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ऊर्जा संसाधनों का हो संतुलित इस्तेमाल

ऊर्जा संरक्षण दिवस प्रियंका शर्मा द्विवेदी Rashtriya Sahara अपने देश की ऊर्जा जरूरतों की मांग और आपूर्ति में बहुत बड़ा अंतर है। देश में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले दिनों नार्दर्न और ईस्टर्न ग्रिड फेल होने स…

ऊर्जा संसाधनों का हो संतुलित इस्तेमाल
ऊर्जा संरक्षण दिवस प्रियंका शर्मा द्विवेदी
Rashtriya Sahara
अपने देश की ऊर्जा जरूरतों की मांग और आपूर्ति में बहुत बड़ा अंतर है। देश में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले दिनों नार्दर्न और ईस्टर्न ग्रिड फेल होने से देश में अभूतपूर्व बिजली संकट पैदा हो गया था। देश के 21 राज्यों में पावर सप्लाई ठप पड़ गई और लगभग 70 करोड़ लोग प्रभावित हुए। देश में मेट्रो और रेल सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ गयी थी। ट्रेनें पटरियों पर खड़ी रह गई थीं। यह विकसित होते भारत के लिए खतरनाक संकेत थे। इस संकट ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए। वास्तव में अगर इस समय बिजली संकट को गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह भारत के विकास के लिए सबसे बड़ा अभिशाप सिद्ध हो सकता है क्योंकि तरक्की का रास्ता ऊर्जा से ही होकर जाता है । भारत में 22 हजार मेगावाट बिजली इसलिए नहीं बन पा रही है, क्योंकि उसके लिए पर्याप्त मात्रा में ईधन नहीं है। वहीं, देश के अधिकांश हिस्से बिजली की भारी कमी से दो- चार हैं। पूरा बिजली क्षेत्र जबरदस्त संकट से गुजर रहा है। नई बिजली परियोजनाओं को कोयला लिंकेज नहीं मिल रहे हैं। जिन बिजली प्लांट को लिंकेज मिले भी हैं, उन्हें पर्याप्त कोयला नहीं मिल पा रहा है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बावजूद स्थिति नहीं सुधर रही। देश में 86 बिजलीघरों में कोयले को ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उद्योग संगठन फिक्की के अनुसार कोयला आपूर्ति में बाधा नहीं दूर की गई तो देश की बिजली इकाइयों के सामने बंदी का संकट पैदा हो सकता है। यह जल्दी ही आने वाले बिजली संकट का संकेत है। जो देश के विकास को सीधे प्रभावित करेगा । इसलिए अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रेतों पर गंभीरता से विचार करते हुए ऊर्जा बचत के लिए जरूरी उपाय अपनाने पड़ेंगे। इस मायने में सूर्य से प्राप्त सौर ऊर्जा अत्यंत महत्वपूर्ण विकल्प है। सौर ऊर्जा प्रदूषण रहित, निर्बाध गति से मिलने वाला सबसे सुरक्षित ऊर्जा स्रेत है। अपने देश में यह लगभग बारह मास उपलब्ध है। सौर ऊर्जा को ‘फोटोवोल्टिक सेल’ द्वारा विद्युत में परिवर्तित करने की तकनीक अब देश में उपलब्ध है। यह तकनीक अभी जलविद्युत और थर्मल ऊर्जा से कुछ महंगी जरूर है, लेकिन औद्योगिक स्तर पर उत्पादन होने पर इसकी कीमत कम हो जाएगी। अनुसंधान द्वारा ‘फोटोवोल्टिक सेल’ की कार्यक्षमता बढ़ाए जाने की भी संभावना है। सौर ऊर्जा को उन्नत करने के लिए हमें अपने संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। ऊर्जा के मामले में दूसरों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। अपनी तकनीक और संसाधनों का उपयोग कर आत्मनिर्भरता हासिल करनी ही होगा। यह दु:ख का विषय है कि हमने सौर ऊर्जा के उपयोग पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। परिस्थितियां विषम होने के कारण हमें सभी उपलब्ध अक्षय ऊर्जा विकल्पों पर विचार करना होगा। इसके साथ ही ऊर्जा संरक्षण के व्यावहारिक कदमों को अपनाना होगा ताकि बड़े पैमाने पर बिजली की बचत हो सके। घरों