वॉट्सएप को खरीदने के लिए फेसबुक मजबूर हो गया था क्योंकि किशोर और युवा यूजर की गिरती संख्या फेसबुक के लिए लंबे समय से समस्या बनी हुई है। फेसबुक के सीएफओ डेविड एबर्समैन ने पिछले साल अक्टूबर में यह एलान किया था कि कंपनी के टीनेज मार्केट सेगमेंट में गिरावट आ रही है। इस एलान से कंपनी के शेयर में हलचल पैदा हो गई थी। फेसबुक की तुलना में वॉट्सएप पर युवाओं की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। जूकरबर्ग को वॉट्सएप पर विश्वास के कई प्रमुख कारण है जिनसे उन्हें लगता है ये सौदा उनके और फेसबुक दोनों के लिए भविष्व में दूरगामी सिद्ध हो सकता है। जूकरबर्ग को इस बात का विश्वास है कि बहुत जल्द वॉट्सएप से 1 अरब लोग जुड़ जाएंगे। मौजूदा 45 करोड़ यूजर के दम पर ही वॉट्सएप का ग्रोथ रेट फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्काइप और जीमेल से कहीं अधिक है। वॉट्सएप के हर महीने के 45 करोड़ एक्टिव यूजर में हर दिन 70 फीसदी यूजर वापस आते हैं। इस तरह का ट्रेंड बहुत कम देखने को मिलता है। जूकरबर्ग को इस बात पर गर्व है कि फेसबुक पर हर रोज 62 फीसदी लोग वापस आते हैं। लेकिन यह आंकड़ा भी वॉट्सएप के आंकड़े के आगे फीका है। जूकरबर्ग को लगता है कि वॉट्सएप टेंसेंट, गूगल सर्च, यूट्यूबू और फेसबुक की तरह बहुत ही शानदार प्रॉडक्ट साबित होगा। वॉट्सएप के कई यूजर को इस बात की आशंका है कि कहीं फेसबुक में मर्जर के बाद वॉट्सएप की सब्सक्रिप्शन फी न बढ़ जाए। फिलहाल इस सौदे से भारत में वॉट्सएप के करीब 3 करोड़ यूजर को डरने की जरुरत नहीं है। सौदे की घोषणा के दौरान जूकरबर्ग और कूम-दोनों ने कहा है कि उनका ध्यान पैसे कमाने से ज्यादा भविष्य में ग्रोथ पर रहेगा। यह बयान अहम है। हालांकि, फेसबुक या वॉट्सएप की ओर से दाम बढ़ाए या घटाए जाने के बारे में कुछ नहीं गया है। वॉट्सएप की शुरुआत 2009 में अमेरिका के ब्रायन एक्टन और उक्रेन के जन कूम ने की थी। जन कूम कंपनी के सीईओ हैं। दोनों ही पहले याहू में नौकरी करते थे। इस कंपनी में मालिकों को मिलाकर कुल 55 लोग काम करते हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि वॉट्सएप के सीईओ जन कूम और उनके साथी ब्रायन एक्टन को फेसबुक ने कुछ साल पहले नौकरी देने से मना कर दिया था। लेकिन अब फेसबुक ने जन कूम को फेसबुक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल करने का फैसला किया है। फेसबुक के सौदे से अकेले जन कूम करीब 42160 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक बन जाएंगे। जन कूम ने फेसबुक के साथ सौदे के कागजों पर दस्तखत वॉट्सएप के दफ्तर में नहीं बल्कि वहां से कुछ दूरी पर मौजूद एक सफेद इमारत का चुनाव किया जो पहले नॉर्थ काउंटी सोशल सर्विस का दफ्तर था। इसी दफ्तर में कई साल पहले कूम खाने का कूपन लेने के लिए लाइन लगाते थे। जन कूम ने जिंदगी में कई उतार चढ़ाव देखे हैं। इस डील के तहत 19 अरब अमेरिकी डॉलर की रकम में 12 अरब अमेरिकी डॉलर के फेसबुक के शेयर, 4 अरब अमेरिकी डॉलर की रकम नकद और 3 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के शेयर वॉट्सएप के मालिक और कर्मचारियों को डील के चार साल बाद दिए जाएंगे। 