रिसर्चरों का कहना है कि इस तकनीक का उपयोग स्मार्टफोन जैसे उपकरणों में भी किया जा सकता है जो पूरी तरह से बैटरी पर निर्भर हैं। इन उपकरणों में नई टेक्नोलॉजी को कुछ इस तरह से समाहित किया जा सकता है कि इनकी बैटरियां खत्म होने के बाद भी ये उपकरण किसी टीवी सिग्नल से ऊर्जा प्राप्त कर टेक्स्ट मैसेज भेजने के काबिल बने रहेंगे। भवनों और कपड़ों के अंदर निर्मित सेंसरों का एक ऐसा नेटवर्क कायम किया जा सकता है जो ऊर्जा का साझा उपयोग करेगा। प्रत्येक उपकरण के लिए अलग से ऊर्जा उत्पन्न करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रिसर्चरों का कहना है कि इस तकनीक का उपयोग स्मार्टफोन जैसे उपकरणों में भी किया जा सकता है जो पूरी तरह से बैटरी पर निर्भर हैं। इन उपकरणों में नई टेक्नोलॉजी को कुछ इस तरह से समाहित किया जा सकता है कि इनकी बैटरियां खत्म होने के बाद भी ये उपकरण किसी टीवी सिग्नल से ऊर्जा प्राप्त कर टेक्स्ट मैसेज भेजने के काबिल बने रहेंगे। भवनों और कपड़ों के अंदर निर्मित सेंसरों का एक ऐसा नेटवर्क कायम किया जा सकता है जो ऊर्जा का साझा उपयोग करेगा। प्रत्येक उपकरण के लिए अलग से ऊर्जा उत्पन्न करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