में पानी की टंकियो में पानी पहुंचाने के लिए टाइमर का उपयोग करके पानी का अपव्यय रोककर विद्युत ऊर्जा की बचत की जा सकती है। साधारण सौ वाट के बल्ब के स्थान पर सीएलएफ का प्रयोग कर 75 से 80 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत की जा सकती है। यह साधारण बल्ब की तुलना में लगभग आठ गुना चलती है। घर और सरकारी कार्यालयों में आईएसआई चिह्नित विद्युत उपकरणों का इस्तेमाल जरूरी है और इसके लिए बकायदा कानून होना चाहिए। हर जाति, धर्म और संप्रदाय में शादी-विवाह जैसे सामाजिकधािर्मक आयोजन यथासंभव दिन में ही संपन्न करने के लिए लोगों को जागरूक किया जा सकता है। भवन के निर्माण के दौरान प्लॉट के चारों तरफ मौजूद भू-भाग को पेड़ो-लताओं से आच्छादित करके हम भवनों को गर्म होने से बचा सकते हैं ताकि एसी, कूलर या सीलिंग फैन इत्यादि का कम से कम उपयोग हो । कमरे की दीवार की भीतरी सतह पर हलके रंगों का प्रयोग करें। इससे कम वाट के प्रकाश उपकरणों से कमरे को यथोचित रोशन किया जा सकता है। खाना बनाने के लिए सोलर कुकर व पानी गर्म करने के लिए गीजर के स्थान पर सोलर वाटर हीटर का उपयोग कर हम विद्युत ऊर्जा संरक्षण कर राष्ट्रहित में भागीदार बन सकते हैं। यदि गीजर का उपयोग करें तो इसे न्यूनतम समय तक उपयोग में लायें।इसके लिए थर्मोस्टेट एवं टाइमर के तापमान की सेटिंग का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। ये कुछ ऐसे उपाय हैं जिनका प्रयोग करके ऊर्जा की बचत की जा सकती है । देश की बढ़ती आबादी के उपयोग के लिए और विकास को गति देने के लिए हमारी ऊर्जा की मांग भी बढ़ रही है। लेकिन उत्पादन में आशातीत बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है। पुरानी बिजली परियोजनाएं कभी पूरा उत्पादन कर नहीं पाईं और नई परियोजनाओं के लिए स्थितियां दूभर सी हैं। खतरा देश की तरक्की की रफ्तार के प्रभावित होने का है। बिजली के इस संकट को अगर अभी दूर नहीं किया गया तो भविष्य संकटमय साबित होगा । दुर्भाग्यवश खनिज तेल पेट्रोलियम, गैस, उत्तम गुणवत्ता के कोयले जैसे प्राकृतिक संसाधन हमारे यहां बहुत सीमित हैं। हमें बड़ी मात्रा में पेट्रो पदार्थ आयात करना पड़ता है। अर्थशास्त्रियों के अनुसार यदि एक बैरल कच्चे तेल की कीमत में एक डॉलर की वृद्धि होती है तो भारत के तेल आयात बिल में 425 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त व्यय जुड़ जाता है अर्थात तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर हमारे मुद्रा भंडार पर पड़ता है। तेल कीमतों का उतार-चढ़ाव घरेलू और बाहरी दोनों मोचरे को प्रभावित करेगा। तेल के बाद कोयला हमारे ऊर्जा भंडार की महत्त्वपूर्ण इकाई है। तेल और कोयला दोनों जीवाश्म ईंधन हैं लेकिन इनके सीमित भंडार के कारण ऊर्जा का संरक्षण वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है। ऊर्जा की बचत बिना हम विकसित राष्ट्र का सपना नहीं देख सकते । ऊर्जा बचत के उपायों को शीघ्रतापूर्वक और सख्ती से अमल में लाए जाने की जरूरत है। इसमें हर नागरिक की भागीदारी होनी चाहिए। छोटे स्तर की बचत भी कारगर होगी क्योंकि बूंद-बूंद से ही सागर भरता है। जब हम ऊर्जा के साधनों का इस्तेमाल सोच-समझकर और मितव्ययता से करेंगे, तभी यह भविष्य तक रह पाएंगे। अंतत: देश का प्रत्येक नागरिक इस दिशा में जागरूक हो, हर संभव ऊर्जा बचत करें तथा औरों को भी इसका महत्व बताएं। article link http://www.rashtriyasahara.com/newsview.aspx?eddate=12/14/2012%2012:00:00%20AM&pageno=10&edition=10&prntid=2109&bxid=155713968&pgno=10

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