19 अरब अमेरिकी डॉलर की रकम फेसबुक के कुल बाजार कीमत की 9 फीसदी रकम के बराबर है। इस सौदे के बाद भी वॉट्सएप की सुविधा इसी ब्रैंड नेम के साथ बाजार में उपलब्ध रहेगी। सौदे की वजह से सिर्फ इसके मालिकाना हक में बदलाव होगा। वॉट्सएप और फेसबुक के बीच हो रही इतनी बड़ी डील के भविष्य पर कुछ विशेषज्ञ सवाल भी उठा रहें है और उनकी चिंताए जायज भी है । विशेषज्ञों के मुताबकि, वॉट्सएप और फेसबुक के बीच सौदे की रकम बहुत बड़ी है। इससे सोशल मीडिया का गुब्बारा फूटने जैसी बातें शुरू हो सकती हैं। यह सौदा फेसबुक के लिए बहुत बड़ा जोखिम है क्योंकि सोशल मीडिया में मौसम के साथ प्रॉडक्ट बदलता रहता है। हो सकता है कि अगले साल कोई और अच्छा एप आ जाए। फेसबुक की तरफ से इतनी बड़ी रकम लगाने के पीछे कंपनी का स्नैपचैट को न खरीद पाने का मलाल भी हो सकता है। इसके अलावा यूथ फैक्टर भी अहम है।कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक इस सौदे से फेसबुक का भविष्य जरुर सुरक्षित हो गया है । फेसबुक की इस रणनीति से साफ हो गया है कि अब कंपनी अलग-अलग तरह के सोशल मीडिया प्रॉपर्टी को अपने साथ जोड़े रखना चाहने वाली कंपनी बन गई है।
वॉट्सएप को खरीदने के लिए फेसबुक मजबूर हो गया था क्योंकि किशोर और युवा यूजर की गिरती संख्या फेसबुक के लिए लंबे समय से समस्या बनी हुई है। फेसबुक के सीएफओ डेविड एबर्समैन ने पिछले साल अक्टूबर में यह एलान किया था कि कंपनी के टीनेज मार्केट सेगमेंट में गिरावट आ रही है। इस एलान से कंपनी के शेयर में हलचल पैदा हो गई थी। फेसबुक की तुलना में वॉट्सएप पर युवाओं की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है। जूकरबर्ग को वॉट्सएप पर विश्वास के कई प्रमुख कारण है जिनसे उन्हें लगता है ये सौदा उनके और फेसबुक दोनों के लिए भविष्व में दूरगामी सिद्ध हो सकता है। जूकरबर्ग को इस बात का विश्वास है कि बहुत जल्द वॉट्सएप से 1 अरब लोग जुड़ जाएंगे। मौजूदा 45 करोड़ यूजर के दम पर ही वॉट्सएप का ग्रोथ रेट फेसबुक, इंस्टाग्राम, स्काइप और जीमेल से कहीं अधिक है। वॉट्सएप के हर महीने के 45 करोड़ एक्टिव यूजर में हर दिन 70 फीसदी यूजर वापस आते हैं। इस तरह का ट्रेंड बहुत कम देखने को मिलता है। जूकरबर्ग को इस बात पर गर्व है कि फेसबुक पर हर रोज 62 फीसदी लोग वापस आते हैं। लेकिन यह आंकड़ा भी वॉट्सएप के आंकड़े के आगे फीका है। जूकरबर्ग को लगता है कि वॉट्सएप टेंसेंट, गूगल सर्च, यूट्यूबू और फेसबुक की तरह बहुत ही शानदार प्रॉडक्ट साबित होगा। वॉट्सएप के कई यूजर को इस बात की आशंका है कि कहीं फेसबुक में मर्जर के बाद वॉट्सएप