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क्षुद्रग्रहों के पृथ्वी से टकराने की आशंका

कुछ वैज्ञानिक जहां क्षुद्रग्रहों की विशाल खनिज संपदा के दोहन की तैयारियों में जुट गए हैं वहीं नासा ने पृथ्वी के लिए खतरा बनने वाले क्षुद्रग्रहों के बारे में एक नया अनुमान पेश किया है। नासा के ताजा सर्वे के मुताबिक कम से…

क्षुद्रग्रहों के पृथ्वी से टकराने की आशंका
कुछ वैज्ञानिक जहां क्षुद्रग्रहों की विशाल खनिज संपदा के दोहन की तैयारियों में जुट गए हैं वहीं नासा ने पृथ्वी के लिए खतरा बनने वाले क्षुद्रग्रहों के बारे में एक नया अनुमान पेश किया है। नासा के ताजा सर्वे के मुताबिक कम से कम 4700 क्षुद्रग्रहों को पृथ्वी के लिए संभावित खतरे की श्रेणी में रखा जा सकता है। ये खगोलीय शिलाएं करीब 100 मीटर चौड़ी हैं और ऐसी कक्षाओं में भ्रमण कर रही हैं जो उन्हें कभी-कभी पृथ्वी के इतने करीब ले आती हैं कि हमें चिंता होने लगती है। रिसर्चरों का कहना है कि इनमे से सिर्फ 30 प्रतिशत शिलाओं का ही पता चल पाया है। संभावित खतरनाक क्षुद्रग्रहों में वे शिलाएं शामिल हैं जो पृथ्वी के 80 लाख किलोमीटर नजदीक तक आ जाती हैं। यदि ये शिलाएं पृथ्वी से कभी टकराती हैं तो विश्व स्तर या क्षेत्रीय स्तर पर बहुत भारी नुकसान हो सकता है। नया अध्ययन नासा के वाइड-फील्ड इंफ्रारेड सर्वे एक्स्प्लोरर (वाइस) द्वारा किए गए पर्यवेक्षण पर आधारित है। वाइस एक इंफ्रारेड अंतरिक्ष दूरबीन है। हालांकि दूरबीन के आंकड़ों ने पिछले अनुमानों की पुष्टि की है, नए सर्वे ने कुछ चौंकाने वाली बातें भी सामने रखी हैं। सर्वे के अनुसार बहुत से क्षुद्रग्रह सूरज के इर्दगिर्द पृथ्वी के मार्ग के साथ नजदीकी रूप से जुड़े हुए हैं। संभवत इसके पीछे एक बड़ा कारण यह है कि अनेक खतरनाक शिलाओं की उत्पत्ति मंगल और बृहस्पति के बीच क्षुद्रग्रहों की पट्टी में दो क्षुद्रग्रहों की टक्कर की वजह से हुई थी। मुख्य पट्टी में एक बड़े पिंड के टूटने के बाद उसके बहुत से छोटे-छोटे टुकड़े बिखर कर पृथ्वी के नजदीक की कक्षाओं में पहुँच गए होंगे। ऐसी चट्टानें पृथ्वी के आसपास मौजूद दूसरे क्षुद्रग्रहों की तुलना में छोटी और ज्यादा चमकीली हैं और इन्हीं के पृथ्वी से टकराने का खतरा ज्यादा है। संभावित खतरनाक चट्टानों के चमकदार होने का कारण उनकी संरचना में खोजा जा सकता है। ये चट्टानें ग्रेनाइट जैसी हो सकती हैं अथवा उनमें धातु-तत्व का अंश अधिक हो सकता है। पृथ्वी को अंतरिक्ष-शिलाओं से होने वाले नुकसान का अंदाजा लगाने के लिए उनकी संरचना के बारे में विस्तृत जानकारी जरूरी है। वाइस के क्षुद्रग्रह टोही मिशन की प्रमुख जांचकर्ता एमी मैंजर का कहना है कि ये शिलाएं भविष्य में ज्यादा से ज्यादा पृथ्वी के नजदीक आने की कोशिश करेंगी। इससे हमें इन पर मानवयुक्त मिशन या रोबोट यान भेज कर इनके विस्तृत अध्ययन के अच्छे अवसर भी मिलेंगे। नासा ने ऐसे क्षुद्रग्रह को संभावित रूप से खतरनाक माना है जो वायुमंडल में प्रवेश के दौरान तीव्र ऊष्मा को झेल कर पृथ्वी से टकराने में कामयाब हो जाता है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी के अनुमान के अनुसार यदि एक 40 मीटर चौड़ा क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराता है तो उसका प्रभाव तीन मेगाटन के परमाणु बम के बराबर होगा। यदि दो किलोमीटर चौड़ा क्षुद्रग्रह पृथ्वी से टकराता है तो पूरी दुनिया में पर्यावरण को भयंकर क्षति हो सकती है। ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ साउथंपटन के रिसर्चरों ने दस ऐसे देशों की पहचान की है जहां क्षुद्रग्रहों की टक्कर से होने वाले नुकसान का खतरा सबसे ज्यादा है। ये देश हैं चीन, इंडोनेशिया, भारत, जापान, अमेरिका, फिलिपीन, इटली, ब्रिटेन, ब्राजील और नाइजीरिया। नासा का कहना है कि निकट भविष्य में आसमानी शिलाओं के पृथ्वी से टकराने की कोई आशंका नहीं है, लेकिन खगोल- वैज्ञानिकों को पृथ्वी के निकट मंडराने वाले क्षुद्रग्रहों से हर पल चौकन्ना रहना पड़ेगा। पृथ्वी के लिए खतरा बनने वाले क्षुद्रग्रहों की सही-सही संख्या का अंदाजा होना बहुत जरूरी है। इसके लिए अगले दशकों में टोही अभियानों को और तेज करना होगा। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के निकटवर्ती क्षुद्रग्रहों के बारे में नवीनतम अनुमान वाइस दूरबीन द्वारा 107 क्षुद्रग्रहों के पर्यवेक्षण के आधार पर लगाया है। इस दूरबीन को 2009 में अंतरिक्ष में भेजा गया था।
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