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ग्लोबल वार्मिंग से समाधान

सफेद रंग की छतों से रुकेगी ग्लोबल वार्मिंग यदि हम घर की छतों पर सफेद पेंट कर दें और सड़कों और पगडंडियों पर हल्के रंग वाले पदार्थो का प्रयोग करें तो हमारे शहर गर्मियों में तापमान में गिरावट महसूस करेंगे। इससे कॉर्बन बचेगा…

ग्लोबल वार्मिंग से समाधान

सफेद रंग की छतों से रुकेगी ग्लोबल वार्मिंग यदि हम घर की छतों पर सफेद पेंट कर दें और सड़कों और पगडंडियों पर हल्के रंग वाले पदार्थो का प्रयोग करें तो हमारे शहर गर्मियों में तापमान में गिरावट महसूस करेंगे। इससे कॉर्बन बचेगा। इस कॉर्बन की मात्रा सड़कों पर 50 साल तक कारें नहीं चलाने से बचने वाले कॉर्बन के बराबर होगी। एक अध्ययन के मुताबिक ग्लोबल वार्मिग से निपटने के लिए शहरी पर्यावरण में फेरबदल करने का सबसे आसान तरीका यह है कि हम शहर की परावर्तकता (रिफ्लेटिविटी) को बढ़ा दें ताकि सूरज की रोशनी को वापस अंतरिक्ष की तरफ मोड़ा जा सके। हल्के रंगों की सतह वाली शहरी इमारतें गर्मी के मौसम में पारंपरिक इमारतों की तुलना में ठंडी होंगी क्योंकि वे इंफ्रारेड रेडिएशन को परावर्तित कर देंगी। इससे एयर कंडीशनिंग पर खर्च होने वाली ऊर्जा की भी बचत होगी। लगातार बढ़ रहे कॉर्बन उत्सर्जन के कारण शहर और नगर गर्मी के टापू बनते जा रहे हैं। सूरज की रोशनी सोखने वाली गहरे रंगों वाली इमारतों और पक्की सड़कों की वजह से गर्मी के मौसम में शहरों में तापमान असहनीय हो जाता है। दो साल पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के ग्लोबल वार्मिग संबंधी शीर्षस्थ सलाहकार और ऊर्जा मंत्री स्टेवन चु ने लंदन में रॉयल सोसाइटी को बताया था कि बढ़ते हुए तापमान से निपटने के लिए जलवायु में फेरबदल या जियो इंजीनियरिंग का सबसे असरदार तरीका यह है कि हम अपनी छतों को सफे द कर दें। कनाडा में कंकोर्डिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हाशिम अकबरी के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम ने प्रो चु के सुझाव का विस्तार से अध्ययन करने के बाद पाया है कि यह तकनीक सचमुच बहुत असरदार है। उन्होंने अनुमान लगाया है कि किसी शहर या नगर में छतों और सड़कों पर हल्के रंग वाले पदार्थो का प्रयोग करने से उनकी परावर्तकता में करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि हो जाती है। रिसर्चरों का कहना है कि यदि दुनिया के सारे शहरी क्षेत्रों में छतों को सफेद कर दिया जाए और सड़कें हल्के रंगों वाले सामान से निर्मित की जाएं तो पृथ्वी के के तापमान में 0.13 डिग्री फारेनहाइट की कमी की जा सकती है। इससे 130 अरब टन से 150 अरब टन तक कार्बन डाक्साइड उत्सर्जन की बचत होगी। अकबरी का कहना है कि छतों को सफेद पोतने में कोई अनोखी बात नहीं है। यह टेक्नोलॉजी सैकड़ों वर्ष पुरानी है। इस संबंध में पश्चिमी एशिया का उदाहरण दिया जा सकता है, जहां पारंपरिक रूप से इमारतों में सफेद रंग का इस्तेमाल होता है। ग्रीस में भी सदियों से छतों का रंग सफेद रखा जाता है। इन वैज्ञानिकों ने एन्वायरमेंटल रिसर्च लेटर्स में प्रकाशित अपनी अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि अधिक सौर परावर्तकता से वायुमंडलीय तापमान में गिरावट आएगी और ग्लोबल वार्मिग के कारण होने वाली तापमान वृद्धि के प्रभाव कम हो जाएंगे। रिसर्चरों का कहना है कि सड़कों और छतों की सामान्य मरम्मत के दौरान वहां परावर्तक पदार्थ लगा कर शहरों की सौर परावर्तकता बहुत कम खर्च पर बढ़ाई जा सकती है। सौर परावर्तकता को एल्बेडो भी कहा जाता है। इसे शून्य से एक के पैमाने पर नापा जाता है। 1.0 का मतलब पूरी तरह से सफेद यानी पूरी तरह से परावर्तक होता है, जबकि शून्य का मतलब होता है पूरी तरह काला होना। काली सतह सूरज की सारी रोशनी को जज्ब कर लेती है। अकबरी की रिसर्च टीम का कहना है कि सफेद छतों से गर्मियों में इमारतों के एयर कंडिशनिंग बिल में 10-15 प्रतिशत की कमी की जा सकती है क्योंकि इमारत कम मात्रा में गर्मी जज्ब करती है और छतों का ठंडापन अधिक देर तक रहता है। अमेरिका के कई शहरों में लागू बिल्डिंग कोड में छतों को सफेद रखने को कहा जा रहा है। न्यूयॉर्क में 25 लाख वर्ग फुट छतों को सफेद कर दिया गया है। ग्लोबल वार्मिग के खिलाफ जंग में छतों को सफेद रंग पोतने का सुझाव सचमुच एक नायाब विचार है, जिस पर हमारे नगर योजनाकारों, वास्तुशिल्पियों, सिविल इंजीनियरों और आम जनता को भी गौर करना चाहिए। लेखक- मुकुल व्यास
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