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| Hindustan |
इस समय देश में 90 करोड़ मोबाइल फोन हैं और लगभग 20 करोड़ से अधिक लोग इंटरनेट से जुड़े हैं। हालांकि आबादी के घनत्व के हिसाब से देखें, तो यह संख्या काफी कम है। अब भी देश के बहुत बड़े हिस्से, खासकर गांवों में इंटरनेट के लिए कोई आधारभूत ढांचा नहीं बना है। शिक्षा के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक अभी नहीं पहुंची है। देश के अधिकांश ग्रामीण व सरकारी स्कूलों में पिछली सदी की बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। स्कूल अभी क्लास रूम, ब्लैक बोर्ड और अध्यापकों की कमी से जूझ रहे हैं, उनसे ई-शिक्षा की उम्मीद नहीं की जा सकती। सवाल इंटरनेट के इन्फ्रास्ट्रक्चर से आगे जाकर लोगों की माली हालत से जुड़ता है। यह सब तब हो सकता है, जब अधिक से अधिक लोगों के पास कंप्यूटर हों, उन्हें चलाने के लिए बिजली हो, इंटरनेट कनेक्शन के लिए जरूरी धन हो और इंटरनेट के इस्तेमाल के लिए जरूरी जागरूकता हो और सचमुच में ऐसी व्यवस्थाएं ऑनलाइन उपलब्ध हों कि इंटरनेट का इस्तेमाल उन्हें फायदे का सौदा लगे। बेशक, भारत में प्रति व्यक्ति आय तेजी से बढ़ रही है और पिछले एक दशक में वह लगभग ढाई गुना हो चुकी है। कंप्यूटर रखने वाले लोगों की संख्या भी काफी बढ़ी है, लेकिन इसे सब तक पहुंचाने की मंजिल अभी बहुत दूर है। गांव-कस्बे तो दूर, अभी बड़े शहरों में भी सबकी पहुंच कंप्यूटर तक नहीं है। भारत को पूरी दुनिया में आईटी ताकत के रूप में देखा जाता है, लेकिन इस ताकत का वास्तविक आधार बहुत विस्तृत नहीं है।
हमारे सामने कुलजमा चुनौतियां दो तरह की हैं। एक तो जो वर्ग कंप्यूटर तक पहुंच रखता है, उसके लिए इंटरनेट आदि को उपयोगी बनाना। उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर का लगातार विकास करना। इंटरनेट स्पीड के मामले में आईटी सुपरपावर कहलाने वाला यह देश कई विकासशील देशों से भी पीछे है। दूसरी चुनौती तेज आर्थिक विकास की है, जिससे ज्यादा लोगों को रोजगार और ऐसी माली हालत दी जा सके कि वे अपना आर्थिक स्तर बढ़ाते हुए कंप्यूटर और इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले वर्ग में शामिल हो सकें। article link http://www.livehindustan.com/news/editorial/guestcolumn/article1-Government-one-lakh-crore-the-cost-of-various-projects-digital-India-57-62-450159.html

