में बिखेरता है, जबकि लकड़ी की छीलन को ज्यों का त्यों छोड़ देता है। हिग्स कण, जिसे नोबल लॉरिएट ल्योन एम. लीडरमान ने 1993 में आई अपनी किताब में गॉड पार्टिकल का बिकाऊ नाम दिया, इसी हिग्स फील्ड का प्रतिनिधि रूप है। जैसे समुद्र की प्रतिनिधि उसकी लहर हुआ करती है। लेकिन यह क्या गड़बड़झाला है? हमारे इर्दगिर्द की सारी चीजें- चाहे वह खिड़की से आ रही रोशनी में नाचता धूल का एक कण हो, या पेड़ पर गाता हुआ एक पंछी, या हजारों प्रकाश वर्ष दूर कोई ब्लैक होल जो पृथ्वी का खरबों गुना भारी होने के बावजूद किसी को दिखता नहीं- अपने होने की सबसे जरूरी शर्त, अपना द्रव्यमान एक ऐसी चीज से हासिल करती हैं, जिसे हम अब तक जानते भी नहीं थे? ध्यान रहे, खुद हिग्स भी अपनी प्रस्थापना को ऐसा कोई अकाट्य सत्य मानकर नहीं चल रहे थे। वे तो अब से पचास साल पहले सिर्फ आधुनिक भौतिकी की एक सैद्धांतिक गुत्थी सुलझाने में जुटे थे। अपनी बात कहने का कोई प्रायोगिक आधार उनके पास नहीं था। गुत्थी वही कि क्वांटम मेकेनिक्स में पदार्थ के बाकी गुणों का हिसाब था, लेकिन द्रव्यमान के लिए कोई गुंजाइश नहीं निकल रही थी। अलग-अलग ढंग से इस समस्या पर काम कर रहे कुल छह वैज्ञानिकों ने राय दी कि ऊर्जा के बहुत ऊंचे स्तर पर कोई ऐसी फील्ड काम करती होगी, जिसने इलेक्ट्रॉन, क्वार्क, और डब्लू व जेड बोसॉन को मास दिया, जबकि ग्लूऑन और फोटॉन को मासलेस छोड़ दिया।
यहां वे ऊर्जा के इतने ऊंचे स्तर की बात कर रहे थे, जो अभी सृष्टि में कहीं नहीं है। ब्रह्मांड के जन्मकाल, बिग बैंग के कुछ सेकंड बाद की बात, जिससे काफी निचले स्तर की ऊर्जा यूरोप में 9 अरब डॉलर लगाकर बनाई गई दुनिया की सबसे बड़ी मशीन से पिछले साल जून में पैदा की गई, और जहां पहली बार हिग्स बोसॉन का अंदाजा देने वाला कुछ घटित हुआ। पिछले सौ वर्षों में संसार की सबसे बुनियादी सचाइयां भौतिकी से ही निकल रही हैं। आइंस्टाइन की थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी जैसी ही सोच की धुरी बदलने वाली भूमिका आने वाले दिनों में हिग्स पार्टिकल निभा सकता है, इसका एहतराम नोबेल समिति की ओर से कर दिया गया है। धीरज के साथ इसके बाकी रहस्य खुलने का इंतजार करें।(नवभारतटाइम्स से साभार )
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#नोबेल पुरस्कार#विशेष लेख#गॉर्ड पार्टिकल
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