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| Dainik Jagran |
इसरो ने भारत के पहले नेवीगेशन सेटेलाइट आईआरएनएसएस-1 ए का प्रक्षेपण पीएसएलवी-सी 22 के जरिए श्रीहरिकोटा के समीप सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सफलता पूर्वक कर दिया । 1425 किलोग्राम वजनी आईआरएनएसएस-1ए इंडियन रीजनल नेवीगेशन सेटेलाइट सिस्टम (आईआरएनएसएस) का पहला उपग्रह है। इस उपग्रह का जीवन दस साल का है। यह उपग्रह संबंधित पक्षों को सटीक स्थतिक सूचनाएं उपलब्ध कराएगा तथा अपनी सीमा से 1500 किलोमीटर की दूरी तक के क्षेत्र संबंधी आंकड़ें देगा।
आईआरएनएसएस-1ए दो तरह के पेलोड्स लेकर गया है। नेवीगेशन और रेंजिंग पेलोड्स को प्रक्षेपण के 20 मिनट बाद अंतरिक्ष में छोड़ा गया। इस उपग्रह के दो सौर पैनल हैं। परमाणु घड़ी सहित नाजुक तत्वों के लिए विशेष तापीय नियंत्रण व्यवस्था डिजाइन और क्रियांवित की गई हैं। यह इसरो के पीएसएलवी का 24वां मिशन है। इसरो के 24 मिशनों में से यह चैथा मौका है जब प्रक्षेपण के लिए ‘एक्सएल’ प्रारूप का इस्तेमाल किया गया है। इसरो ने चंद्रयान 1 (पीएसएलवी-सी 11), जीसैट-12 (पीएसएलवी-सी 17) तथा आरआईसैट-1 (पीएसएलवी-सी 19) के प्रक्षेपण में इसका इस्तेमाल किया था।
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| Haribhoomi |
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| Kalptaruexpress |
19 अप्रैल 1975 में स्वदेश निर्मित उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ के प्रक्षेपण के साथ अपने अंतरिक्ष सफर की शुरूआत करने वाले इसरो की यह सफलता भारत की अंतरिक्ष में बढ़ते वर्चस्व की तरफ इशारा करती है । इसरो ने अब तक 63उपग्रह, एक स्पेस रिकवरी मॉड्यूल और 37 रॉकेटों का प्रक्षेपण कर लिया है। इससे दूरसंवेदी उपग्रहों के निर्माण व संचालन में वाणिज्यिक रूप से भी फायदा पहुंच रहा है । ये सफलता इसलिए खास है क्योंकि भारतीय प्रक्षेपण राकेटों की विकास लागत ऐसे ही विदेशी प्रक्षेपण राकेटों की विकास लागत का एक-तिहाई है ।