की सब्सक्रिप्शन फी न बढ़ जाए। फिलहाल इस सौदे से भारत में वॉट्सएप के करीब 3 करोड़ यूजर को डरने की जरुरत नहीं है। सौदे की घोषणा के दौरान जूकरबर्ग और कूम-दोनों ने कहा है कि उनका ध्यान पैसे कमाने से ज्यादा भविष्य में ग्रोथ पर रहेगा। यह बयान अहम है। हालांकि, फेसबुक या वॉट्सएप की ओर से दाम बढ़ाए या घटाए जाने के बारे में कुछ नहीं गया है। वॉट्सएप की शुरुआत 2009 में अमेरिका के ब्रायन एक्टन और उक्रेन के जन कूम ने की थी। जन कूम कंपनी के सीईओ हैं। दोनों ही पहले याहू में नौकरी करते थे। इस कंपनी में मालिकों को मिलाकर कुल 55 लोग काम करते हैं। दिलचस्प तथ्य यह है कि वॉट्सएप के सीईओ जन कूम और उनके साथी ब्रायन एक्टन को फेसबुक ने कुछ साल पहले नौकरी देने से मना कर दिया था। लेकिन अब फेसबुक ने जन कूम को फेसबुक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर में शामिल करने का फैसला किया है। फेसबुक के सौदे से अकेले जन कूम करीब 42160 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक बन जाएंगे। जन कूम ने फेसबुक के साथ सौदे के कागजों पर दस्तखत वॉट्सएप के दफ्तर में नहीं बल्कि वहां से कुछ दूरी पर मौजूद एक सफेद इमारत का चुनाव किया जो पहले नॉर्थ काउंटी सोशल सर्विस का दफ्तर था। इसी दफ्तर में कई साल पहले कूम खाने का कूपन लेने के लिए लाइन लगाते थे। जन कूम ने जिंदगी में कई उतार चढ़ाव देखे हैं। इस डील के तहत 19 अरब अमेरिकी डॉलर की रकम में 12 अरब अमेरिकी डॉलर के फेसबुक के शेयर, 4 अरब अमेरिकी डॉलर की रकम नकद और 3 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के शेयर वॉट्सएप के मालिक और कर्मचारियों को डील के चार साल बाद दिए जाएंगे। 19 अरब अमेरिकी डॉलर की रकम फेसबुक के कुल बाजार कीमत की 9 फीसदी रकम के बराबर है। इस सौदे के बाद भी वॉट्सएप की सुविधा इसी ब्रैंड नेम के साथ बाजार में उपलब्ध रहेगी। सौदे की वजह से सिर्फ इसके मालिकाना हक में बदलाव होगा। वॉट्सएप और फेसबुक के बीच हो रही इतनी बड़ी डील के भविष्य पर कुछ विशेषज्ञ सवाल भी उठा रहें है और उनकी चिंताए जायज भी है । विशेषज्ञों के मुताबकि, वॉट्सएप और फेसबुक के बीच सौदे की रकम बहुत बड़ी है। इससे सोशल मीडिया का गुब्बारा फूटने जैसी बातें शुरू हो सकती हैं। यह सौदा फेसबुक के लिए बहुत बड़ा जोखिम है क्योंकि सोशल मीडिया में मौसम के साथ प्रॉडक्ट बदलता रहता है। हो सकता है कि अगले साल कोई और अच्छा एप आ जाए। फेसबुक की तरफ से इतनी बड़ी रकम लगाने के पीछे कंपनी का स्नैपचैट को न खरीद पाने का मलाल भी हो सकता है। इसके अलावा यूथ फैक्टर भी अहम है।कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक इस सौदे से फेसबुक का भविष्य जरुर सुरक्षित हो गया है । फेसबुक की इस रणनीति से साफ हो गया है कि अब कंपनी अलग-अलग तरह के सोशल मीडिया प्रॉपर्टी को अपने साथ जोड़े रखना चाहने वाली कंपनी बन गई है।
