Skip to content
Special Articles

अल्बर्ट आइंस्टाइन के बारें में विशेष ,उनके जन्मदिन पर खास पेशकश

प्रदीप कुमार आज अल्बर्ट आइंस्टाइन का जन्मदिन है : उन्नीसवी शताब्दी के अंत में गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत, विद्युत्-चुंबकीय सिद्धांत, ऊष्मागतिकी वगैरह क्षेत्रों में इतनी प्रगति हो चुकी थी कि सैद्धांतिक भौतिकी के पंडितों ने यह…

अल्बर्ट आइंस्टाइन के बारें में विशेष  ,उनके जन्मदिन पर खास पेशकश
प्रदीप कुमार
आज अल्बर्ट आइंस्टाइन का जन्मदिन है :
उन्नीसवी शताब्दी के अंत में गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत, विद्युत्-चुंबकीय सिद्धांत, ऊष्मागतिकी वगैरह क्षेत्रों में इतनी प्रगति हो चुकी थी कि सैद्धांतिक भौतिकी के पंडितों ने यह दावा कर दिया था कि भौतिकी में जो भी नई खोजें हो सकती थीं, वे हो चुकीं हैं और अब नया खोजने के लिए कुछ भी नहीं रह गया है। जैसे सिकंदर ने बचपन में अपने पिता से इस बात की शिकायत की थी कि जिस प्रकार से वे दुनिया को फतह कर रहे हैं उसके चलते उसके पास विजय पाने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा, ठीक उसी प्रकार से वैज्ञानिकों को भी विज्ञान (विशेषकर भौतिकी) से शिकायत थी! मगर वास्तव में ऐसा नहीं हुआ क्योंकि वैज्ञानिकों द्वारा स्वीकृत सिद्धांतों पर नए प्रयोगों ने प्रश्नचिन्ह लगा दिए और धीरे-धीरे इन पुराने सिद्धांतों की उपयोगिता कम होने लगी तथा ब्रह्मांड की व्याख्या के लिए नए सिद्धांतों की आवश्यकता महसूस की जाने लगी। और इसके बाद तो भौतिकी में महान आविष्कारों की झड़ी-सी लग गई और एक्स-रे, रेडियोसक्रियता, इलेक्ट्रॉन, रेडियम, प्रकाश-विद्युत प्रभाव, क्वांटम सिद्धांत आदि खोजें भौतिकी के क्षितिज पर प्रकट हुईं। और, 1905 में जैसे चमत्कार ही हो गया। बर्न के पेटेंट ऑफिस में एक क्लर्क की हैसियत से काम कर रहे 26 वर्षीय अल्बर्ट आइंस्टाइन ने भौतिकी की स्थापित मान्यताओं को चुनौती देते हुए दिक्काल (यानी स्पेस-टाइम) और पदार्थ की नई धारणाओं के साथ चार शोध पत्र प्रकाशित किए जिन्होंने सैद्धांतिक भौतिकी को झकझोरकर उसका कायाकल्प ही कर दिया।
पहला शोध पत्र प्रकाश-विद्युत् प्रभाव की व्याख्या प्रस्तुत करता था, जिसने क्वांटम सिद्धांत को आधार प्रदान किया। दूसरे शोध पत्र ने ब्राउनियन मोशन की व्याख्या की तथा परमाणु और अणु की वास्तविकता को सुनिश्चित किया। तीसरा शोध पत्र विशेष सापेक्षता सिद्धांत से संबंधित था। इसमें आइंस्टाइन ने यह बताया कि समय, स्थान और द्रव्यमान तीनों ही गति के अनुसार निर्धारित होते हैं। चौथे शोध पत्र में उन्होंने द्रव्य और ऊर्जा के बीच के संबंध को स्थापित करते हुए मशहूर E=mc² सूत्र प्रतिपादित किया था। आइंस्टाइन तत्कालीन भौतिकी में शैतानरूपी विपदा के समान आए और तब न्यूटन पर एल्कजेंडर पोप के तुक्तक (‘प्रकृति और प्रकृति के नियम अंधरे में ओझल थे / ईश्वर ने कहा, न्यूटन को आने दो और सबकुछ पता चल गया।’) की नकल करते हुए सर कोलिंग्स स्क्वायर को कहना पड़ा : ‘यह अंतिम नहीं था और शैतानी हुंकार भरी, छी / यथास्थिति बहाल करने के लिए आइंस्टाइन को आने दो।’
यह सब उल्म शहर (जर्मनी) एक ऐसे लड़के ने आगे चलकर किया था, जिसको परिवार और विद्यालय ने मंदबुद्धि घोषित कर दिया था; जिसने पढ़ाई पूरी होने से पहले ही विद्यालय छोड़ दिया था; पॉलिटेक्निक प्रवेश परीक्षा में असफल हो चुका था; जिसे पढ़ाई पूरी करने के बाद विश्वविद्यालय में अध्यापन कार्य प्राप्त करने में भी असफल होने के बाद एक क्लर्क की नौकरी से ही संतोष करना पड़ा था।
आइंस्टाइन का जीवन इस बात का प्रमाण है कि साधारण से भी साधारण व्यक्ति भी परिश्रम, साहस और लगन से सफलता प्राप्त कर सकता है। वैसे 1905 में प्रकाशित आइंस्टाइन के शोध पत्रों से भौतिकी में तत्काल कोई परिवर्तन नहीं हुए। मगर जैसे ही आइंस्टाइन के कार्यों को सही मान्यता मिली उनके सामने पदों को स्वीकार करने के लिए विश्वविद्यालयों और अकादमियों की भीड़ लग गई। इसी बीच आइंस्टाइन ने अपने सापेक्षता सिद्धांत का विकास करते हुए सामान्य सापेक्षता सिद्धांत को प्रतिपादित किया।
सामान्य सापेक्षता सिद्धांत ने एक नए संकल्पना को जन्म दिया, जिसके अनुसार : ‘यदि प्रकाश की एक किरण अत्यंत प्रबल गुरुत्वाकर्षण के क्षेत्र से गुजरेगी, तो वह मुड़ जाएगी।’ 1919 में ब्रिटेन के खगोल वैज्ञानिकों ने पूर्ण सूर्यग्रहण के अवसर पर किये गये अवलोकनों से आइंस्टाइन के इस पूर्वानुमान की सत्यता प्रमाणित की। अगले दिन आइंस्टाइन जब सोकर उठे तो उनकी दुनिया ही बदल गयी थी। उनके इस सिद्धांत को न्यूटन के गुरुत्वाकर्षण सिद्धांत के बाद दुनिया का सबसे बड़ा आविष्कार माना गया। आम लोगों में यह धारणा बन गयी कि इस सिद्धांत का अन्वेषक अवश्य ही अलौकिक प्रतिभा सम्पन्न व्यक्ति होगा। आइंस्टाइन का नाम प्रतिभा का पर्याय बन गया। आइंस्टाइन के मस्तिष्क को एक चमत्कारी अति-मानवीय मस्तिष्क माना जाने लगा। दुनिया के इन सब मिथकों से दूर आइंस्टाइन सदैव सादगी की मूर्ति बने रहें और व्यक्तिपूजा के खोखलेपन को उजागर करते रहे।
हालाँकि क्वांटम यांत्रिकी का बीज बोने के बावजूद खुद आइंस्टाइन संभाविता आधारित क्वांटम यांत्रिकी को जीवन भर स्वीकार नहीं कर पाए। अलबत्ता, अपने विरोध के बावजूद आइंस्टाइन इसे सबसे सफल व्यवहारिक सिद्धांत मानते थे। इसी प्रकार से आइंस्टाइन ब्रह्मांड को स्थिर मानते रहे, परंतु जब एडविन हबल ने अपने प्रयोगों के आधार पर बताया कि ब्रह्मांड फ़ैल रहा है, तब आइंस्टाइन ने इसे अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल माना। ‘मुझसे गलती हो गई’ यह कहना अपने आप में वैज्ञानिक मनोवृत्ति का एक महत्वपूर्ण लक्षण है। आइंस्टाइन ने हमे बता दिया कि विज्ञान में कोई भी सर्वज्ञानी नहीं होता!
आइंस्टाइन ने सिर्फ भौतिकी में ही क्रांति नहीं लायी बल्कि उन्होंने नस्लवाद, जातिवाद और युद्धवाद से भी लोहा लिया। वे जीवनभर शांति, अहिंसा, सामाजिक न्याय, मानवता और समाजवाद के पक्षधर रहे। आइंस्टाइन को जितना मीडिया प्रचार मिला, अब तक उतना प्रचार न्यूटन के अलावा किसी भी वैज्ञानिक को नहीं मिला। 14 मार्च, 1879 को जन्में शांतिवादी और मानवतावादी वैज्ञानिक आइंस्टाइन की मृत्यु 18 अप्रैल, 1955 को हुई। टाइम पत्रिका ने आइंस्टाइन को बीसवी सदी का सबसे प्रभावशाली मनुष्य माना। दिक्, काल और ब्रह्मांड संबंधी हमारे समझ में विस्तार के साथ भौतिकी की दुनिया में अंतर्ज्ञान विरोधी अवधारणाओं को उखाड़कर प्रकृति को गहराई से समझने के प्रयास में युगांतरकारी आइंस्टाइन को सैदव याद रखा जायेगा।

Filed under
#व्यक्ति विशेष
Continue reading

Special Articles

All in topic
एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस
Special Articles

एलपीजी का सशक्त विकल्प है बायोगैस

डॉ. शशांक द्विवेदी परियोजना प्रबंधक , टीएसएससी (कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय , भारत सरकार) भारत आज ऊर्जा परिवर्तन के एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। एक ओर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं ने करोड़ों घरों तक…

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ
Special Articles

एआई के युग में इंसान को आगे रखने वाली क्षमताएँ

आज हम ऐसे युग में प्रवेश कर चुके हैं जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence – AI) हमारे जीवन, कामकाज और सोचने के तरीके को बदल रही है। एआई आज हर क्षेत्र—शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग, उद्योग, मीडिया—में अपनी…

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई
Special Articles

इतनी बिजली क्यों खाती है एआई

चंद्रभूषण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड कंप्यूटिंग की चर्चा अभी दुनिया में सबसे ज्यादा बिजली खाने वाली तकनीकों की तरह हो रही है। सन 2022 में लगाए गए हिसाब के मुताबिक ये दोनों उस समय दुनिया की दो फीसदी बिजली हजम कर रही…